राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: एसआई भर्ती-2021 रद्द ही रहेगी, पूरी भर्ती प्रक्रिया को ‘मजाक’ करार दिया

राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 4 अप्रैल 2026 को एसआई भर्ती-2021 को पूरी तरह रद्द रखने वाले एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने पेपर लीक को संगठित धांधली बताते हुए कहा कि राज्य निष्पक्ष भर्ती सुनिश्चित करने में विफल रहा और पूरी भर्ती प्रक्रिया को मजाक बना दिया गया। आरपीएससी चेयरमैन की भूमिका संदिग्ध बताई गई। चयनित अभ्यर्थियों की अपील खारिज कर कोर्ट ने जोर दिया कि दूषित प्रक्रिया में व्यक्तिगत निर्दोषता का दावा पर्याप्त नहीं। साथ ही विधायिका से आरपीएससी सदस्य चयन में पारदर्शी गाइडलाइंस बनाने की अपील की।

Apr 5, 2026 - 11:26
राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: एसआई भर्ती-2021 रद्द ही रहेगी, पूरी भर्ती प्रक्रिया को ‘मजाक’ करार दिया

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शनिवार (4 अप्रैल 2026) को सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती-2021 को पूरी तरह रद्द रखने वाले एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने सरकार, चयनित अभ्यर्थियों और राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के तत्कालीन सदस्यों द्वारा दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता (या संगीता शर्मा, विभिन्न रिपोर्टों में उल्लेख) की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। विस्तृत आदेश देर रात उपलब्ध हुआ, जिसमें कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए और राज्य सरकार तथा आरपीएससी पर तीखी टिप्पणियां कीं।

पेपर लीक और संगठित धांधली

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि एसआई भर्ती-2021 में पेपर लीक एक संगठित और सुनियोजित तंत्र के माध्यम से हुआ था। कई अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिए गए थे, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पूरी तरह प्रभावित हो गई।

अदालत ने टिप्पणी की:“जब चयन प्रक्रिया ही दूषित हो जाए, तो उस पर आधारित किसी भी नियुक्ति को वैध नहीं माना जा सकता। राज्य का दायित्व है कि वह निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करे, लेकिन वर्तमान मामले में राज्य यह दायित्व निभाने में पूरी तरह विफल रहा है।”

कोर्ट ने आगे कहा कि पूरी भर्ती को मजाक बना दिया गया है। ऐसी स्थिति में चयनित अभ्यर्थियों का व्यक्तिगत रूप से निर्दोष होने का दावा पर्याप्त नहीं है। जब पूरी प्रक्रिया संदिग्ध हो, तो किसी भी उम्मीदवार को वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं होता। न्याय के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जा सकता, भले ही चयनित युवाओं के प्रति सहानुभूति हो।

आरपीएससी चेयरमैन और सदस्यों की भूमिका संदिग्ध

खंडपीठ ने आरपीएससी की भूमिका पर विशेष रूप से सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि आरपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन की भूमिका संदिग्ध है, क्योंकि उन्होंने उस सदस्य को इंटरव्यू बोर्ड में शामिल होने दिया, जो पहले पेपर लीक मामले में शामिल रहा था।

अदालत ने टिप्पणी की: “अभी सत्ता में बैठे लोग सदस्यों का चयन बिना जांच-परख के मनमर्जी से करते हैं। पेपर लीक की घटनाएं अक्सर भीतर से ही शुरू होती हैं, जिनमें आयोग के अधिकारी भी शामिल होते हैं। एसओजी को गहराई से जांच करनी चाहिए कि पेपर लीक कैसे हुआ, क्योंकि एक व्यक्ति अकेले ऐसा नहीं कर सकता। आरपीएससी के कुछ और लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।”

विधायिका से अपील: सदस्य चयन में सुधार करें

हाईकोर्ट ने विधायिका (विधानसभा) से भी सकारात्मक कदम उठाने की अपील की। कोर्ट ने कहा कि आरपीएससी जैसे लोक सेवा आयोगों के सदस्यों के चयन के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस तय की जाएं। सदस्यों का चयन राजनीतिक आधार पर नहीं, बल्कि पारदर्शी और मेरिट आधारित प्रक्रिया से होना चाहिए, ताकि ऐसे लोग आयोग में न आएं जिन पर संदेह किया जा सके।यह सुधार युवाओं के मनोबल को गिरने से बचाएगा और कार्यपालिका की विश्वसनीयता भी बढ़ाएगा।

एकलपीठ के कुछ हिस्सों पर राहत

खंडपीठ ने एकलपीठ (जस्टिस समीर जैन, 28 अगस्त 2025 का फैसला) द्वारा आरपीएससी सदस्यों के खिलाफ लिए गए स्वप्रेरित संज्ञान (suo motu cognisance) को हालांकि रद्द कर दिया, लेकिन सदस्यों के खिलाफ की गई टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी सीधी कार्रवाई उचित नहीं थी, लेकिन भर्ती रद्द करने का मूल फैसला सही है।

पृष्ठभूमि

राजस्थान पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2021 (859 पदों के लिए) में पेपर लीक और बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को पूरी भर्ती रद्द कर दी थी। इसके खिलाफ सरकार, चयनित अभ्यर्थी और आरपीएससी सदस्यों ने अपील की थी, जिसे अब खंडपीठ ने खारिज कर दिया है।कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी कहा कि पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करें और आरपीएससी में पारदर्शी नियुक्ति के लिए नया कानूनी ढांचा तैयार करें।

युवाओं पर असर

यह फैसला हजारों चयनित अभ्यर्थियों के लिए बड़ा झटका है, जिन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद नियुक्ति का इंतजार किया था। हालांकि, कोर्ट ने जोर देकर कहा कि निष्पक्षता और पारदर्शिता से ऊपर कुछ नहीं हो सकता। अब सरकार को नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी होगी।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.