राजस्थान की 5 साल की बच्ची ने किया ऐसा कमाल कि India और Asia Book of Records में दर्ज हुआ नाम

जिस उम्र में बच्चे ठीक से स्कूल जाना सीखते हैं, उस उम्र में बीकानेर की महान्या सिंह राजपुरोहित ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। 5 साल की इस बच्ची ने सिर्फ रिकॉर्ड ही नहीं बनाया, बल्कि अपनी प्रतिभा से देशभर में नई पहचान भी हासिल कर ली।

May 10, 2026 - 15:27
May 10, 2026 - 15:29
राजस्थान की 5 साल की बच्ची ने किया ऐसा कमाल कि India और Asia Book of Records में दर्ज हुआ नाम

राजस्थान के बीकानेर की रहने वाली 5 वर्षीय महान्या सिंह राजपुरोहित आज देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद और स्कूल की शुरुआती पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में महान्या ने अपनी असाधारण प्रतिभा से ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जिस पर बड़े-बड़े लोग भी पहुंचने का सपना देखते हैं। महान्या ने अपनी तेज स्मरण शक्ति, अद्भुत शारीरिक संतुलन और आत्मविश्वास के दम पर ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम दर्ज करवाया है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे राजस्थान को गर्व महसूस कराया है।

रिकॉर्ड बनाने के दौरान दिखाया गजब का टैलेंट

महान्या के दादा और भाजपा नेता गुमान सिंह राजपुरोहित ने बताया कि रिकॉर्ड बनाने के दौरान महान्या ने जो प्रदर्शन किया, उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया।उन्होंने लगातार 6 मिनट 18 सेकंड तक बिना रुके 50 कार्टव्हील किए। यह अपने आप में बेहद कठिन कार्य माना जाता है, खासकर इतनी कम उम्र के बच्चे के लिए। लेकिन असली हैरानी की बात सिर्फ इतनी नहीं थी। कार्टव्हील करते समय सामने टीवी स्क्रीन पर अलग-अलग देशों के झंडे लगातार बदल रहे थे और महान्या हर झंडे को पहचानते हुए उस देश का नाम, उसकी राजधानी और वहां मौजूद यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का नाम भी तुरंत बता रही थीं। इतनी कम उम्र में इतनी तेज याददाश्त और फोकस देखकर रिकॉर्ड टीम भी प्रभावित हो गई।

बचपन से ही अलग थी महान्या की प्रतिभा

परिवार के मुताबिक महान्या बचपन से ही सामान्य बच्चों से अलग थीं। उन्हें नई चीजें सीखने में काफी रुचि रहती थी और उनकी याददाश्त भी बेहद तेज थी। धीरे-धीरे परिवार ने उनकी रुचि को समझा और उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण दिलाना शुरू किया। घर में अभ्यास के लिए खास व्यवस्था की गई ताकि महान्या अपनी प्रतिभा को और निखार सकें। परिवार का कहना है कि महान्या घंटों तक लगातार अभ्यास करती हैं और नई-नई चीजें सीखने को लेकर हमेशा उत्साहित रहती हैं।

जिम्नास्टिक में भी दिखा दम

महान्या सिर्फ पढ़ाई या याददाश्त तक सीमित नहीं हैं। वे जिम्नास्टिक में भी शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। कम उम्र में ही उनका बॉडी बैलेंस, लचीलापन और स्टैमिना लोगों को प्रभावित कर रहा है। कार्टव्हील जैसे कठिन मूव्स को लगातार करना आसान नहीं होता, लेकिन महान्या ने इसे बेहद सहज तरीके से कर दिखाया। उनके परिवार का मानना है कि आने वाले समय में वे जिम्नास्टिक के क्षेत्र में भी बड़ा नाम बन सकती हैं।

आर्चरी में भी बना रहीं पहचान

महान्या एक प्रशिक्षित आर्चर भी हैं। खेलों के प्रति उनका लगाव उन्हें लगातार नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहा है। इतनी कम उम्र में कई गतिविधियों में एक साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन करना उनकी मेहनत और अनुशासन को दर्शाता है।

छोटी उम्र में बनीं लेखिका

महान्या ने खेलों और रिकॉर्ड्स के साथ-साथ लेखन की दुनिया में भी कदम रख दिया है। उनकी पहली किताब “Mahanya – The Warrior on the Mat” हाल ही में प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक में बच्चों को प्रेरित करने वाले संदेश दिए गए हैं। खास बात यह है कि यह किताब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेजन पर बेस्ट सेलर श्रेणी में ट्रेंड कर रही है। इतनी छोटी उम्र में किताब लिखना भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

परिवार का मिला पूरा साथ

महान्या अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और परिवार को देती हैं। उन्होंने कहा कि परिवार ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी। अभ्यास के लिए घर पर विशेष व्यवस्था की गई और प्रोफेशनल ट्रेनिंग भी दिलाई गई। उनके पिता पुष्पेंद्र सिंह राजपुरोहित और माता प्रतिभा सिंह लगातार उनकी तैयारी में सहयोग करते हैं। वहीं ताऊ विक्रम सिंह और ताई, पूर्व महापौर सुशीला राजपुरोहित ने भी उनकी उपलब्धि पर खुशी जताई है।

अब गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड पर नजर

इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने के बाद अब महान्या का अगला लक्ष्य गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराना है। परिवार का कहना है कि वे महान्या को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं और आने वाले समय में वह देश के लिए और भी बड़े रिकॉर्ड बना सकती हैं।

बच्चों के लिए बनीं प्रेरणा

महान्या की कहानी आज लाखों बच्चों और अभिभावकों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि अगर सही मार्गदर्शन, मेहनत और आत्मविश्वास हो तो उम्र कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनती। बीकानेर की यह नन्हीं प्रतिभा अब देशभर में नई पहचान बना चुकी है और आने वाले समय में उनसे और भी बड़े कारनामों की उम्मीद की जा रही है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground राजस्थान और देश-दुनिया की ताज़ा, सटीक और भरोसेमंद खबरें सरल और प्रभावी अंदाज़ में प्रस्तुत करना, ताकि हर पाठक तक सही जानकारी समय पर पहुँच सके।