Rajasthan Petrol-Diesel Crisis: तेल कंपनियों ने लगाई बिक्री पर लिमिट! पंपों पर लगे पोस्टर, आमजन और किसानों की बढ़ी चिंता
राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लिमिट लगाने को लेकर विवाद गहरा गया है, जानिए पूरी खबर
राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की बिक्री को लेकर नया विवाद सामने आया है. राज्य के कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री सीमा तय करने वाले पोस्टर लगाए गए हैं, जिसके बाद आमजन के बीच चिंता बढ़ गई है. पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि तेल कंपनियों ने ईंधन की सप्लाई सीमित कर दी है और मौखिक निर्देश देकर उपभोक्ताओं को तय मात्रा में ही पेट्रोल-डीजल देने के लिए कहा जा रहा है.
पेट्रोलियम डीलर्स के अनुसार इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों की ओर से अलग-अलग लिमिट तय की गई है. कुछ जगहों पर पेट्रोल की बिक्री 49 से 50 लीटर तक सीमित की गई है, जबकि डीजल के लिए 200 लीटर तक की सीमा तय होने की बात कही जा रही है. वहीं कुछ डीलर्स का दावा है कि राशि के आधार पर भी लिमिट तय की गई है.
मौखिक आदेशों से बढ़ी परेशानी
राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स से जुड़े प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि कंपनियों की ओर से कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है. अधिकतर निर्देश मोबाइल संदेशों और मौखिक रूप से दिए जा रहे हैं. इस कारण पेट्रोल पंप संचालकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
डीलर्स ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के राज्य स्तरीय समन्वयक मनोज गुप्ता को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. उनका कहना है कि यदि कंपनियां किसी प्रकार की लिमिट लागू कर रही हैं तो उसका स्पष्ट लिखित आदेश जारी किया जाना चाहिए, ताकि पंप संचालकों और ग्राहकों के बीच विवाद की स्थिति न बने.
किसानों और ट्रांसपोर्टरों की बढ़ी चिंता
डीजल की सीमित बिक्री का सबसे ज्यादा असर किसानों, ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों और निर्माण कार्यों में लगे लोगों पर पड़ रहा है. ग्रामीण इलाकों में कई लोग ड्रम और बैरल में डीजल लेकर खेती और मशीनों में उपयोग करते हैं, लेकिन अब इस पर भी रोक जैसी स्थिति बन रही है.
किसानों का कहना है कि यदि समय पर डीजल नहीं मिला तो खेती और सिंचाई के काम प्रभावित हो सकते हैं. वहीं ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लोगों को भी वाहनों के संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
पंप ड्राई होने का खतरा
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि डिपो से कम सप्लाई मिलने के कारण कई पंपों पर ईंधन का स्टॉक तेजी से घट रहा है. आवश्यक वस्तु अधिनियम (EC Act) के तहत पेट्रोल पंपों पर न्यूनतम स्टॉक बनाए रखना जरूरी होता है, लेकिन कम सप्लाई के चलते कई पंप “ड्राई” होने की स्थिति में पहुंच रहे हैं.
डीलर्स का कहना है कि यदि भविष्य में स्टॉक कम पाया जाता है तो प्रशासनिक कार्रवाई का खतरा भी बढ़ सकता है. इसी वजह से संचालकों में चिंता का माहौल है.
पंपों पर बढ़ सकता है विवाद
डीलर्स ने चेतावनी दी है कि अचानक बिक्री सीमा लागू होने से पेट्रोल पंपों पर विवाद और अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है. कई जगह ग्राहक लिमिट सुनकर नाराज हो रहे हैं. यदि जल्द स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.
राजस्थान पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन ने तेल कंपनियों और डीलर्स की संयुक्त बैठक बुलाने की मांग भी की है ताकि सप्लाई और बिक्री से जुड़े विवाद का समाधान निकाला जा सके.