राजस्थान में भीषण गर्मी का कहर: इतनी गर्मी कि बाड़मेर में iPhone भी हो गया बंद, 48 डिग्री ने तोड़े रिकॉर्ड
राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। बाड़मेर में तापमान 48.3 डिग्री तक पहुंच गया, अस्पतालों में मरीजों के लिए फव्वारे लगाने पड़े तो वहीं iPhone तक गर्मी से बंद हो गए।
राजस्थान इन दिनों भीषण गर्मी और हीटवेव की चपेट में है। बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर जैसे रेगिस्तानी इलाकों में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। तापमान 48 डिग्री के करीब पहुंचने से सड़कें तवे की तरह तप रही हैं, अस्पतालों में मरीजों को बचाने के लिए फव्वारे लगाने पड़ रहे हैं और मोबाइल फोन तक काम करना बंद कर रहे हैं। इस सीजन में पहली बार मौसम विभाग ने राजस्थान के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। बाड़मेर में 12 मई को तापमान 48.3 डिग्री दर्ज किया गया, जो पिछले 31 साल में सबसे ज्यादा बताया जा रहा है।
बाड़मेर में गर्मी से बंद हुआ iPhone
बाड़मेर में दोपहर के समय गर्मी का असर इतना ज्यादा था कि रिपोर्टिंग के दौरान iPhone ने काम करना बंद कर दिया। वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू करने के कुछ ही मिनटों बाद फोन स्क्रीन पर “iPhone needs to cool down before you can use it” का मैसेज दिखाई दिया और मोबाइल बंद हो गया। मोबाइल एक्सपर्ट्स के अनुसार अत्यधिक तापमान में फोन का प्रोसेसर और बैटरी गर्म हो जाती है, जिसके कारण डिवाइस ऑटोमैटिक बंद हो जाता है।
अस्पतालों में मरीजों के लिए लगाए गए फव्वारे
बाड़मेर के सरकारी अस्पताल में गर्मी और हीट स्ट्रोक से मरीजों को बचाने के लिए इमरजेंसी वार्ड के बाहर फॉगिंग जैसे फव्वारे लगाए गए हैं। इनसे निकलने वाली ठंडी फुहारें मरीजों के शरीर का तापमान सामान्य रखने में मदद कर रही हैं। अस्पताल प्रशासन ने हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाए हैं और जगह-जगह ORS कॉर्नर भी लगाए गए हैं।
सड़कों पर चलना मुश्किल, बाजारों में सन्नाटा
बाड़मेर में सुबह 11 बजे के बाद ही बाजारों में सन्नाटा छाने लगता है। तेज गर्मी के कारण लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। हालात इतने खराब हैं कि जूते पहनकर भी सड़क पर पैदल चलना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती ने परेशानी और बढ़ा दी है। लोग घरों के बाहर छप्पर बनाकर उसमें पानी डालकर ठंडी हवा लेने की कोशिश कर रहे हैं।
जैसलमेर में ढाबों को कपड़ों से ढंकना पड़ा
जैसलमेर में गर्मी से बचने के लिए होटल और चाय के ढाबों को चारों तरफ कपड़ों से ढंक दिया गया है। होटल संचालकों का कहना है कि धूप सीधे दुकान में आने से अंदर खड़ा रहना मुश्किल हो जाता है। भट्टी पर काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि बाहर तापमान भले 47 डिग्री हो, लेकिन भट्टी के पास 55 डिग्री जैसी गर्मी महसूस होती है।
अस्पतालों में भी नहीं मिल रही राहत
जैसलमेर के जवाहिर अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में मरीज गर्मी से परेशान नजर आए। वार्ड में कई पंखे खराब पड़े थे और एकमात्र एसी भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल में उमस और गर्मी को लेकर नाराजगी जताई।
गायों के लिए भी लगाए जा रहे कूलर
गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं बल्कि पशुओं पर भी दिखाई दे रहा है। जैसलमेर की एक गोशाला में 1300 से ज्यादा गायों को गर्मी से राहत देने के लिए करीब सवा लाख रुपए का बड़ा कूलिंग सिस्टम लगाया जा रहा है। यह सिस्टम बीमार गायों के अस्पताल में लगाया जाएगा ताकि पशुओं को हीटवेव से बचाया जा सके।
जोधपुर में पानी के फव्वारों से राहत
जोधपुर में कई कैफे और दुकानों के बाहर छोटे-छोटे पानी के फव्वारे लगाए गए हैं। नगर निगम भी सड़कों पर पानी का छिड़काव कर रहा है ताकि लोगों को राहत मिल सके। मिठाई की दुकानों और होटलों में भट्टी के सामने काम करने वाले कारीगरों का कहना है कि इतनी गर्मी में काम करना बेहद मुश्किल हो गया है, लेकिन परिवार चलाने के लिए काम करना मजबूरी है।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
हीटवेव को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को दोपहर में घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है और गर्मी से बचाव के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।