सरहदी बाड़मेर की पहली मुस्लिम बेटी बनी राजस्थान पुलिस की वर्दीधारी: मुमताज जुनेजा की प्रेरणादायक सफलता
सरहदी बाड़मेर के छोटे से गांव जुनेजो की मुमताज जुनेजा ने राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल बनकर मुस्लिम समाज से पहली बेटी का गौरव हासिल किया। उन्होंने ट्रेनिंग पूरी कर जैसलमेर में पदभार संभाला। पिता के सपने को साकार करते हुए दूसरे प्रयास में सफल हुईं। एमए (अंग्रेजी साहित्य व राजनीति विज्ञान) और बीएड योग्यता वाली मुमताज की यह उपलब्धि अल्पसंख्यक बेटियों के लिए बड़ी प्रेरणा है।
राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर में स्थित शिव विधानसभा क्षेत्र के छोटे से गांव जुनेजो की बस्ती से एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। मुमताज जुनेजा नाम की इस युवती ने मुस्लिम समाज से राजस्थान पुलिस की वर्दी पहनने वाली पहली बेटी बनकर इतिहास रच दिया है। अल्पसंख्यक समुदाय की इस बेटी की मेहनत और लगन ने न केवल उसके परिवार को गौरवान्वित किया है, बल्कि पूरे मारवाड़ क्षेत्र में बेटियों के लिए एक मिसाल कायम की है।
मुमताज जुनेजा ने हाल ही में राजस्थान पुलिस कांस्टेबल की ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी की है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें जैसलमेर जिले में पदस्थापित किया गया है, जहां वे अब खाकी वर्दी में ड्यूटी का निर्वहन कर रही हैं। यह उपलब्धि उनके लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं है, क्योंकि बचपन से ही उन्हें पुलिस की वर्दी पहनने का शौक था।
मुमताज का सफर आसान नहीं रहा। उनके पिता, मरहूम लतीफ खान जुनेजा, हमेशा चाहते थे कि उनकी बेटी कुछ बड़ा हासिल करे और समाज में अपनी अलग पहचान बनाए। पिता के इस सपने को साकार करने के लिए मुमताज ने दिन-रात कड़ी मेहनत की। राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की। पहली बार में सफलता न मिलने के बावजूद हार नहीं मानी और दोबारा तैयारी कर इस मुकाम तक पहुंचीं।
शिक्षा के क्षेत्र में भी मुमताज ने अपनी मजबूत पकड़ दिखाई है। उन्होंने बाड़मेर से ही अपनी पढ़ाई पूरी की। अंग्रेजी साहित्य और राजनीति विज्ञान में मास्टर ऑफ आर्ट्स (एम.ए.) की डिग्री हासिल करने के साथ-साथ बी.एड. भी किया है। उच्च शिक्षा प्राप्त होने के बावजूद उनका सपना हमेशा पुलिस सेवा में रहा, जो आज हकीकत बन चुका है।
यह सफलता सरहदी बाड़मेर के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के अल्पसंख्यक समुदाय की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। जहां सामाजिक और पारिवारिक चुनौतियां अक्सर बेटियों के सपनों को सीमित कर देती हैं, वहीं मुमताज ने साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि उन हजारों लड़कियों को हौसला देगी जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही हैं।