सरकारी स्कूल में अचनाक कैसे गिरा छत का प्लास्टर? 10 लाख की मरम्मत के बाद भी क्यों हुए छात्रा घायल!
बांसवाड़ा के सरकारी स्कूल में पढ़ाई के दौरान अचानक बड़ा हादसा हो गया। 10 लाख की मरम्मत के बावजूद क्लासरूम की छत ने जवाब दे दिया और 4 छात्राएं इसकी चपेट में आ गईं। अब निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को उजागर करने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। जिले के घाटोल ब्लॉक के अमरथून स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में सोमवार सुबह पढ़ाई के दौरान अचानक क्लासरूम की छत का प्लास्टर गिर गया। इस हादसे में 4 छात्राएं घायल हो गईं। गनीमत यह रही कि प्लास्टर का भारी हिस्सा किसी छात्रा के सिर पर नहीं गिरा, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
पढ़ाई के दौरान हुआ हादसा
घटना सोमवार सुबह करीब 9:15 बजे की है। स्कूल के 11वीं साइंस वर्ग में छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान अचानक छत से प्लास्टर टूटकर नीचे गिरने लगा। तेज आवाज के साथ हुए इस हादसे से क्लासरूम में अफरा-तफरी मच गई।
छत से गिरे मलबे की चपेट में आकर पूजा, काली कुमारी, शारदा कुमारी सहित एक अन्य छात्रा घायल हो गई। हादसे के बाद स्कूल स्टाफ ने तुरंत छात्राओं को अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि छात्राओं के हाथ, पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आई हैं।
हाल ही में हुई थी मरम्मत, फिर भी हादसा
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस कमरे में यह हादसा हुआ, वहां हाल ही में मरम्मत कार्य कराया गया था। जानकारी के मुताबिक करीब दो साल पहले 10.65 लाख रुपए खर्च कर स्कूल भवन की मरम्मत करवाई गई थी। इसके बावजूद छत का प्लास्टर गिरना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
पहले भी दी गई थी चेतावनी
ग्रामीणों और स्कूल प्रशासन का कहना है कि स्कूल भवन की जर्जर हालत को लेकर कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए थे। इसके अलावा सर्वे रिपोर्ट और प्रार्थना पत्र भी भेजे गए, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया।
13 में से 8 कमरे जर्जर
स्कूल के प्रधानाचार्य अरुण व्यास ने बताया कि स्कूल के कुल 13 कमरों में से 8 कमरे जर्जर हालत में हैं। इनमें से 3 कमरे बेहद खराब स्थिति में हैं। सुरक्षा कारणों से कई छात्रों को टिन शेड के नीचे बैठाकर पढ़ाया जा रहा था। उन्होंने बताया कि गर्मी अधिक होने की वजह से मजबूरी में कुछ बच्चों को जर्जर कमरों में बैठाना पड़ रहा था।
प्रशासन मौके पर पहुंचा
घटना की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची।
मौके पर पहुंचे अधिकारियों में:
- मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी पवन कुमार रावल
- सीबीईओ केशवचंद्र बामणिया
- अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी विक्रम सिंह
- डीईओ जयदीप पुरोहित
- एसडीएम मनसुख डामोर
- तहसीलदार हाबूलाल
अधिकारियों ने भवन की तकनीकी जांच कराने, मरम्मत कार्य तेज करने और नए क्लासरूम व प्रयोगशालाओं के निर्माण के प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं।
बड़ा सवाल
जब स्कूल प्रशासन लगातार जर्जर भवन की शिकायत करता रहा, हाल ही में मरम्मत भी हुई, फिर भी बच्चों की सुरक्षा के साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों हुआ? यह सवाल अब स्थानीय लोगों और अभिभावकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।