पाली से जोधपुर ले जाते वक्त एंबुलेंस में थम गई युवक की सांसें! ऑक्सीजन बंद होते ही भाई की गोद में तोड़ा दम

जोधपुर रेफर किए गए 20 वर्षीय युवक की हालत अचानक रास्ते में बिगड़ने लगी… भाई मदद मांगता रहा, लेकिन कुछ ही मिनटों में एंबुलेंस के भीतर ऐसा मंजर बन गया जिसे देख परिवार चीख पड़ा। अब मौत के पीछे की वजह को लेकर बड़े सवाल उठ रहे हैं।

May 10, 2026 - 17:33
पाली से जोधपुर ले जाते वक्त एंबुलेंस में थम गई युवक की सांसें! ऑक्सीजन बंद होते ही भाई की गोद में तोड़ा दम

पाली जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां जोधपुर रेफर किए गए एक युवक की 108 एंबुलेंस में ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने के बाद मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस में तकनीकी लापरवाही के कारण युवक ने रास्ते में ही अपने भाई की गोद में तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। घटना के बाद गुस्साए परिजन शव को वापस पाली के बांगड़ हॉस्पिटल लेकर पहुंचे और मॉर्च्युरी के बाहर धरने पर बैठ गए।

ऑक्सीजन सपोर्ट पर जोधपुर किया गया था रेफर

जानकारी के अनुसार, पाली शहर के ट्रांसपोर्ट नगर नया गांव सांसी बस्ती निवासी 20 वर्षीय सावन कुमार पुत्र सज्जन कुमार को किडनी की गंभीर समस्या थी। उसकी हालत बिगड़ने पर 7 मई को उसे पाली के बांगड़ हॉस्पिटल के ICU में भर्ती कराया गया था। परिवार के मुताबिक पिछले छह महीनों से उसकी दोनों किडनियों का इलाज चल रहा था और नियमित डायलिसिस कराया जा रहा था।

रविवार को हालत ज्यादा गंभीर होने पर डॉक्टरों ने सावन को जोधपुर के एमडीएम हॉस्पिटल रेफर कर दिया। इसके बाद परिजनों ने 108 एंबुलेंस बुलवाई और युवक को ऑक्सीजन सपोर्ट पर जोधपुर के लिए रवाना किया गया।

रास्ते में बंद हुई ऑक्सीजन सप्लाई

मृतक के बड़े भाई देवाराम ने बताया कि पाली से करीब 20 किलोमीटर दूर पहुंचते ही सावन की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। जब उन्होंने जांच की तो पता चला कि ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो चुकी है। उन्होंने तुरंत एंबुलेंस ड्राइवर को जानकारी दी।

देवाराम के अनुसार, ड्राइवर ने कहा कि दूसरा सिलेंडर मंगवा लिया गया है, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। रोहट थाना क्षेत्र के ओम बन्ना धार्मिक स्थल के पास पहुंचते-पहुंचते सावन ने अपने भाई की गोद में ही दम तोड़ दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि अगर समय पर ऑक्सीजन सप्लाई चालू हो जाती तो शायद उनके भाई की जान बच सकती थी।

शव लेकर अस्पताल पहुंचे परिजन

भाई की मौत के बाद परिजन शव को उसी एंबुलेंस में वापस पाली के बांगड़ हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। यहां परिवार और रिश्तेदार मॉर्च्युरी के बाहर धरने पर बैठ गए और एंबुलेंस चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे।

मृतक की मां लाली देवी ने रोते हुए कहा कि उनका बेटा इलाज के लिए अस्पताल आया था, लेकिन लापरवाही ने उसकी जान ले ली। उन्होंने कहा कि अगर एंबुलेंस में सबकुछ सही होता तो उनका बेटा आज जिंदा होता।

108 एंबुलेंस प्रबंधन ने क्या कहा?

मामले पर 108 एंबुलेंस सेवा के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर मंथन शर्मा ने कहा कि सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म नहीं हुई थी, बल्कि सिलेंडर की चूड़ी में तकनीकी समस्या आने के कारण सप्लाई प्रभावित हुई थी। उन्होंने बताया कि ड्राइवर की सूचना मिलते ही रोहट से दूसरा सिलेंडर भेजा गया था।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले की जांच करवाई जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सीएमएचओ ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

परिजनों के विरोध प्रदर्शन और शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आया। सीएमएचओ ने मामले की जांच करवाने और दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

गौरतलब है कि इससे पहले भी राजस्थान के अलग-अलग जिलों से ऑक्सीजन सपोर्ट और एंबुलेंस सेवाओं में लापरवाही के मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में भरतपुर में भी एक महिला की मौत उस समय हो गई थी, जब वार्ड शिफ्टिंग के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गया था।

अब पाली की इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन एंबुलेंस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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