बाड़मेर में इंसानियत की मिसाल! 72 साल के किसान का लाखों का कर्ज ऐसे हुआ माफ, भावुक कर देगा पूरा मामला
3.50 लाख रुपए के बढ़ चुके कर्ज ने 72 वर्षीय किसान की जिंदगी मुश्किलों से भर दी थी। लेकिन लोक अदालत में जो हुआ, उसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। जब बुजुर्ग को पता चला कि गांव वालों ने मिलकर उनका कर्ज चुका दिया है, तो वे खुद को रोक नहीं पाए।
राजस्थान के बाड़मेर जिले से इंसानियत, सहयोग और संवेदनशीलता की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल छू लिया। यहां 72 साल के एक बुजुर्ग किसान का लाखों रुपए का कर्ज गांव वालों और रिश्तेदारों ने मिलकर चुकाया। लोक अदालत में हुए इस सेटलमेंट के बाद जब किसान को राहत मिली तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। इतना ही नहीं, भावुक होकर वे जज के पैर पकड़ने लगे, लेकिन जज ने उन्हें रोकते हुए खुद हाथ जोड़ लिए।
3.50 लाख तक पहुंच गया था कर्ज
जानकारी के अनुसार, बाड़मेर जिले के देरासर गांव निवासी 72 वर्षीय रहीम खान पुत्र सुरतान खान ने साल 2016 में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए 1 लाख 15 हजार रुपए का लोन लिया था। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने और लगातार बढ़ती परेशानियों के कारण वे समय पर कर्ज नहीं चुका सके। समय के साथ ब्याज बढ़ता गया और यह रकम करीब 3.50 लाख रुपए तक पहुंच गई। बुजुर्ग किसान के लिए इतनी बड़ी राशि चुकाना संभव नहीं था। परिवार पहले से ही संकट में था। उनके एक बेटे की कुछ साल पहले मौत हो चुकी थी, जबकि दूसरा बेटा लंबे समय से बीमार चल रहा है।
गांव वालों ने दिखाई इंसानियत
जब गांव के लोगों और रिश्तेदारों को रहीम खान की परेशानी का पता चला तो सभी मदद के लिए आगे आए। ग्रामीणों ने बैंक और बैंक के वकील से संपर्क किया। इसके बाद लोक अदालत में मामले को रखा गया। वकील पुरुषोत्तम सोलंकी ने बताया कि शनिवार को बाड़मेर में आयोजित लोक अदालत में सेशन जज अजिताभ शर्मा ने मामले की सुनवाई की। बैंक ने मानवीय आधार पर 3.50 लाख रुपए के कर्ज का सेटलमेंट 1.20 लाख रुपए में करने पर सहमति दे दी। इसके बाद गांव वालों और रिश्तेदारों ने आपस में पैसे इकट्ठा कर 1.20 लाख रुपए जमा करवाए और बुजुर्ग किसान का पूरा लोन बंद करवा दिया।
जज के सामने भावुक हो गए बुजुर्ग किसान
जब रहीम खान को बताया गया कि उनका लाखों का कर्ज कम होकर सिर्फ 1.20 लाख में खत्म हो गया है और गांव वालों ने मिलकर यह रकम भर दी है, तो वे भावुक हो उठे। उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। कृतज्ञता जताने के लिए वे सेशन जज अजिताभ शर्मा के पैर पकड़ने लगे। लेकिन जज ने तुरंत उनके हाथ पकड़ लिए और खुद हाथ जोड़कर सम्मान व्यक्त किया। इसके बाद उन्होंने बुजुर्ग किसान को सहारा देकर उठाया। यह भावुक दृश्य वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर गया।
सोशल मीडिया पर हो रही सराहना
इस घटना के बाद इलाके में गांव वालों की एकजुटता और इंसानियत की जमकर चर्चा हो रही है। लोग इसे सामाजिक सहयोग और मानवता की मिसाल बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग इस कहानी की सराहना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि आज भी समाज में संवेदनाएं जिंदा हैं।
लोक अदालत बनी राहत का जरिया
यह मामला इस बात का उदाहरण भी बन गया कि लोक अदालतें जरूरतमंद लोगों को राहत पहुंचाने में कितनी अहम भूमिका निभा सकती हैं। समय पर समाधान और मानवीय दृष्टिकोण से किए गए फैसले कई परिवारों को बड़ी परेशानियों से बचा सकते है