डूंगरपुर में दिशा बैठक में हंगामा: BAP और BJP सांसदों के बीच तीखी भिड़ंत, विधायक ने दी बाहर लड़ाई की धमकी
डूंगरपुर में दिशा समिति बैठक के दौरान बीएपी सांसद राजकुमार रोत और भाजपा सांसद मन्नालाल रावत के बीच एजेंडा विवाद पर तीखी बहस हुई। आसपुर बीएपी विधायक उमेश डामोर ने रावत को बाहर आकर लड़ाई की धमकी दी। हंगामा 15 मिनट चला, सुरक्षाकर्मियों ने बीच-बचाव किया।
राजस्थान के डूंगरपुर जिले में 29 दिसंबर 2025 को जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के दौरान भारी हंगामा हो गया। बैठक में बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत और उदयपुर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद मन्नालाल रावत के बीच तीखी बहस हुई, जो धमकी और तू-तू-मैं-मैं तक पहुंच गई। आसपुर से BAP विधायक उमेश डामोर ने भाजपा सांसद मन्नालाल रावत को "लड़ाई करनी हो तो बाहर आ जाओ, मैदान में खुलकर लड़ो" कहकर धमकाया। माहौल इतना गरमा गया कि सुरक्षाकर्मियों को बीच-बचाव करना पड़ा और बैठक करीब 15 मिनट तक बाधित रही।
घटना की पूरी जानकारी बैठक जिला परिषद के ईडीपी सभागार में सोमवार सुबह आयोजित की गई थी। दिशा समिति की अध्यक्षता बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत कर रहे थे।बैठक की शुरुआत में ही राजकुमार रोत ने एजेंडे से हटकर राज्य सरकार से जुड़े मुद्दे उठाने शुरू कर दिए।इस पर उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने एतराज जताया और कहा कि दिशा बैठक केवल केंद्र सरकार की योजनाओं की समीक्षा के लिए होती है, राज्य के मुद्दे यहां नहीं उठाए जा सकते।रोत ने जवाब दिया कि वे अध्यक्ष हैं और क्षेत्र की जनता से जुड़ी हर समस्या पर चर्चा का अधिकार रखते हैं। उन्होंने रावत पर आरोप लगाया कि वे केवल माहौल खराब करने और डूंगरपुर का विकास नहीं चाहने के लिए आए हैं।बहस बढ़ने पर मन्नालाल रावत ने खुद को "धमकाया जाने वाला निर्वाचित जनप्रतिनिधि" बताया।इसी दौरान आसपुर विधायक उमेश डामोर बहस में कूद पड़े और रावत से उलझ गए। डामोर ने रावत को धमकाते हुए कहा - "लड़ाई करनी है तो बाहर आ जाओ, मैदान में आओ खुलके।"करीब 15 मिनट तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद सुरक्षाकर्मी और अन्य सदस्यों ने बीच-बचाव किया। अधिकारियों और सदस्यों की मशक्कत के बाद दोनों पक्ष शांत हुए और बैठक फिर शुरू हो सकी।
दिशा समिति क्या है और क्यों विवाद का कारण बनी? दिशा (District Development Coordination and Monitoring Committee) समिति केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसकी अध्यक्षता संबंधित लोकसभा सांसद करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य जिले में केंद्र प्रायोजित योजनाओं (जैसे मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना आदि) की प्रगति की समीक्षा करना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।डूंगरपुर जिले में चार विधानसभा क्षेत्र हैं:डूंगरपुर, चौरासी और सागवाड़ा - ये बांसवाड़ा-डूंगरपुर संसदीय क्षेत्र (राजकुमार रोत) में आते हैं।आसपुर - उदयपुर संसदीय क्षेत्र (मन्नालाल रावत) में आता है।इसलिए राजकुमार रोत अध्यक्ष हैं, जबकि मन्नालाल रावत सह-अध्यक्ष की भूमिका में हैं। विवाद की जड़ यही है कि रोत राज्य सरकार के मुद्दे उठाना चाहते थे, जबकि रावत केंद्र की योजनाओं तक सीमित रखना चाहते थे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और दोनों पक्षों के आरोप यह घटना दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी बहुल क्षेत्र में BAP और BJP के बीच चल रही लंबी राजनीतिक दुश्मनी का हिस्सा है। BAP आदिवासी अधिकारों और अलग पहचान की बात करती है, जबकि BJP इसे विकास और एकीकरण से जोड़ती है। पहले भी दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच बेणेश्वर धाम, REET परीक्षा, हिंदू-आदिवासी मुद्दे आदि पर विवाद हो चुके हैं।BAP पक्ष का कहना है कि मन्नालाल रावत जानबूझकर बैठक को बाधित कर रहे थे ताकि केंद्र योजनाओं की समीक्षा न हो और BJP की नाकामियां छिपी रहें।BJP पक्ष इसे BAP की राज्य सरकार को नीचा दिखाने की साजिश बता रहा है।सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद दोनों पक्षों के समर्थक एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों का इस तरह भिड़ना लोकतंत्र और क्षेत्र की छवि के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा। प्रशासन से उम्मीद है कि ऐसी स्थितियां भविष्य में न बनें।