राजस्थान में 1800 करोड़ रुपए का कोई वारिस नहीं: क्या आपके परिवार का पैसा भी है बैंकों में लावारिस? जानें- आप कैसे ले सकते हैं पैसा
राजस्थान में बैंकों के 64 लाख निष्क्रिय खातों में 1800 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं। वारिस खुद आगे आएं तो बैंक पैसा लौटाने को तैयार। दावा करने की सरल प्रक्रिया से परिवार का हक वापस पाएं
जयपुर।
राजस्थान के बैंकों में एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। यहां लगभग 64 लाख बैंक खाते ऐसे हैं, जिनमें कुल 1800 करोड़ रुपये की राशि जमा पड़ी है, लेकिन इनका कोई दावेदार या वारिस नहीं है। ये पैसे लावारिस पड़े हुए हैं, जो कभी किसी परिवार के सपनों का हिस्सा रहे होंगे। बैंक इन खातों के असली हकदारों तक पैसा पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि वारिस खुद आगे आएं। यह समस्या न केवल राजस्थान तक सीमित है, बल्कि पूरे देश में अनक्लेम्ड फंड्स की राशि 27,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुकी है। आइए, इस मुद्दे को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि आप अपने परिवार के लावारिस पैसे कैसे वापस पा सकते हैं।
अनक्लेम्ड फंड्स की भयावह तस्वीर: राजस्थान में 64 लाख खाते, 1800 करोड़ की राशि राजस्थान में बैंकिंग सिस्टम की एक बड़ी चुनौती है अनक्लेम्ड या लावारिस फंड्स। राज्य के सरकारी और निजी बैंकों में करीब 64 लाख खाते निष्क्रिय पड़े हैं, जिनमें कुल 1800 करोड़ रुपये जमा हैं। ये खाते मुख्य रूप से फिक्स्ड डिपॉजिट, बचत खाते, शेयर, म्यूचुअल फंड्स और बीमा पॉलिसी से जुड़े हैं। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा और बीकानेर जैसे बड़े जिलों में ही हजारों ऐसे खाते हैं, जहां मालिकों का कोई सुराग नहीं मिला।रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 40% से अधिक खाते 10 वर्ष से पुराने हैं। ग्रामीण राजस्थान में यह समस्या और गंभीर है, जहां लोग बैंकिंग से कम परिचित हैं। उदाहरण के तौर पर, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के राजस्थान ब्रांच में अकेले 2 लाख से ज्यादा अनक्लेम्ड खाते हैं, जिनमें 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि है। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और अन्य निजी बैंकों की स्थिति भी इससे बेहतर नहीं है। यदि समय रहते दावा न किया गया, तो ये पैसे आरबीआई के डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) के पास ट्रांसफर हो जाते हैं, लेकिन दावा करने का अधिकार हमेशा बना रहता है।
क्यों पड़े रह जाते हैं ये पैसे लावारिस? जानिए मुख्य कारण अनक्लेम्ड फंड्स के पीछे कई वजहें हैं, जो ज्यादातर मानवीय लापरवाही या परिस्थितियों से जुड़ी हैं। सबसे बड़ा कारण है खाताधारक की मृत्यु के बाद वारिसों का बैंक से संपर्क न होना। राजस्थान जैसे राज्य में, जहां संयुक्त परिवार प्रथा अब कम हो रही है, वारिसों को पुराने खातों का पता ही नहीं चलता। दूसरा कारण है पता बदलना लेकिन बैंक को सूचना न देना। लोग शहरों में माइग्रेट हो जाते हैं, लेकिन खाता अपडेट नहीं करते, जिससे खाते निष्क्रिय हो जाते हैं।तीसरा, दस्तावेजों की कमी। कई परिवारों में पुराने पासबुक, चेकबुक या आईडी प्रूफ गुम हो जाते हैं। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में 50% से अधिक अनक्लेम्ड खाते इसी वजह से हैं। इसके अलावा, दशकों पुराने खाते, जैसे 1980-90 के दशक के, जिनके मालिक अब दुनिया में नहीं हैं, वे भी इस सूची में शामिल हैं। एक सर्वे के अनुसार, राज्य में 30% अनक्लेम्ड फंड्स विधवाओं या अनाथ बच्चों से जुड़े हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और प्रक्रिया से अनभिज्ञ हैं।
बैंक और सरकार के प्रयास: वारिसों तक पहुंचाने की मुहिम बैंकों को इन लावारिस पैसों को हकदारों तक पहुंचाने का दायित्व है, और वे इस दिशा में सक्रिय हैं। आरबीआई के दिशा-निर्देशों के तहत, सभी बैंक हर साल अनक्लेम्ड खातों की सूची अपनी वेबसाइट पर अपलोड करते हैं। राजस्थान में एसबीआई और पीएनबी ने स्थानीय अखबारों, रेडियो और टीवी पर विज्ञापन अभियान चलाए हैं। उदाहरणस्वरूप, पीएनबी ने पिछले साल जोधपुर और उदयपुर में डोर-टू-डोर सर्वे कर 2,000 से अधिक वारिसों को 15 करोड़ रुपये लौटाए।ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मोबाइल बैंकिंग यूनिट्स और ई-मित्र केंद्रों का सहारा लिया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी जागरूकता कैंपेन चलाए जा रहे हैं, जहां लोग अपना नाम या खाता नंबर सर्च कर सकते हैं। राजस्थान सरकार ने 'अनक्लेम्ड फंड्स रिकवरी ड्राइव' शुरू की है, जिसमें जिला कलेक्टर स्तर पर शिविर लगाए जाते हैं। आरबीआई की 2023 की पहल 'उन्नत अनक्लेम्ड फंड्स पोर्टल' ने सभी बैंकों के डेटा को एक जगह जोड़ा है, जिससे दावेदार ऑनलाइन ट्रैकिंग कर सकते हैं। इन प्रयासों से पिछले दो सालों में 20% फंड्स का दावा हो चुका है।अपना पैसा कैसे वापस पाएं? स्टेप-बाय-स्टेप गाइडयदि आपको लगता है कि आपके परिवार का कोई पुराना खाता लावारिस है, तो चिंता न करें। प्रक्रिया सरल है और ज्यादातर मामलों में 90% सफलता दर है।
यहां चरणबद्ध तरीके से जानिए:सूची चेक करें: सबसे पहले, संबंधित बैंक की वेबसाइट (जैसे sbi.co.in/unclaimed) या आरबीआई की साइट (rbi.org.in/unclaimed) पर अनक्लेम्ड अकाउंट्स सर्च करें। अपना नाम, खाता नंबर या आधार डालें। राजस्थान के लिए राज्य बैंकिंग पोर्टल भी उपलब्ध है।
दस्तावेज इकट्ठा करें: मृतक का डेथ सर्टिफिकेट, लीगल हेयर सर्टिफिकेट (तहसील से), आपका आधार, पैन, पासपोर्ट साइज फोटो और खाते का पुराना विवरण। यदि एक से अधिक वारिस हैं, तो सभी का सहमति पत्र जरूरी।
बैंक में आवेदन: नजदीकी ब्रांच में क्लेम फॉर्म भरें। ई-मित्र केंद्रों पर मुफ्त मदद मिलेगी।
सत्यापन और ट्रांसफर: बैंक 15-30 दिनों में वेरिफिकेशन करता है। सफल होने पर राशि डायरेक्ट आपके खाते में आ जाती है। कोई फीस नहीं लगती।
यदि दावा IEPF (इनवेस्टर्स एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड) से जुड़ा है, तो iepf.gov.in पर अलग प्रक्रिया अपनाएं। राजस्थान में 5,000 से अधिक लोगों ने इस साल दावा किया और औसतन 50,000 रुपये प्रति परिवार प्राप्त किए।
निष्कर्ष: समय रहते दावा करें, परिवार का हक न गंवाएं राजस्थान में 1800 करोड़ रुपये का लावारिस होना न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि लाखों परिवारों के भविष्य का सवाल है। बैंक, आरबीआई और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से यह समस्या हल हो रही है, लेकिन सफलता की कुंजी है जागरूकता। अपने दादा-दादी या माता-पिता के पुराने दस्तावेज चेक करें, बैंक स्टेटमेंट्स देखें और तुरंत दावा करें। याद रखें, ये पैसे आपका हक हैं—उन्हें लावारिस न होने दें। अधिक जानकारी के लिए नजदीकी बैंक ब्रांच या हेल्पलाइन 1800-11-33-77 पर संपर्क करें। इस मुहिम से न केवल वित्तीय समावेशन बढ़ेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।