फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से हासिल की सरकारी नौकरी: वरिष्ठ शिक्षक गिरफ्तार, मेडिकल जांच में खुली पोल

झालावाड़ में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में पुलिस ने एक वरिष्ठ शिक्षक को गिरफ्तार किया है।

Jun 4, 2026 - 17:56
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से हासिल की सरकारी नौकरी: वरिष्ठ शिक्षक गिरफ्तार, मेडिकल जांच में खुली पोल

फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

राजस्थान के झालावाड़ जिले में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। विशेष जांच के बाद एक वरिष्ठ शिक्षक को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मामले में शामिल एक अन्य शिक्षक फिलहाल फरार बताया जा रहा है।

पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने दिव्यांग आरक्षण का लाभ लेने के लिए गलत दस्तावेजों का उपयोग किया और उसी आधार पर सरकारी सेवा में नियुक्ति प्राप्त की।

गोपनीय शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच

जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने संबंधी गोपनीय शिकायतें लगातार मिल रही थीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर जांच शुरू की।

जांच के दौरान संदिग्ध कर्मचारियों की पहचान की गई और उनके दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। इसके बाद मामला और गंभीर होता चला गया।

मेडिकल बोर्ड की जांच में खुला बड़ा राज

पुलिस ने आरोपित कर्मचारियों का बायोमैट्रिक सत्यापन कराने के साथ-साथ संभाग स्तरीय एमबीएस अस्पताल मेडिकल कॉलेज कोटा में विशेष मेडिकल बोर्ड से पुनः चिकित्सकीय परीक्षण करवाया।

जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। दिव्यांग आरक्षण का लाभ लेने के लिए जहां न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता होना अनिवार्य है, वहीं आरोपी बनेसिंह की दिव्यांगता केवल 6 प्रतिशत पाई गई।

इतना ही नहीं, दूसरे आरोपी योगेश कुमार की दिव्यांगता जांच में शून्य प्रतिशत निकली। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद दोनों को दिव्यांग आरक्षण का लाभ लेने के लिए पूरी तरह अपात्र माना गया।

दस्तावेजों की जांच में मिले अहम साक्ष्य

मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद कोतवाली थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर विस्तृत अनुसंधान शुरू किया। जांच टीम ने चिकित्सा विभाग द्वारा जारी मूल दिव्यांग प्रमाण पत्र, राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में जमा किए गए आवेदन पत्रों, परीक्षा परिणामों, नियुक्ति आदेशों और अन्य सरकारी रिकॉर्ड की गहन जांच की।

पुलिस के अनुसार जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि गलत जानकारी और संदिग्ध प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की गई।

वरिष्ठ शिक्षक गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा रिमांड पर

मामले में पुलिस ने 3 जून को आरोपी बनेसिंह (35) निवासी राकड़ा, तहसील अकलेरा को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी वर्तमान में बकानी ब्लॉक स्थित राजकीय मॉडल स्कूल में वरिष्ठ अध्यापक (गणित) के पद पर कार्यरत है।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस रिमांड के दौरान उससे दस्तावेजों, प्रमाण पत्रों और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है।

दूसरा आरोपी शिक्षक फरार

पुलिस के अनुसार मामले का दूसरा आरोपी योगेश कुमार फिलहाल फरार है। वह भरतपुर जिले का निवासी है और भवानीमंडी क्षेत्र के एक राजकीय विद्यालय में तृतीय श्रेणी शिक्षक के पद पर कार्यरत बताया जा रहा है।

उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमों को रवाना किया गया है और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

और नाम आने की संभावना

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल दो लोगों तक सीमित नहीं हो सकता। जांच के दौरान कई अन्य संदिग्ध मामलों की भी जानकारी मिली है।

ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के जरिए सरकारी नौकरी प्राप्त करने वाले अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो प्रदेशभर में बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।

दिव्यांग आरक्षण के दुरुपयोग पर सख्ती

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि दिव्यांग आरक्षण वास्तव में जरूरतमंद और पात्र लोगों के लिए बनाया गया है। यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के जरिए इसका लाभ उठाता है तो वह न केवल कानून का उल्लंघन करता है, बल्कि वास्तविक दिव्यांग अभ्यर्थियों के अधिकारों का भी हनन करता है।

झालावाड़ में हुई यह कार्रवाई दिव्यांग आरक्षण के दुरुपयोग के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। आने वाले दिनों में जांच के दायरे का विस्तार होने के साथ और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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