कंधों पर मटके, पैरों में छाले… देश की आर्थिक राजधानी के पास बसा एक गांव, जहां हर सुबह शुरू होती है पानी की एक अनकही “सजा” के साथ

आर्थिक राजधानी के पास बसे इस गांव में लोग आज भी पानी के लिए 8 किमी पैदल चलते हैं, जहां हर दिन एक अनकही सजा जैसी जद्दोजहद झेलनी पड़ती है।

May 15, 2026 - 14:50
कंधों पर मटके, पैरों में छाले… देश की आर्थिक राजधानी के पास बसा एक गांव, जहां हर सुबह शुरू होती है पानी की एक अनकही “सजा” के साथ

Maharashtra News: मुंबई से महज 122 किलोमीटर दूर स्थित डैपुरमाल गांव आज भी बुनियादी जरूरत पानी के लिए संघर्ष कर रहा है। यह गांव अपर वैतरणा बांध के ठीक ऊपर पहाड़ी क्षेत्र में बसा होने के बावजूद गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है।

यहां करीब 250 की आबादी वाले आदिवासी परिवारों को रोजाना पानी के लिए 8 किलोमीटर तक खतरनाक पहाड़ी और जंगलों के रास्तों से गुजरना पड़ता है। सुबह-सुबह महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग खाली मटके लेकर नीचे की ओर पैदल यात्रा शुरू करते हैं, जो कई बार जानलेवा साबित होती है।

क्यों है इतना बड़ा संकट?

डैपुरमाल गांव भले ही एक बड़े जलाशय के ऊपर स्थित है, लेकिन स्थानीय स्तर पर पेयजल सुविधा और पाइपलाइन व्यवस्था न होने के कारण लोग प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर हैं। गर्मियों में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जब कुएं और छोटे जल स्रोत भी सूख जाते हैं।

8 किमी की रोज़ाना चुनौती

ग्रामीणों को करीब 4 किलोमीटर नीचे उतरकर पानी भरना पड़ता है और फिर उतनी ही दूरी वापस चढ़ाई करके लौटना पड़ता है। पथरीले और फिसलन भरे रास्तों के कारण कई बार दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

महिलाओं और बच्चों की सबसे बड़ी मार

गांव की महिलाओं और बच्चों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है। कम उम्र के बच्चे भी पढ़ाई छोड़कर पानी ढोने में मदद करते हैं। यह स्थिति उनके बचपन और शिक्षा दोनों को प्रभावित कर रही है।

लोगों की पीड़ा

स्थानीय निवासी बताते हैं कि उनके पास कोई और विकल्प नहीं है। पानी के लिए यह संघर्ष उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, जिसे वे मजबूरी में झेल रहे हैं।

मुंबई और गांव की हकीकत का फर्क

जहां मुंबई देश की आर्थिक राजधानी होने के नाते आधुनिक सुविधाओं से लैस है, वहीं इतना पास होने के बावजूद डैपुरमाल गांव आज भी पानी जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है।

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