कलेक्टर टीना डाबी ने गांव में क्यों लगाई रात्रि चौपाल? विधायक के आरोपों से क्यों हुआ हंगामा?
टोंक की रात्रि चौपाल में कलेक्टर टीना डाबी ने 90 से अधिक समस्याओं का समाधान तो कर दिया, लेकिन उसी मंच पर उठे खनन माफिया से साठगांठ के आरोपों ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया—क्या वन विभाग के भीतर चल रहा है कोई छुपा हुआ खेल?
राजस्थान के टोंक जिले में मंगलवार रात प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल देखने को मिली, जब कलेक्टर Tina Dabi ने ककोड़ गांव में रात्रि चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। इस चौपाल में ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे और उन्होंने बिजली, पानी, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें रखीं। कलेक्टर ने मौके पर ही तेजी से कार्रवाई करते हुए करीब 4 घंटे में 90 से अधिक समस्याओं का समाधान किया।
ग्रामीण स्तर पर समाधान के निर्देश
टीना डाबी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि गांव की समस्याओं का समाधान गांव स्तर पर ही किया जाए, ताकि लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। चौपाल में टोंक ADM, SDM सहित सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
चौपाल में गरमाया राजनीतिक माहौल
इसी दौरान देवली-उनियारा से बीजेपी विधायक Rajendra Gurjar भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। विधायक ने रेंजर पंकज शर्मा पर बजरी माफियाओं से साठगांठ कर अवैध खनन को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
खनन माफिया और वन विभाग पर आरोप
विधायक का कहना था कि उनके पास वीडियो और फोटो सबूत मौजूद हैं, जिनमें अवैध बजरी खनन के मामले दिखाई देते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जहां छोटे मामलों में तुरंत मुकदमे दर्ज हो जाते हैं, वहीं बड़े स्तर पर चल रहे अवैध खनन को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है।
प्रशासन ने दिया जांच का आश्वासन
मौके पर मौजूद उपवन संरक्षक अनुराग महर्षि ने मामले की जांच का आश्वासन दिया। वहीं रेंजर पंकज शर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर सफाई पेश की और डीएम को स्थिति से अवगत कराया।
कुल मिलाकर स्थिति
रात्रि चौपाल जहां एक ओर जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सराही गई, वहीं दूसरी ओर वन विभाग पर लगे गंभीर आरोपों ने प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है।