नेवाड़ी गांव में पानी का संकट: जल जीवन मिशन की अधर में लटकी योजना, ग्रामीण पैसे देकर खरीद रहे पानी
राजस्थान के भरतपुर जिले के भुसावर तहसील स्थित नेवाड़ी गांव में जल जीवन मिशन के तहत 175 लाख रुपये से बनी ओवरहेड टंकी और तीन डीप बोरवेल तैयार होने के बावजूद पानी की सप्लाई नहीं शुरू हुई। पाइपलाइन अधूरी होने और कनेक्शन न जुड़ने से ग्रामीणों को टैंकर से महंगा पानी खरीदना पड़ रहा है या महिलाओं को दूर से पानी ढोना पड़ रहा है। विभाग ने ठेकेदारों को नोटिस दिए हैं और जल्द सप्लाई शुरू करने का आश्वासन दिया है।
राजस्थान के भरतपुर जिले की भुसावर तहसील में स्थित नेवाड़ी गांव इन दिनों गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत गांव में पानी की सप्लाई के लिए बड़े स्तर पर काम हुआ, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को नल से एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ। तीन डीप बोरवेल खोदे गए, ओवरहेड टंकी का निर्माण पूरा हो गया, लेकिन पाइपलाइन अधर में लटकी हुई है और पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई। नतीजा यह है कि गांव के लोग मजबूरी में टैंकरों से पानी खरीदने को मजबूर हैं या महिलाएं दूर-दराज के इलाकों से पानी ढोकर ला रही हैं।
जल जीवन मिशन के तहत हुए काम, लेकिन सप्लाई शून्य जल जीवन मिशन (हर घर जल) योजना के अंतर्गत नेवाड़ी गांव में लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग) ने बड़े पैमाने पर निवेश किया। गांव के निवासी सचिन फौजदार ने बताया कि 8 फरवरी 2023 को 175.15 लाख रुपये की लागत से ओवरहेड टंकी का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। इस काम को 8 दिसंबर 2023 तक पूरा करना था, और टंकी तो समय पर तैयार भी हो गई। लेकिन इसके बाद की कड़ी – गांव में पानी पहुंचाने के लिए घर-घर पाइपलाइन बिछाना और टंकी से कनेक्शन जोड़ना – अभी तक अधूरा पड़ा है।योजना के तहत तीन डीप बोरवेल (गहरे ट्यूबवेल) खोदे गए थे। इन बोरवेल्स से टंकी तक पानी पहुंचाने के लिए 3 इंच व्यास की पाइपलाइन भी डाली गई, लेकिन यह पाइपलाइन टंकी से जोड़ी ही नहीं गई। नतीजतन, तीनों बोरवेल और टंकी बेकार पड़े हैं। गांव में घरों तक पानी के कनेक्शन तो दे दिए गए, लेकिन उनमें पानी नहीं आता। ठेकेदारों ने काम को बीच में ही छोड़ दिया, और विभाग ने कागजों पर तो योजना को पूरा दिखा दिया, लेकिन हकीकत में ग्रामीणों की प्यास बुझाने का कोई इंतजाम नहीं हुआ।टंकी के आसपास सुरक्षा के लिए चारदीवारी का निर्माण भी नहीं कराया गया, जिससे यह खुले में पड़ी हुई है और किसी भी तरह के नुकसान का शिकार हो सकती है।
ग्रामीणों की रोजमर्रा की मुसीबत इस अधूरे काम का खामियाजा गांव के सैकड़ों परिवार भुगत रहे हैं। महिलाओं को सुबह-सवेरे दूर इलाकों में जाकर पानी लाना पड़ता है, जो न केवल समय की बर्बादी है बल्कि स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। कई परिवार मजबूरी में प्राइवेट टैंकर मंगवाते हैं और पैसे देकर पानी खरीदते हैं। गर्मियों में यह संकट और गहरा जाता है, जब आसपास के स्रोत भी सूखने लगते हैं। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों और ठेकेदारों से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सचिन फौजदार जैसे युवा लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
विभाग का पक्ष: ठेकेदारों को नोटिस, जल्द शुरू होगी सप्लाई जलदाय विभाग के कार्यकारी अभियंता (XEN) हेमंत कुमार से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ ठेकेदारों ने काम अधूरा छोड़ा है। उनके मुताबिक, ऐसे ठेकेदारों को कई बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं और पेनल्टी भी लगाई गई है। समस्या का एक कारण यह भी है कि ग्राम पंचायत टंकी को अभी तक हैंडओवर नहीं ले रही। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही बाकी काम पूरा करवाकर गांव में पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
व्यापक संदर्भ में राजस्थान की स्थिति नेवाड़ी गांव की यह कहानी राजस्थान के कई ग्रामीण इलाकों में जल जीवन मिशन की धीमी प्रगति और कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं को उजागर करती है। राज्य में कई जिलों में योजना के तहत काम तो शुरू हो जाते हैं, लेकिन ठेकेदारों की लापरवाही, विभागीय समन्वय की कमी और हैंडओवर प्रक्रिया में देरी जैसी समस्याओं से ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पाता। केंद्र सरकार का लक्ष्य 2024 तक हर घर नल से जल पहुंचाना था, लेकिन कई गांवों में यह सपना अभी भी अधूरा है।