राजस्थान की तीन हस्तियों को पद्मश्री सम्मान: भपंग वादक गफरूद्दीन मेवाती जोगी, अलगोजा वादक तगाराम भील और ब्रह्म देव महाराज सम्मानित

केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस 2025 की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की। राजस्थान की तीन हस्तियों - भपंग वादक गफरूद्दीन मेवाती जोगी (डीग/अलवर), अलगोजा वादक तगाराम भील (जैसलमेर) और ब्रह्म देव महाराज को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। ये कलाकार राजस्थानी लोक संगीत और परंपरागत वाद्य यंत्रों के संरक्षण एवं वैश्विक प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। गफरूद्दीन भपंग और पांडुन का कड़ा के विशेषज्ञ हैं, जबकि तगाराम ने अलगोजा से 15+ देशों में प्रदर्शन किया है।

Jan 25, 2026 - 19:00
राजस्थान की तीन हस्तियों को पद्मश्री सम्मान: भपंग वादक गफरूद्दीन मेवाती जोगी, अलगोजा वादक तगाराम भील और ब्रह्म देव महाराज सम्मानित

नई दिल्ली/जयपुर: केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस 2025 की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है। इस सूची में राजस्थान की तीन प्रतिभाशाली हस्तियों को पद्मश्री से सम्मानित करने का फैसला लिया गया है। ये हैं प्रसिद्ध भपंग वादक गफरूद्दीन मेवाती जोगी, अलगोजा वादक तगाराम भील और ब्रह्म देव महाराज। ये सम्मान लोक कला, संगीत और सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए जा रहे हैं।

गफरूद्दीन मेवाती जोगी: भपंग और पांडुन का कड़ा के संरक्षक

डीग जिले के कैथवाड़ा गांव के निवासी गफरूद्दीन मेवाती जोगी पिछले 20 वर्षों से अलवर में रह रहे हैं। वे भपंग वादन में महारत रखते हैं और पांडुन का कड़ा के एकमात्र ज्ञात कलाकार हैं। उनके पास पांडुन का कड़ा के 2500 से अधिक दोहे याद हैं।गफरूद्दीन को संगीत की शिक्षा पिता बुद्ध सिंह जोगी से विरासत में मिली, जो सारंगी के उस्ताद थे। मेवाती जोगी समुदाय हिंदू-मुस्लिम संस्कृतियों का अनूठा संगम दर्शाता है, जहां रामायण, महाभारत और श्रीकृष्ण की कथाएं विशेष शैली में गाई जाती हैं।उनकी पिछली आठ पीढ़ियों से भपंग और सारंगी वादन की परंपरा चली आ रही है। 2016 में उन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार और 2024 में संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप तथा राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है। उन्होंने देश-विदेश में कई प्रस्तुतियां दी हैं, जहां भपंग की धुन सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो जाते हैं।

तगाराम भील: अलगोजा वादन का वैश्विक दूत

जैसलमेर के मशहूर अलगोजा वादक तगाराम भील ने अपनी अनूठी शैली से यूरोप, अमेरिका, रूस, जापान समेत 15 से अधिक देशों में छाप छोड़ी है। वे अलगोजा के साथ मटका और बांसुरी भी बजाते हैं।बचपन से पिता के अलगोजा पर प्रैक्टिस करने वाले तगाराम ने मात्र 10 वर्ष की उम्र में महारत हासिल कर ली। 11 साल की उम्र में अपना पहला अलगोजा खरीदा और 1981 में 18 वर्ष की उम्र में जैसलमेर में पहला मंचीय प्रदर्शन किया। तब से वे राजस्थान के मरु महोत्सव की शान बने हुए हैं।अलगोजा बजाना 'सांसों का खेल' है, जिसमें सस्टेन्ड ब्रीदिंग तकनीक से नाक से सांस लेकर मुंह से लगातार हवा निकालनी पड़ती है। आकाशवाणी जैसलमेर के लिए रिकॉर्डिंग और नेहरू युवा केंद्र द्वारा सम्मान उनके सफर के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। 1996 में फ्रांस दौरा उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत थी।

ब्रह्म देव महाराज: सांस्कृतिक योगदान

ब्रह्म देव महाराज को भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उनके योगदान से राजस्थान की लोक परंपरा और आध्यात्मिक-सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिली है। (विस्तृत जानकारी आधिकारिक स्रोतों से अपडेट की जा सकती है।)

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.