NSG कमांडो का तलवारी हमला,शराब ठेके संचालक के हाथ-पैर काटे, एक की मौत, दो घायल.

बाड़मेर में एक एनएसजी कमांडो और उसके साथियों ने शराब ठेके के संचालक खेताराम और दो साथियों पर तलवारों से क्रूर हमला किया। रुपये के लेन-देन के विवाद ने खूनी रूप ले लिया, जिसमें खेताराम की मौत हो गई, एक साथी गंभीर रूप से घायल है, और तीसरा बाल-बाल बचा। बाड़मेर-जालौर हाईवे पर हुई इस वारदात ने इलाके में सनसनी फैला दी। पुलिस ने नाकाबंदी कर आरोपियों की तलाश शुरू की, लेकिन वे फरार हैं।

Sep 18, 2025 - 11:11
NSG कमांडो का तलवारी हमला,शराब ठेके संचालक के हाथ-पैर काटे, एक की मौत, दो घायल.

बाड़मेर, 18 सितंबर 2025: राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक एनएसजी कमांडो और उसके साथियों ने एक शराब ठेके के संचालक व उसके साथियों पर बेरहमी से हमला कर दिया। विवाद की जड़ में रुपये-पैसे का लेन-देन था, जो एक मामूली कहासुनी से शुरू होकर खूनी संघर्ष में बदल गया। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है, जहां एक युवा ठेकेदार की जान चली गई और दो अन्य गंभीर रूप से जख्मी हो गए। सदर थाना क्षेत्र के होडू गांव के पास बाड़मेर-जालौर स्टेट हाईवे पर रात के अंधेरे में हुए इस हमले ने सुरक्षा एजेंसी के एक जवान की हिंसक प्रवृत्ति को उजागर कर दिया है।

विवाद की शुरुआत: शाम की छोटी-सी नोकझोंक

घटना की जड़ 17 सितंबर की शाम को होडू गांव के शराब ठेके पर सिमट जाती है। एनएसजी कमांडो चंपालाल (पुत्र लाखाराम, निवासी सरणू पनजी) अपने दोस्तों के साथ ठेके पर पहुंचा था। वहां ठेके के सेल्समैन के साथ रुपये के लेन-देन को लेकर मामूली विवाद हो गया। गवाहों के मुताबिक, यह कहासुनी ज्यादा देर नहीं चली और चंपालाल व उसके साथी उसी वक्त वहां से चले गए। लेकिन यह शांति केवल सतही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि चंपालाल, जो कुछ ही दिन पहले पिता के रिटायरमेंट के अवसर पर छुट्टी लेकर घर लौटा था, इस छोटी बात को दिल पर ले बैठा। उसके पिता लाखाराम हाल ही में 31 अगस्त को शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे और 7 सितंबर को उनका स्वागत समारोह गांव में ही आयोजित हुआ था।

हाईवे पर घात: स्कॉर्पियो-बाइक से सवार होकर पहुंचे हमलावर

विवाद के चंद घंटों बाद ही रात करीब 10 बजे भयानक घटना घटी। शराब ठेके के संचालक खेताराम (25 वर्ष, पुत्र राऊराम, निवासी होडू) अपने दो साथियों—हरलाल उर्फ हरखाराम (पुत्र मूलाराम) और वीरेंद्र कुमार चौधरी—के साथ ठेका बंद करके कैंपर (जीप) से घर लौट रहे थे। ठेके से महज आधा किलोमीटर दूर हाईवे पर पहुंचते ही चंपालाल अपनी स्कॉर्पियो और बाइक पर सवार होकर अचानक सामने आ गया। उसके साथ ओमप्रकाश (पुत्र लाखाराम मूंढण) समेत अन्य साथी भी थे।घायल वीरेंद्र ने पुलिस को दिए बयान में बताया, "हमें जरा भी अंदाजा नहीं था कि ये लोग इतने खूंखार हो जाएंगे। गाड़ी रोकते ही उन्होंने तलवार और अन्य धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ हमला शुरू कर दिया। सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि हम कुछ समझ ही पाए।" धक्कामुक्की के दौरान वीरेंद्र हाईवे किनारे की खाई में गिर पड़ा, जहां उसे मामूली चोटें आईं। लेकिन खेताराम और हरखाराम पर हमला और भी क्रूर था। आरोपियों ने तलवारों से उनके हाथ-पैर काट दिए, जिससे खून की होली सी छूट गई। खेताराम सीट पर ही बेहोश हो गया, जबकि हरखाराम सड़क पर लहूलुहान गिर पड़ा। हमलावरों ने दोनों को मरणासन्न हालत में हाईवे पर छोड़कर फरार हो गए। तड़पते हरखाराम ने आखिरी सांसों में चीखा, "कोई मुझे अस्पताल ले चलो!"

दर्दनाक मौत और परिवार का शोक

किसी तरह वीरेंद्र ने हिम्मत जुटाई और फोन से परिजनों व ग्रामीणों को सूचना दी। जल्द ही ग्रामीण प्राइवेट गाड़ी से घायलों को बाड़मेर जिला अस्पताल ले आए। वहां डॉक्टरों ने खेताराम को मृत घोषित कर दिया। खेताराम परिवार का इकलौता बेटा था, जिसके तीन बहनें हैं। उसकी चार साल और दो साल की दो मासूम बेटियां अनाथ हो गईं। इस दर्दनाक दृश्य को देखकर खेताराम के चाचा आईदान राम (सरपंच प्रतिनिधि, जिनकी पत्नी सरपंच हैं) बेहोश हो गए। उन्हें भी अस्पताल में भर्ती किया गया। गंभीर रूप से घायल हरखाराम को बेहतर इलाज के लिए जोधपुर रेफर कर दिया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। वीरेंद्र को मामूली चोटें आईं, लेकिन वह सदमे में है।

पुलिस की तत्परता: नाकाबंदी और छापेमारी

जानकारी मिलते ही सदर थाना पुलिस, मोबाइल ऑर्गनाइजेशन ब्रांच (एमओबी), फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) और डॉग स्क्वाड की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। एसपी नरेंद्र सिंह मीना ने अस्पताल जाकर घायल वीरेंद्र के बयान दर्ज कराए और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि रात भर नाकाबंदी करवाकर आरोपियों की तलाश की गई, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली। चंपालाल और ओमप्रकाश की पहचान हो चुकी है, जबकि अन्य हमलावरों की तलाश जारी है। पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एसपी ने कहा, "यह एक संवेदनशील मामला है। हम जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्याय सुनिश्चित करेंगे।

"एनएसजी कमांडो का काला अध्याय: छुट्टी पर हिंसा

चंपालाल, जो एनएसजी का प्रशिक्षित कमांडो है, कुछ ही दिन पहले छुट्टी लेकर घर आया था। पिता के रिटायरमेंट समारोह के बाद लौटने की तैयारी कर रहा था, लेकिन यह घटना उसके करियर पर काला धब्बा लगा देगी। स्थानीय लोग हैरान हैं कि एक एलीट फोर्स का जवान कैसे इतनी हिंसा पर उतर आया। यह घटना न केवल बाड़मेर बल्कि पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां लोग सुरक्षा बलों की ट्रेनिंग और व्यक्तिगत आचरण पर सवाल उठा रहे हैं। पीड़ित परिवार को न्याय मिले, इसके लिए ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है।यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि छोटे-मोटे विवाद भी जानलेवा रूप ले सकते हैं। पुलिस की जांच पूरी होने पर और विवरण सामने आ सकते हैं। फिलहाल, बाड़मेर में तनाव का माहौल है और इलाके में सतर्कता बरती जा रही है।