जैसलमेर की महिला पुलिसकर्मी एक हाथ से संभाल रहीं ड्यूटी, दूसरे से बच्चों का भविष्य... जानिए पूरी कहानी

मरुस्थल की कठिन ड्यूटी, लंबी रातें और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी… लेकिन इन सबके बीच महिला पुलिसकर्मी जिस तरह मां और वर्दी दोनों का फर्ज निभा रही हैं, उसकी तस्वीरें हर किसी को भावुक कर रही हैं।

May 10, 2026 - 15:50
जैसलमेर की महिला पुलिसकर्मी एक हाथ से संभाल रहीं ड्यूटी, दूसरे से बच्चों का भविष्य... जानिए पूरी कहानी

पोकरण/जैसलमेर: खाकी वर्दी को अक्सर सख्ती, अनुशासन और कानून व्यवस्था की पहचान माना जाता है, लेकिन जैसलमेर के पोकरण और भणियाणा क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें इस वर्दी का एक बेहद भावुक और संवेदनशील चेहरा भी दिखा रही हैं। यहां तैनात महिला कांस्टेबल इन दिनों मातृत्व और पुलिस सेवा के बीच ऐसा संतुलन बना रही हैं, जो समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। मदर्स डे के मौके पर सामने आई ये कहानियां बता रही हैं कि मां चाहे घर में हो या ड्यूटी पर, उसकी जिम्मेदारियां कभी कम नहीं होतीं। मरुस्थलीय इलाके की कठिन परिस्थितियों, लंबी ड्यूटी और लगातार सतर्कता के बीच महिला पुलिसकर्मी अपने बच्चों की परवरिश भी पूरी जिम्मेदारी से कर रही हैं। कहीं थाने के कमरे में मां की गोद में बच्चा नजर आता है, तो कहीं पेट्रोलिंग के बीच बच्चों की चिंता चेहरे पर साफ दिखाई देती है। इन दृश्यों ने हर किसी को भावुक कर दिया।

थाने में ड्यूटी के साथ मां का दुलार

भणियाणा थाने में तैनात महिला कांस्टेबल मीना चौधरी अपने सात वर्षीय बेटे रियांशु की देखभाल के साथ पुलिस सेवा निभा रही हैं। स्कूल की छुट्टी के बाद कई बार उनका बेटा थाने पहुंच जाता है। उस समय थाने का माहौल केवल अनुशासन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वहां मां की ममता भी दिखाई देती है।

मीना चौधरी बताती हैं कि पुलिस सेवा में समय का कोई तय दायरा नहीं होता। कई बार अचानक ड्यूटी बढ़ जाती है और रातभर सक्रिय रहना पड़ता है। लेकिन जब बेटा मुस्कुराकर गले लगाता है, तो सारी थकान खत्म हो जाती है। उनके अनुसार मां होना और पुलिसकर्मी होना दोनों ही बड़ी जिम्मेदारियां हैं, जिन्हें संतुलित करना आसान नहीं, लेकिन असंभव भी नहीं।

पेट्रोलिंग के बीच मां की जिम्मेदारी

पोकरण की कालिका पेट्रोलिंग यूनिट में कार्यरत महिला कांस्टेबल संतोष अपनी तीन वर्षीय बेटी निव्या की परवरिश के साथ नियमित ड्यूटी निभा रही हैं। पेट्रोलिंग, सुरक्षा व्यवस्था और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उनका हर दिन एक नई चुनौती जैसा होता है।

संतोष का कहना है कि मां बनने के बाद जीवन की जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं, लेकिन वही जिम्मेदारियां इंसान को मजबूत भी बनाती हैं। ड्यूटी के दौरान भी उनका मन कई बार बेटी की ओर लगा रहता है, लेकिन वर्दी का फर्ज उन्हें हर परिस्थिति में मजबूती से खड़े रहने की प्रेरणा देता है।

इसी यूनिट में तैनात महिला कांस्टेबल दमयंती भी अपने सात वर्षीय बेटे लक्षित की देखभाल के साथ पुलिस सेवा निभा रही हैं। उनका कहना है कि जब एक तरफ कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी हो और दूसरी तरफ बच्चे का भविष्य, तब हर दिन एक परीक्षा जैसा महसूस होता है। इसके बावजूद महिला पुलिसकर्मी हर परिस्थिति में खुद को मजबूत बनाए रखती हैं।

मातृत्व और पुलिस सेवा दोनों मांगते हैं धैर्य

महिला कांस्टेबलों का मानना है कि मातृत्व और पुलिस सेवा दोनों ही ऐसे दायित्व हैं, जिनमें धैर्य, संवेदनशीलता और सतर्कता की बेहद जरूरत होती है। एक ओर आमजन की सुरक्षा का दायित्व रहता है, तो दूसरी ओर बच्चों की भावनात्मक दुनिया को भी संभालना पड़ता है।

मरुस्थलीय क्षेत्र में लगातार पेट्रोलिंग, कानून व्यवस्था और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच महिला पुलिसकर्मियों का यह संघर्ष केवल नौकरी नहीं, बल्कि समर्पण और साहस की जीवंत कहानी बन चुका है। उनकी यह भूमिका समाज में कामकाजी महिलाओं की शक्ति और संवेदनशीलता का मजबूत संदेश देती नजर आ रही है।

मां बनकर समझा त्याग और जिम्मेदारी

मदर्स डे के मौके पर प्रत्युषा जंगा का अनुभव भी लोगों को भावुक कर रहा है। उन्होंने एक दिन अपनी मां मीनाक्षी जंगा की तरह पूरा दिन बिताकर मां के संघर्ष और जिम्मेदारियों को समझने की कोशिश की।

प्रत्युषा ने बताया कि उनका दिन सुबह पांच बजे पिता के लिए चाय बनाने से शुरू हुआ। इसके बाद घर के काम, बच्चों की पढ़ाई, रसोई, सफाई और परिवार की जरूरतों का ध्यान रखते हुए उन्हें एहसास हुआ कि मां का जीवन कभी रुकता नहीं। हर पल नई जिम्मेदारी सामने खड़ी रहती है।

उन्होंने कहा कि अब उन्हें समझ आया कि मां को शक्ति, सरस्वती और लक्ष्मी का स्वरूप क्यों माना जाता है। मां एक साथ कई भूमिकाएं निभाती है और हर परिस्थिति में परिवार को संभालती है। प्रत्युषा ने अपने अनुभव को भावुक शब्दों में व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एक दिन का अनुभव नहीं, बल्कि मां के अथाह समर्पण को समझने की भावनात्मक यात्रा थी।

उन्होंने अपनी भावनाएं इन पंक्तियों में व्यक्त कीं—

“बनकर एक दिन जाना,
क्यों तुझे पूजा सबने,
हर दिन जीती तुम रूप हजार धारण कर घर में,
एक दिन में ही जान गई मैं,
अनुभव कुछ तो पा गई मैं।”

Kashish Sain Bringing truth from the ground राजस्थान और देश-दुनिया की ताज़ा, सटीक और भरोसेमंद खबरें सरल और प्रभावी अंदाज़ में प्रस्तुत करना, ताकि हर पाठक तक सही जानकारी समय पर पहुँच सके।