राजस्थान में मेडिकल सामान खरीदारी में गड़बड़ी: चहेतों के लिए टेंडर शर्तें बदल दीं, CAG ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा
राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (RMSCL) में 2021-24 के दौरान दवाओं-उपकरणों की खरीद में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी। चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर शर्तें बदलीं, गुणवत्ता से समझौता हुआ और राज्य को 150 करोड़ से अधिक का नुकसान। CAG ने ऑडिट में खुलासा कर मुख्य सचिव सहित अधिकारियों को पत्र लिखकर जांच व कार्रवाई की सिफारिश की।
जयपुर। राजस्थान में स्वास्थ्य विभाग के तहत काम करने वाली राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) में पिछले तीन वर्षों के दौरान मेडिकल सामान और दवाओं की खरीदारी में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। इन गड़बड़ियों का खुलासा भारत के महालेखाकार (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट से हुआ है। CAG ने इस मामले को गंभीर बताते हुए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित चार अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर तत्काल जांच और कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि टेंडर प्रक्रिया में चहेते आपूर्तिकर्ताओं को फायदा पहुंचाने के लिए शर्तों को जानबूझकर बदला गया, जिससे राज्य को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
टेंडर शर्तों में हेराफेरी: चहेतों को फायदा CAG की ऑडिट के अनुसार, RMSCL ने 2021 से 2024 तक के दौरान विभिन्न मेडिकल उपकरणों, दवाओं और सर्जिकल सामग्री की खरीद के लिए जारी किए गए टेंडरों में कई अनियमितताएं कीं। मुख्य आरोप यह है कि टेंडर की मूल शर्तों को अंतिम समय में बदल दिया गया, ताकि कुछ चुनिंदा फर्मों को अनुबंध मिल सके। उदाहरण के तौर पर:टर्नओवर की शर्त में बदलाव: मूल टेंडर में आपूर्तिकर्ता फर्मों से न्यूनतम 100 करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर मांगा गया था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 50 करोड़ कर दिया गया। इससे छोटी और कम अनुभवी फर्में अयोग्य हो गईं, जबकि CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे राज्य को गुणवत्ता वाले सामान की आपूर्ति में कमी आई। तकनीकी योग्यता में ढील: कुछ टेंडरों में ISO सर्टिफिकेशन या जीएमपी (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) जैसी अनिवार्य शर्तों को वैकल्पिक बना दिया गया। परिणामस्वरूप, निम्न गुणवत्ता वाली दवाएं और उपकरण अस्पतालों में पहुंचे, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य को खतरा पैदा हुआ। बिना ई-बिडिंग के खरीद: ऑडिट में पाया गया कि कई खरीदें ई-बिडिंग प्रक्रिया का पालन किए बिना की गईं, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है। इससे एकाधिकार पैदा हुआ और कीमतें 20-30% तक बढ़ गईं। इन बदलावों से RMSCL को अनुमानित 150 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त व्यय करना पड़ा। CAG ने इसे "साजिशपूर्ण" बताते हुए कहा कि ये परिवर्तन टेंडर जारी होने के बाद किए गए, जब बोली लगाने वाली फर्में पहले ही शर्तों के अनुसार दस्तावेज जमा कर चुकी थीं। इससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई और राज्य के खजाने को चपत लगी।
CAG की ऑडिट: तीन सालों की जांच में कई खुलासे महालेखाकार की यह ऑडिट 2021-22 से 2023-24 तक की अवधि को कवर करती है, जब RMSCL ने करीब 5,000 करोड़ रुपये मूल्य के मेडिकल सामान की खरीद की। ऑडिट टीम ने 50 से अधिक टेंडर फाइलों का परीक्षण किया, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख अनियमितताएं पाई गईं:अनियमितता का प्रकार ,विवरण ,अनुमानित नुकसान (करोड़ रुपये में) ,टेंडर शर्तों में संशोधन ,मूल शर्तें चहेतों के अनुकूल बदली गईं ,85,बिना प्रतिस्पर्धा के खरीद,सिंगल बिडर को अनुबंध ,45 ,गुणवत्ता मानकों की अनदेखी ,निम्न गुणवत्ता वाले सामान की स्वीकृति,30 ,देरी से भुगतान/ओवरपेमेंट ,आपूर्तिकर्ताओं को अतिरिक्त ब्याज ,20
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि RMSCL के अधिकारियों ने टेंडर समिति की बैठकों के मिनट्स में हेराफेरी की, ताकि निर्णयों को वैध ठहराया जा सके। इसके अलावा, कुछ फर्मों को अनुबंध देने के बाद भी उनके प्रदर्शन की निगरानी नहीं की गई, जिससे खराब सामान की आपूर्ति जारी रही।
मुख्य सचिव को पत्र: कार्रवाई की मांग CAG ने 15 नवंबर 2025 को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को पत्र लिखा, जिसमें RMSCL के एमडी, वित्तीय सलाहकार, खरीद प्रबंधक और एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी को नामित किया गया। पत्र में कहा गया है कि इन अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए। CAG ने सिफारिश की है:सभी प्रभावित टेंडरों की फॉरेंसिक ऑडिट कराई जाए। RMSCL में ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम को मजबूत किया जाए। ,भविष्य की खरीदों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट अनिवार्य हो। ,राज्य सरकार द्वारा क्षतिपूर्ति के लिए दोषी फर्मों से वसूली की जाए। मुख्य सचिव कार्यालय से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है और विशेष जांच टीम गठित करने पर विचार कर रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रभाव: मरीजों को नुकसान; ये गड़बड़ियां राजस्थान के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर सीधा असर डाल रही हैं। CAG रिपोर्ट के अनुसार, निम्न गुणवत्ता वाली दवाओं के कारण कई मामलों में इलाज प्रभावित हुआ, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भ्रष्टाचार स्वास्थ्य बजट के दुरुपयोग का उदाहरण है, जो पहले भी कई बार सामने आ चुका है। विपक्षी दल इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की तैयारी कर रहे हैं।