'Fuc*** Crazy' कहकर ट्रंप ने नेतन्याहू को लगाई फटकार? दोस्ती में आई दरार या नई रणनीति!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच कथित तीखी बातचीत ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है।
अमेरिका और इजरायल के मजबूत रिश्तों के बीच एक नया विवाद चर्चा का विषय बन गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर तीखी बातचीत की। बताया जा रहा है कि ट्रंप ने लेबनान में संभावित सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि बातचीत के दौरान ट्रंप ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। हालांकि इस कथित बातचीत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस खबर ने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
क्या है विवाद की असली वजह?
विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद व्यक्तिगत नहीं बल्कि रणनीतिक है। ट्रंप की प्राथमिकता फिलहाल ईरान के साथ एक ऐसा समझौता करना है जिसे वे अपनी विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर सकें।
ट्रंप लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि उनकी सरकार ईरान के साथ नई और बेहतर डील की दिशा में काम कर रही है। लेकिन क्षेत्र में लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियां इस प्रक्रिया को प्रभावित कर रही हैं।
विशेष रूप से लेबनान और हिज्बुल्लाह से जुड़े घटनाक्रम तथा इजरायल की आक्रामक सैन्य नीति वार्ता को मुश्किल बना रही है।
ट्रंप की नजर 2026 के मिडटर्म चुनावों पर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के सामने केवल विदेश नीति की चुनौती नहीं है, बल्कि घरेलू राजनीतिक दबाव भी है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था, बढ़ती तेल कीमतें और आगामी मिडटर्म चुनाव ट्रंप के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसे में यदि ईरान के साथ कोई समझौता हो जाता है तो ट्रंप इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश कर सकते हैं।
यही वजह है कि वे क्षेत्र में बड़े सैन्य संघर्ष से बचना चाहते हैं।
नेतन्याहू की अलग रणनीति
दूसरी ओर इजरायल की सुरक्षा प्राथमिकताएं अलग हैं। नेतन्याहू सरकार का मानना है कि ईरान और उसके समर्थित संगठन जैसे हिज्बुल्लाह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं।
इजरायल को आशंका है कि यदि अमेरिका ईरान के साथ किसी अस्थायी या नरम समझौते पर पहुंच जाता है तो तेहरान को अपनी सैन्य और राजनीतिक ताकत बढ़ाने का मौका मिल सकता है।
यही कारण है कि इजरायल क्षेत्र में आक्रामक रुख बनाए रखना चाहता है।
'डीलमेकर' बनाम 'हार्डलाइनर' की छवि
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ट्रंप खुद को एक सफल "डीलमेकर" के रूप में स्थापित करना चाहते हैं, जबकि नेतन्याहू को "हार्डलाइनर" नेता के रूप में दिखाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।
इससे ट्रंप ईरान और खाड़ी देशों को यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका बातचीत और समझौते का पक्षधर है, जबकि क्षेत्रीय तनाव का कारण केवल वॉशिंगटन नहीं है।
लेबनान पर हमले को लेकर चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप को सबसे ज्यादा चिंता लेबनान में संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर है। उनका मानना है कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो ईरान के साथ चल रही बातचीत पूरी तरह पटरी से उतर सकती है।
अमेरिकी प्रशासन क्षेत्र में बड़े युद्ध से बचने की कोशिश कर रहा है क्योंकि इसका असर वैश्विक तेल बाजार, आर्थिक स्थिरता और अमेरिकी राजनीति पर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, जबकि क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि ट्रंप अपनी कूटनीतिक रणनीति में कितना सफल होते हैं और क्या वे इजरायल की सुरक्षा चिंताओं तथा ईरान के साथ बातचीत के बीच संतुलन बना पाते हैं।
दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि ट्रंप की बहुचर्चित "आर्ट ऑफ डील" एक बार फिर सफल होती है या मध्य पूर्व का संकट और गहरा जाता है।