रणवीर सिंह के लीगल नोटिस के बाद FWICE ने वापस लिया नॉन-कोऑपरेशन, कहा- हमारे पास बैन का अधिकार नहीं

डॉन 3 विवाद में FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ लगाया गया नॉन-कोऑपरेशन वापस ले लिया है। लीगल नोटिस और इंडस्ट्री संगठनों की अपील के बाद मामला शांत होता दिख रहा है, हालांकि 40 करोड़ रुपये का विवाद अभी भी चर्चा में है।

Jun 3, 2026 - 14:05
रणवीर सिंह के लीगल नोटिस के बाद FWICE ने वापस लिया नॉन-कोऑपरेशन, कहा- हमारे पास बैन का अधिकार नहीं

नई दिल्ली में फरहान अख्तर की फिल्म डॉन 3 को लेकर शुरू हुआ विवाद अब धीरे-धीरे शांत होता नजर आ रहा है, लेकिन इस पूरे मामले ने फिल्म इंडस्ट्री में कई सवाल खड़े कर दिए थे। विवाद तब शुरू हुआ जब रणवीर सिंह के फिल्म से अलग होने के बाद FWICE (Federation of Western India Cine Employees) ने उनके खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन (असहयोग) का ऐलान कर दिया था। इस फैसले ने इंडस्ट्री में हलचल मचा दी थी और कई संगठनों ने इस पर आपत्ति भी जताई थी।

FWICE के इस कदम के बाद मामला और गंभीर तब हो गया जब रणवीर सिंह ने 2 जून को संगठन को एक कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेज दिया। इस नोटिस में उनके खिलाफ लिए गए नॉन-कोऑपरेशन फैसले को चुनौती दी गई थी। इसके बाद इंडस्ट्री के कई बड़े संगठन जैसे CINTA, IMPPA और प्रोड्यूसर्स गिल्ड ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया और FWICE से अपील की कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए।

इसी दबाव और आपसी बातचीत के बीच 3 जून को FWICE ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। इनमें अशोक पंडित, अशोक दुबे और उपासना सिंह प्रमुख रूप से मौजूद थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान FWICE की ओर से बड़ा ऐलान करते हुए कहा गया कि रणवीर सिंह के खिलाफ लगाया गया नॉन-कोऑपरेशन अब वापस ले लिया गया है।

FWICE के अध्यक्ष अशोक पंडित ने स्पष्ट किया कि संगठन के पास किसी भी कलाकार पर आधिकारिक प्रतिबंध लगाने की शक्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि FWICE केवल नॉन-कोऑपरेशन की अपील कर सकता है और यह कोई कानूनी बैन नहीं होता। उन्होंने यह भी बताया कि इंडस्ट्री के अन्य संगठनों की ओर से मिले अनुरोधों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में FWICE के जनरल सेक्रेटरी अशोक दुबे ने भी बयान दिया कि फिल्म इंडस्ट्री एक परिवार की तरह है और ऐसे विवादों का हल बातचीत के जरिए ही निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी कलाकार को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि इंडस्ट्री में संतुलन बनाए रखना है।

वहीं, CINTA की जनरल सेक्रेटरी उपासना सिंह ने रणवीर सिंह का समर्थन करते हुए कहा कि वह एक बड़े और सफल कलाकार हैं। उन्होंने रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर का भी उल्लेख किया और उसकी सफलता की तारीफ की। उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले के वापस लिए जाने से इंडस्ट्री में सकारात्मक माहौल बनेगा।

हालांकि FWICE का फैसला वापस ले लिया गया है, लेकिन इस पूरे विवाद की जड़ अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। फरहान अख्तर और रणवीर सिंह के बीच कथित तौर पर 40 करोड़ रुपये की मांग को लेकर जो मुद्दा बताया जा रहा है, उस पर अभी भी कोई अंतिम समाधान नहीं निकला है। माना जा रहा है कि यह विवाद आने वाले समय में फिर से चर्चा में आ सकता है अगर दोनों पक्षों के बीच बातचीत सफल नहीं होती।

फिलहाल, FWICE द्वारा नॉन-कोऑपरेशन वापस लेने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में राहत जरूर मिली है, लेकिन इस पूरे प्रकरण ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या ऐसे विवादों को सार्वजनिक मंचों पर लाने के बजाय अंदरूनी बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए।

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