कोटा में प्रसूताओं की मौत के पीछे क्या थी बड़ी चूक? किसी का यूरिन बंद हुआ, किसी को इंटरनल ब्लीडिंग… लेकिन समय रहते नहीं संभली स्थिति
कोटा में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 4 प्रसूताओं की मौत और कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले में गंभीर लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। शुरुआती संकेत मिलने के बावजूद समय पर स्थिति को नियंत्रित नहीं किया जा सका।
राजस्थान के कोटा में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 4 प्रसूताओं की मौत और कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की जांच के लिए गठित मेडिकल कमेटियां अब तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई हैं, लेकिन शुरुआती जांच में पोस्ट ऑपरेशन केयर और मॉनिटरिंग में गंभीर लापरवाही की आशंका सामने आई है। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब एम्स दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से जांच कराने का फैसला लिया है।
सिजेरियन के बाद बिगड़ती रही हालत
जानकारी के मुताबिक सिजेरियन ऑपरेशन के बाद कई प्रसूताओं में अलग-अलग तरह के गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे थे।
- एक महिला का यूरिन बंद हो गया
- एक को इंटरनल ब्लीडिंग शुरू हो गई
- कुछ महिलाओं को घबराहट और बेचैनी हुई
- एक प्रसूता को तेज कंपकंपी की शिकायत हुई
इन शुरुआती संकेतों के बावजूद स्थिति को समय रहते नियंत्रित नहीं किया जा सका। सूत्रों के अनुसार एक प्रसूता को अत्यधिक ब्लीडिंग होने के बाद भी कई घंटों तक गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
पोस्ट ऑपरेशन मॉनिटरिंग पर उठे सवाल
मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिजेरियन एक बड़ी सर्जरी होती है और इसके बाद मरीज की लगातार निगरानी बेहद जरूरी होती है।
ऑपरेशन के बाद:
- ब्लड प्रेशर
- पल्स
- ऑक्सीजन लेवल
- हार्ट बीट
- यूरिन आउटपुट
- इंटरनल ब्लीडिंग के संकेत
इन सभी चीजों की नियमित मॉनिटरिंग की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शुरुआती लक्षणों पर तुरंत ध्यान दिया जाता तो स्थिति को संभाला जा सकता था।
क्या दवाओं या इंफेक्शन से बिगड़ी हालत?
जांच में फिलहाल दवाओं में गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण होने पर उसका असर तुरंत नहीं दिखता, बल्कि 2 से 3 दिन बाद लक्षण सामने आते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा शक पोस्ट ऑपरेशन केयर और इलाज के दौरान प्रोटोकॉल फॉलो नहीं करने पर जताया जा रहा है हालांकि दवाओं के सैंपल की जांच अभी जारी है और रिपोर्ट आने में करीब 14 दिन लग सकते हैं।
कई डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई
मामले में राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
- सह आचार्य डॉ. नवनीत कुमार को निलंबित किया गया
- डॉ. श्रद्धा उपाध्याय को बर्खास्त किया गया
- दो नर्सिंग अधिकारियों को सस्पेंड किया गया
- अस्पताल के कई वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए
सरकार का कहना है कि जिम्मेदारी तय होने के बाद और भी कार्रवाई हो सकती है।
एम्स दिल्ली करेगी पूरे मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब एम्स दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टर जांच करेंगे। टीम ऑपरेशन प्रक्रिया, दवाओं, संक्रमण और पोस्ट ऑपरेशन केयर समेत हर पहलू की समीक्षा करेगी।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर
प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों को इमरजेंसी, आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर में सख्त प्रोटोकॉल पालन के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।