पोकरण में दहेज की मांग बनी विवाहिता की मौत की वजह, 7 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला… पति-सास-ससुर को उम्रकैद
जैसलमेर के पोकरण एडीजे कोर्ट ने दहेज हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पति, सास और ससुर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने माना कि विवाहिता को दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया गया और जहर देकर उसकी हत्या की गई।
राजस्थान के जैसलमेर जिले की परमाणु नगरी पोकरण से दहेज हत्या के मामले में एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है। पोकरण एडीजे कोर्ट ने विवाहिता की हत्या के मामले में पति, सास और ससुर को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों दोषियों पर दो-दो लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।
यह मामला जिले के भणियाणा थाना क्षेत्र के उचपदरा गांव का है। जहां विवाहिता ‘हवा’ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मामले की जांच और सुनवाई के दौरान सामने आया कि विवाहिता को लंबे समय से दहेज की मांग को लेकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 में भणियाणा थाने में दहेज हत्या का मामला दर्ज किया गया था। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही विवाहिता पर दहेज लाने का दबाव बनाया जा रहा था। परिवार की ओर से कई बार समझाइश के बावजूद ससुराल पक्ष का व्यवहार नहीं बदला।
मामले में आरोप था कि लगातार प्रताड़ना के बाद विवाहिता को जहर देकर मौत के घाट उतार दिया गया। घटना के बाद इलाके में भी काफी आक्रोश देखने को मिला था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और विभिन्न साक्ष्य जुटाए।
मामले की सुनवाई पोकरण एडीजे कोर्ट में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक समंदर सिंह नरावत ने अदालत के समक्ष मजबूत पैरवी करते हुए कई अहम गवाह और साक्ष्य पेश किए। लंबी सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और मामले से जुड़े तथ्यों का गहन अध्ययन किया।
इसके बाद एडीजे डॉ. महेंद्र कुमार गोयल ने पति दीनाराम, ससुर चेतनराम और सास चुका देवी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में माना कि विवाहिता हवा को दहेज की मांग को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था और इसी प्रताड़ना के चलते उसकी हत्या की गई।
कोर्ट ने तीनों दोषियों पर दो-दो लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। फैसले के बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
इस फैसले को दहेज हत्या के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में अदालत का सख्त रुख समाज में मजबूत संदेश देता है कि दहेज प्रताड़ना और महिलाओं के खिलाफ हिंसा को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले पर संतोष जताते हुए इसे न्याय की जीत बताया है। परिवार का कहना है कि उन्हें लंबे समय से इंसाफ का इंतजार था और आखिरकार अदालत ने दोषियों को सजा देकर न्याय दिलाया है।