जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश और प्राकृतिक आपदाओं का कहर...
जम्मू-कश्मीर के रियासी और रामबन जिलों में मूसलाधार बारिश, बादल फटने और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई, जिसमें एक परिवार के सात लोगों सहित 11 की मौत हो गई। 14 अगस्त से जारी प्राकृतिक आपदाओं में अब तक 130 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। माता वैष्णो देवी तीर्थयात्रा लगातार पांचवें दिन स्थगित है। मौसम विभाग ने भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी दी है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा है।

जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से मूसलाधार बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। रियासी और रामबन जिलों में हाल ही में हुई दो अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 11 लोगों की जान चली गई, जिसमें एक ही परिवार के सात सदस्य शामिल हैं। 14 अगस्त से शुरू हुई इन प्राकृतिक आपदाओं ने अब तक 130 लोगों की जान ले ली है और 140 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मौसम विभाग ने आने वाले समय में और भारी बारिश की चेतावनी दी है, जिसके चलते प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
रियासी में भूस्खलन: एक परिवार के सात लोगों की दर्दनाक मौत
शनिवार तड़के रियासी जिले के बद्दर गांव में एक भीषण भूस्खलन ने एक परिवार को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में नज़ीर अहमद (38), उनकी पत्नी वज़ीरा बेगम (35) और उनके पांच बच्चों—बिलाल अहमद (13), मोहम्मद मुस्तफ़ा (11), मोहम्मद आदिल (8), मोहम्मद मुबारक (6) और मोहम्मद वसीम (5)—की मौत हो गई। यह परिवार उस समय सो रहा था, जब पहाड़ी ढलान से मलबा उनके घर पर गिरा, जिससे सभी जिंदा दफन हो गए। स्थानीय लोगों और पुलिस ने बचाव अभियान चलाया, लेकिन कोई जीवित नहीं बच सका। इस त्रासदी ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
रामबन में बादल फटने से तबाही: चार की मौत, एक लापता
रामबन जिले के राजगढ़ गांव में शुक्रवार देर रात बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई, जिसने दो घर, एक गौशाला और एक प्राथमिक स्कूल को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में अश्विनी शर्मा (24), उनके भाई द्वारका नाथ (55), भतीजी विरता देवी (26) और मेहमान ओम राज (38) की मौत हो गई। बचावकर्मी अभी भी बिद्या देवी (55) की तलाश कर रहे हैं, जो लापता हैं। स्थानीय निवासी अजय कुमार के अनुसार, पहाड़ी की चोटी पर बादल फटने से तेज धारा बनी, जिसने सब कुछ बहा दिया। जिला प्रशासन और स्वयंसेवकों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बचाव कार्य शुरू किया। उपायुक्त मोहम्मद अलयास खान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अरुण गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
वैष्णो देवी तीर्थयात्रा पर असर
रियासी जिले में त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर की वार्षिक तीर्थयात्रा को लगातार पांचवें दिन स्थगित करना पड़ा। इस सप्ताह की शुरुआत में कटरा से मंदिर तक की 12 किलोमीटर की यात्रा के दौरान भूस्खलन में 34 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी। बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा को रोक दिया है और तीर्थयात्रियों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
मौसम विभाग की चेतावनी और प्रशासन की तैयारियां
मौसम विभाग ने शनिवार रात 9 बजे तक जम्मू, कठुआ, राजौरी, रियासी, डोडा, सांबा और उधमपुर में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। डोडा के भद्रवाह में सुबह 8:30 बजे तक 51.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि कटरा में 42 मिमी, कठुआ में 32 मिमी और बटोटे-रामबन में 16.8 मिमी बारिश हुई। विभाग ने संवेदनशील इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा जताया है।
प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अधिकारियों को चौबीसों घंटे निगरानी रखने और जोखिम वाले क्षेत्रों से लोगों को समय पर निकालने का निर्देश दिया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं, और स्थानीय प्रशासन लोगों को नदियों, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दे रहा है।
जलवायु परिवर्तन और बढ़ती आपदाएं
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं। मॉनसून के दौरान नमी से भरी हवाएं पहाड़ों से टकराकर घने बादल बनाती हैं, जो अचानक भारी बारिश का कारण बनते हैं। इससे फ्लैश फ्लड और भूस्खलन जैसी स्थितियां पैदा होती हैं। किश्तवाड़, कठुआ और डोडा जैसे जिलों में इस साल कई बार बादल फटने की घटनाएं हुई हैं, जिनमें सैकड़ों लोग प्रभावित हुए हैं।
जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रशासन और बचाव टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में जुटी हैं, लेकिन मौसम की अनिश्चितता और लगातार बारिश ने चुनौतियां बढ़ा दी हैं। लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है ताकि आगे की क्षति को कम किया जा सके।