पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर क्यों भड़के अशोक गहलोत? बोले- जनता को राहत देने के बजाय बोझ बढ़ाया गया

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल के दाम घटने के बावजूद जनता को राहत नहीं दी गई और टैक्स नीति से राज्यों का हिस्सा भी कम किया गया।

May 15, 2026 - 17:59
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर क्यों भड़के अशोक गहलोत? बोले- जनता को राहत देने के बजाय बोझ बढ़ाया गया

राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद आम जनता को लगातार महंगाई का बोझ उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जनता को राहत देने के बजाय टैक्स बढ़ाकर आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है।

जयपुर के सांगानेर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं और अब वही हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से हाल ही में ईंधन बचाने और सोना नहीं खरीदने जैसी अपीलों से भी लोगों को अंदाजा हो गया था कि आने वाले समय में महंगाई बढ़ सकती है।

गहलोत ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 115 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, लेकिन तब भी पेट्रोल-डीजल के दाम आज जितने नहीं बढ़े थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में नरेंद्र मोदी और बीजेपी लगातार महंगाई को लेकर सरकार को घेरते थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद जनता को राहत देने के बजाय कीमतें लगातार बढ़ाई गईं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की टैक्स नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक्साइज ड्यूटी की संरचना में बदलाव कर राज्यों को मिलने वाला हिस्सा कम कर दिया गया है। एडिशनल और स्पेशल एक्साइज ड्यूटी के जरिए राज्यों की हिस्सेदारी लगभग खत्म कर दी गई, जिससे राज्य सरकारों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ा है।

गहलोत ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई थीं, तब भी आम जनता को इसका फायदा नहीं दिया गया। सरकार चाहती तो पेट्रोल-डीजल सस्ता कर लोगों को राहत दे सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां गरीब और मध्यम वर्ग के खिलाफ हैं और ईंधन की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है।

बता दें कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद शुक्रवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दामों में 3 से 4 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी। राजस्थान की राजधानी जयपुर में पेट्रोल की कीमत 107.97 रुपए प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि डीजल भी 93 रुपए प्रति लीटर के पार चला गया है। लगातार बढ़ती कीमतों से आम लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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