2008 के तेल संकट से ईरान जंग तक… आखिर कब-कब पेट्रोल ने बढ़ाई आम आदमी की मुश्किलें? जानिए पूरी ख़बर
भारत में पिछले दो दशकों में कई बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने आम आदमी का बजट बिगाड़ा है। कभी वैश्विक तेल संकट, कभी युद्ध और कभी रुपये की कमजोरी ने ईंधन को महंगा किया। जानिए 2008 से 2026 तक कब-कब आया सबसे बड़ा झटका।
देश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी तेल कंपनियों ने हाल ही में करीब चार साल बाद पेट्रोल-डीजल के दामों में एक साथ 3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। इसके बाद एक बार फिर ईंधन की कीमतें चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब पेट्रोल की कीमतों ने लोगों की जेब पर असर डाला हो। पिछले दो दशकों में कई बार ऐसे हालात बने, जब अंतरराष्ट्रीय संकट, युद्ध, कच्चे तेल की कमी और रुपये की कमजोरी के कारण भारत में ईंधन महंगा हुआ। आइए जानते हैं उन बड़े दौरों के बारे में, जब पेट्रोल की कीमतों ने आम आदमी का पूरा बजट बिगाड़ दिया।
2008: जब पहली बार लगा बड़ा तेल झटका
साल 2008 में वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो उस समय रिकॉर्ड स्तर था। तेल कंपनियों को भारी नुकसान होने लगा, जिसके बाद भारत सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में लगभग 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की।
उस दौर में:
- दिल्ली में पेट्रोल ₹50.52 प्रति लीटर
- मुंबई में ₹55.51 प्रति लीटर पहुंच गया था
उस समय यह बढ़ोतरी आम लोगों के लिए बड़ा झटका मानी गई थी।
2013: रुपये की कमजोरी ने बढ़ाया दबाव
2010 से 2013 के बीच पेट्रोल की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिली।
इसकी सबसे बड़ी वजह थी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का कमजोर होना। चूंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए डॉलर महंगा होने का सीधा असर पेट्रोल की कीमतों पर पड़ा। धीरे-धीरे पेट्रोल 47 रुपये से बढ़कर 70 रुपये के पार पहुंच गया।
उस समय
- दिल्ली में पेट्रोल ₹66.39
- मुंबई में ₹74.60 प्रति लीटर तक पहुंच गया था।
2022: कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध
कोविड-19 महामारी के बाद पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हो गई। इसी बीच रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हो गया, जिससे वैश्विक तेल बाजार में फिर भारी उछाल आया।
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ने लगीं।
- कई शहरों में पेट्रोल ₹100 प्रति लीटर के पार पहुंच गया
- दिल्ली में पेट्रोल करीब ₹105 प्रति लीटर तक पहुंच गया था
इस दौरान ट्रांसपोर्ट से लेकर खाद्य पदार्थों तक हर चीज महंगी हो गई थी।
2026: ईरान युद्ध और होर्मुज संकट का असर
मई 2026 में एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तनाव ने तेल बाजार को हिला दिया। ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई। इसका असर भारत पर भी पड़ा और तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी।
नई कीमतों के बाद:
- दिल्ली में पेट्रोल ₹97.77
- मुंबई में ₹106.68 प्रति लीटर पहुंच गया
पेट्रोल महंगा होने से आम आदमी पर क्या असर पड़ता है?
पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहता।
ईंधन महंगा होने पर:
- ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ जाता है
- फल-सब्जियां और रोजमर्रा का सामान महंगा हो जाता है
- बस, टैक्सी और माल ढुलाई के किराए बढ़ जाते हैं
- महंगाई सीधे घर के बजट को प्रभावित करती है
यानी पेट्रोल की कीमतों का असर हर घर तक पहुंचता है।
क्या आगे और बढ़ सकते हैं दाम?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव जारी रहा और तेल सप्लाई प्रभावित होती रही तो आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि सरकार की टैक्स नीति और वैश्विक बाजार की स्थिति भी इसमें अहम भूमिका निभाएगी।