राजस्थान में बाल विवाह रोकने को बड़ा फैसला: अब प्रिंसिपल, VDO और पटवारी को मिली पुलिस जैसी शक्तियां
राजस्थान सरकार ने बाल विवाह रोकने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए स्कूल प्रिंसिपल, ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और पटवारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त किया है। अब ये अधिकारी मौके पर जांच कर प्रशासन और पुलिस को रिपोर्ट भेज सकेंगे।
राजस्थान सरकार ने प्रदेश में बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर रोक लगाने के लिए बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब स्कूल प्रिंसिपल, प्रधानाध्यापक, ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और पटवारियों को भी पुलिस जैसी जांच संबंधी शक्तियां दी गई हैं। राज्य सरकार ने इन अधिकारियों को “बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी” (Child Marriage Prohibition Officers - CMPO) नियुक्त किया है।
सरकार का मानना है कि गांवों और स्थानीय स्तर पर कार्यरत ये अधिकारी सामाजिक गतिविधियों से सीधे जुड़े रहते हैं, इसलिए बाल विवाह की घटनाओं की समय रहते पहचान कर उन्हें रोका जा सकेगा।
क्या हैं नई व्यवस्था के मुख्य प्रावधान?
बाल अधिकारिता विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार:
- सभी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रिंसिपल
- राजकीय माध्यमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक
- पंचायती राज विभाग के ग्राम विकास अधिकारी (VDO)
- राजस्व विभाग के पटवारी
अब अपने-अपने क्षेत्र में बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के रूप में काम करेंगे।
पुलिस जैसी जांच की शक्तियां
राज्य सरकार ने इन अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत संज्ञेय अपराधों की जांच करने संबंधी शक्तियां भी प्रदान की हैं।
इसका मतलब यह है कि:
- बाल विवाह की सूचना मिलने पर ये अधिकारी मौके पर पहुंच सकेंगे
- प्राथमिक जांच कर सकेंगे
- प्रशासन और पुलिस को तत्काल रिपोर्ट भेज सकेंगे
- संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे
सरकार का उद्देश्य बाल विवाह की घटनाओं को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है।
स्कूल प्रशासन की अहम भूमिका
नई व्यवस्था में स्कूल प्रिंसिपल और प्रधानाध्यापकों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का कहना है कि स्कूल छोड़ने वाली बालिकाओं या अचानक पढ़ाई बंद करने वाले मामलों पर अब ज्यादा निगरानी रखी जाएगी।
यदि किसी छात्रा की पढ़ाई अचानक रुकती है या बाल विवाह की आशंका होती है, तो स्कूल प्रशासन तुरंत इसकी सूचना संबंधित विभागों को देगा।
गांव स्तर पर निगरानी बढ़ेगी
ग्राम विकास अधिकारी और पटवारी गांवों में नियमित रूप से काम करते हैं। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि वे बाल विवाह की तैयारियों या संदिग्ध आयोजनों की जानकारी समय रहते प्रशासन तक पहुंचा पाएंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह की घटनाएं अक्सर सामाजिक दबाव और पारंपरिक मान्यताओं के कारण सामने आती हैं। ऐसे में स्थानीय अधिकारियों की सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अधिसूचना में क्या कहा गया?
24 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य सरकार ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 16 के तहत इन अधिकारियों की नियुक्ति की है।
इसके तहत:
- ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित ग्राम पंचायत
- शहरी क्षेत्रों में संबंधित नगरपालिका वार्ड
इन अधिकारियों का कार्यक्षेत्र होगा।
सरकार का उद्देश्य
राजस्थान सरकार का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य—
- बाल विवाह पर प्रभावी रोक लगाना
- बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा करना
- बालिकाओं की शिक्षा जारी रखना
- ग्रामीण स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत करना
है।
सरकार को उम्मीद है कि स्थानीय प्रशासन, स्कूल और राजस्व विभाग के संयुक्त प्रयास से बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।