जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में पाकिस्तानी ड्रोन की घुसपैठ: रीगल गांव पर मंडराया, सुरक्षा बलों ने छानबीन शुरू

जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के घगवाल क्षेत्र में रीगल गांव के ऊपर शुक्रवार देर रात पाकिस्तान से आया एक ड्रोन 3-4 मिनट तक मंडराता रहा और वापस लौट गया। बीएसएफ ने पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

Nov 22, 2025 - 17:51
जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में पाकिस्तानी ड्रोन की घुसपैठ: रीगल गांव पर मंडराया, सुरक्षा बलों ने छानबीन शुरू

जम्मू, 22 नवंबर 2025: भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) के नजदीक जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में शुक्रवार देर रात एक पाकिस्तानी ड्रोन की घुसपैठ का मामला सामने आया है। यह घटना घगवाल क्षेत्र के रीगल गांव के ऊपर हुई, जहां ड्रोन ने लगभग 3-4 मिनट तक मंडराया और फिर वापस लौट गया। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि ड्रोन पाकिस्तान के चक भूरा पोस्ट की दिशा से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर आया था। सुरक्षा बलों ने तत्काल सतर्कता बरतते हुए क्षेत्र में व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ड्रोन ने कोई हथियार, नशीले पदार्थ या अन्य संदिग्ध सामग्री ड्रॉप तो नहीं की।

घटना का विवरण;  शुक्रवार रात (21 नवंबर) के करीब 10-11 बजे के आसपास स्थानीय ग्रामीणों और सीमा सुरक्षा बलों (बीएसएफ) की निगरानी टीमों ने आकाश में एक अज्ञात उड़ान वस्तु को नोटिस किया। ड्रोन, जो संभवतः स्पाई या स्मगलिंग मिशन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था, पाकिस्तान के चक भूरा बॉर्डर पोस्ट से उड़ान भरकर सीधे रीगल गांव के ऊपर पहुंचा। यह गांव सांबा जिले के घगवाल सेक्टर में स्थित है, जो आईबी से महज कुछ किलोमीटर दूर है। ड्रोन ने गांव के ऊपर चक्कर लगाए और लगभग 3-4 मिनट तक वहां मंडराता रहा, जिससे इलाके में हलचल मच गई।अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन ने कोई प्रत्यक्ष हमला या ड्रॉपिंग का प्रयास नहीं किया और निर्धारित समय के बाद वह वापस पाकिस्तानी क्षेत्र की ओर लौट गया। बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "यह एक स्पष्ट घुसपैठ का मामला है। हमारी टीमों ने तुरंत अलर्ट जारी किया और ड्रोन की दिशा-गति को ट्रैक किया। सौभाग्य से, यह लंबे समय तक नहीं टिका, लेकिन हम किसी भी संभावित खतरे की अनदेखी नहीं कर सकते।"

सुरक्षा बलों की कार्रवाई;  घटना की सूचना मिलते ही बीएसएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना की संयुक्त टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। रीगल गांव और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) और अन्य तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। प्रारंभिक जांच में कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली है, लेकिन ऑपरेशन अभी भी जारी है। अधिकारियों ने कहा कि ड्रोन घुसपैठ के पीछे स्मगलिंग या जासूसी का इरादा हो सकता है, जो हाल के महीनों में आईबी के साथ आम हो गया है।सांबा जिला, जो जम्मू क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती इलाका है, पहले भी ऐसी घटनाओं का गवाह रहा है। इस साल अक्टूबर में भी घगवाल क्षेत्र के चालियारी गांव और रामगढ़ के चमलीयाल गांव में दो पाकिस्तानी ड्रोनों की साइटिंग हुई थी, जिसके बाद समान सर्च ऑपरेशन चलाए गए थे।

क्षेत्रीय संदर्भ और बढ़ती चिंताएं;  रीगल गांव एक सीमांत ग्रामीण इलाका है, जहां ज्यादातर किसान और सीमा के पास रहने वाले परिवार निवास करते हैं। यह क्षेत्र न केवल सामरिक रूप से संवेदनशील है, बल्कि ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के लिए भी जाना जाता है। पाकिस्तानी ड्रोनों की घुसपैठें 2020 के बाद से तेजी से बढ़ी हैं, खासकर पंजाब और जम्मू सीमा पर। विशेषज्ञों के मुताबिक, ये ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण होता है। भारत ने इसके जवाब में एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं सीमा सुरक्षा की जटिलताओं को उजागर करती हैं।स्थानीय निवासियों में डर का माहौल है। एक ग्रामीण ने कहा, "रात के समय ड्रोन की आवाज सुनकर सब डर गए। हम पहले भी ऐसी घटनाओं से परेशान हैं, लेकिन सुरक्षा बलों पर भरोसा है।" जिला प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि कोई भी संदिग्ध गतिविधि देखने पर तुरंत सूचना दें।

प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति;  केंद्रीय गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। बीएसएफ ने पाकिस्तानी पक्ष को डिप्लोमेटिक चैनलों के माध्यम से विरोध दर्ज कराने की तैयारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घुसपैठें क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा सकती हैं, खासकर जब दोनों देशों के बीच संबंध पहले से ही नाजुक हैं।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.