लड़कियों को शादी के लिए नहीं मिल रहे लड़के... जानिए वायरल दावे की पूरी सच्चाई
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि लड़कियों को शादी के लिए लड़के नहीं मिल रहे हैं। लेकिन क्या वाकई वहां पुरुषों की इतनी कमी है? जानिए इस वायरल दावे के पीछे की असली कहानी।
सोशल मीडिया के दौर में कई बार ऐसे दावे तेजी से वायरल हो जाते हैं जो सुनने में बेहद चौंकाने वाले लगते हैं। हाल ही में एक ऐसा ही दावा चर्चा में है कि यूरोप के देश लिथुआनिया में महिलाओं की संख्या इतनी ज्यादा है कि उन्हें शादी के लिए लड़के नहीं मिल रहे। कई पोस्ट और वीडियो में इसे "दुल्हनों का देश" तक बताया जा रहा है।
लेकिन जब इस दावे की गहराई से जांच की जाती है, तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है।
आखिर क्यों चर्चा में है लिथुआनिया?
लिथुआनिया यूरोप के बाल्टिक क्षेत्र में स्थित एक छोटा लेकिन विकसित देश है। यहां महिलाओं की आबादी पुरुषों की तुलना में अधिक है। उपलब्ध जनसांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार देश की कुल आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 53 प्रतिशत है, जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी करीब 47 प्रतिशत है।
यानी हर 100 लोगों में लगभग 53 महिलाएं और 47 पुरुष हैं। हालांकि यह अंतर इतना बड़ा नहीं है कि इसे शादी का संकट कहा जा सके।
महिलाओं की संख्या ज्यादा होने की वजह क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे सबसे बड़ा कारण महिलाओं की अधिक जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) है।
लिथुआनिया में महिलाएं औसतन पुरुषों की तुलना में लगभग 9 साल अधिक जीवित रहती हैं। इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं—
- पुरुषों में धूम्रपान की अधिक आदत
- शराब का ज्यादा सेवन
- स्वास्थ्य संबंधी जोखिम
- जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं
इसी वजह से 65 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में महिलाओं की संख्या पुरुषों से काफी अधिक दिखाई देती है।
यूक्रेन युद्ध का भी पड़ा असर
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बड़ी संख्या में यूक्रेनी शरणार्थी लिथुआनिया पहुंचे। इनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक थी क्योंकि अधिकांश पुरुष युद्ध के कारण यूक्रेन में ही रुके रहे।
इस कारण भी देश की कुल आबादी में महिलाओं का प्रतिशत कुछ बढ़ा है।
क्या सचमुच महिलाओं को शादी के लिए लड़के नहीं मिल रहे?
इस सवाल का सीधा जवाब है— नहीं।
हालांकि कुछ क्षेत्रों में उपयुक्त जीवनसाथी ढूंढना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन यह कहना कि पूरे देश में लड़कों की भारी कमी है और महिलाएं शादी नहीं कर पा रहीं, सही नहीं होगा।
दरअसल रिश्ते और विवाह केवल आबादी के आंकड़ों पर निर्भर नहीं करते, बल्कि—
- व्यक्तिगत पसंद
- शिक्षा और करियर
- सामाजिक परिस्थितियां
- आर्थिक स्थिति
- जीवनशैली
जैसे कई अन्य कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विदेशों में भी जीवनसाथी तलाश रही हैं महिलाएं
आज इंटरनेट और ग्लोबलाइजेशन के दौर में लोग सिर्फ अपने शहर या देश तक सीमित नहीं हैं। लिथुआनिया की कई महिलाएं भी पढ़ाई, नौकरी या व्यक्तिगत पसंद के कारण दूसरे देशों के लोगों से विवाह कर रही हैं।
हालांकि ऐसा केवल पुरुषों की कमी के कारण नहीं, बल्कि वैश्विक अवसरों और बदलती जीवनशैली के कारण भी हो रहा है।
सिर्फ लिथुआनिया की नहीं है कहानी
बाल्टिक क्षेत्र के कई देशों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। इनमें—
- लिथुआनिया
- लातविया
- एस्टोनिया
- बेलारूस
जैसे देश शामिल हैं। लेकिन कहीं भी ऐसी स्थिति नहीं है कि महिलाओं के लिए विवाह करना असंभव हो गया हो।
वायरल दावे की सच्चाई
लिथुआनिया में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक जरूर है, लेकिन सोशल मीडिया पर किया जा रहा यह दावा कि वहां लड़कियों को शादी के लिए लड़के नहीं मिल रहे, काफी हद तक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक जनसांख्यिकीय स्थिति है, न कि कोई विवाह संकट। महिलाओं की अधिक आबादी के पीछे लंबी जीवन प्रत्याशा, युद्ध के कारण आए शरणार्थी और सामाजिक बदलाव जैसे कई कारण जिम्मेदार हैं।