जोधपुर: पुलिस की छापेमारी में 1.861 किलोग्राम अवैध अफीम बरामद, एक आरोपी गिरफ्तार
जोधपुर पुलिस की डीएसटी टीम ने लूणी थाना क्षेत्र के फिंच गांव में छापेमारी कर 24 वर्षीय विक्रम गोदारा के घर से 1.861 किलोग्राम अवैध अफीम बरामद की। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है।
जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर जिले में अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम कसने के लिए पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस की डिस्ट्रिक्ट स्पेशल टीम (डीएसटी) ने लूणी थाना क्षेत्र में छापेमारी कर 1.861 किलोग्राम अवैध अफीम जब्त की है। इस कार्रवाई में एक युवक को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अफीम घर में छिपाकर रखी गई थी।
यह कार्रवाई जोधपुर पुलिस आयुक्त ओमप्रकाश के निर्देश पर अवैध नशीले पदार्थों की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान की कड़ी में की गई। पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) विनीत बंसल और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रोशन मीणा के मार्गदर्शन में गठित डीएसटी (पश्चिम) टीम ने लूणी थाना पुलिस के साथ मिलकर यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक अंजाम दिया। टीम के प्रभारी इंस्पेक्टर महेंद्र कुमार के नेतृत्व में यह छापेमारी शनिवार की रात को की गई।छापेमारी का निशाना लूणी थाना क्षेत्र के फिंच गांव में स्थित एक नया घर था। यहां रहने वाले विक्रम गोदारा (उम्र 24 वर्ष), पुत्र रामलाल बिश्नोई, निवासी हमीरनगर, फिंच (लूणी थाना क्षेत्र) के घर से पुलिस ने अवैध अफीम बरामद की। सूचना के आधार पर पहुंची टीम ने घर की तलाशी ली, जिसमें अफीम घर के अंदर छिपाकर रखी गई मिली। कुल 1.861 किलोग्राम अफीम जब्त करने के बाद आरोपी विक्रम गोदारा को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया गया।
इस सफल कार्रवाई में डीएसटी टीम के कॉन्स्टेबल राजू राम मांजू की भूमिका को विशेष रूप से सराहा गया है। उनकी सतर्कता और सूचना के आधार पर ही यह ऑपरेशन संभव हो सका। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। आरोपी से पूछताछ में अफीम की सप्लाई चेन और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।जोधपुर पुलिस का यह अभियान क्षेत्र में बढ़ती नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे ताकि नशे के कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके। इस तरह की कार्रवाइयां न केवल तस्करों में दहशत पैदा करती हैं, बल्कि समाज को नशे के खतरे से बचाने में भी सहायक सिद्ध हो रही हैं।