राजस्थान: भिवाड़ी अवैध पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में मौतों का सिलसिला जारी, मृतकों की संख्या 9 पहुंची – 90% झुलसे एक और मजदूर ने तोड़ा दम
राजस्थान के भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा) के खुशखेड़ा-कारौली औद्योगिक क्षेत्र में 16 फरवरी 2026 को अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट और आग लगने से 7 मजदूर मौके पर जिंदा जल गए। कुल 11 प्रभावित हुए, जिनमें से दिल्ली सफदरजंग अस्पताल में भर्ती घायलों में से जुन्नू (90% झुलसे) की 26 फरवरी को मौत हो गई, जिससे मृतकों की संख्या 9 पहुंच गई। फैक्ट्री गारमेंट यूनिट के नाम पर चल रही थी, मुख्य आरोपी हेमंत सचदेवा सहित तीन गिरफ्तार। अधिकांश मजदूर बिहार से थे, शवों की डीएनए से पहचान हुई। जांच जारी, फैक्ट्री सील।
राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के भिवाड़ी में खुशखेड़ा-कारौली औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में 16 फरवरी 2026 को हुए भीषण विस्फोट और आग में मरने वालों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है। इस हादसे ने एक बार फिर अवैध उद्योगों की खतरनाक स्थिति और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे का विवरण
16 फरवरी को सुबह करीब 9:30 बजे खुशखेड़ा-कारौली औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इस फैक्ट्री में अचानक विस्फोट हुआ, जिसके बाद भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि फैक्ट्री के अंदर फंसे अधिकांश मजदूर बच नहीं पाए। आग पर काबू पाने में लगभग दो घंटे लगे। हादसे इतना भयावह था कि कई शव जलकर सिर्फ हड्डियां या कंकाल रह गए, जबकि कुछ के सिर्फ सिर या अन्य हिस्से बचे। शवों को पॉलीथीन में भरकर निकाला गया।
फैक्ट्री गारमेंट (कपड़े) बनाने की इकाई के नाम पर पंजीकृत थी, लेकिन इसमें गुप्त रूप से पटाखे और विस्फोटक सामग्री बनाई जा रही थी। अधिकांश मजदूर बिहार से आए प्रवासी थे, जो यहां काम कर रहे थे।
मौतों का बढ़ता आंकड़ा
मौके पर ही 7 मजदूर जिंदा जल गए – विस्फोट और आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि वे तुरंत मारे गए।हादसे में कुल 11 लोग प्रभावित हुए, जिनमें से 4 को गंभीर जलने के कारण दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया।
बीते दिनों में अतिरिक्त मौतें: 22 फरवरी को आठवीं मौत हुई, जब 18 वर्षीय अनूप सिंह (करीब 90% झुलसे) ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।26 फरवरी (गुरुवार) सुबह नौवीं मौत हुई – घायल मजदूर जुन्नू ने सफदरजंग अस्पताल में अंतिम सांस ली। जुन्नू को हादसे के दिन ही दिल्ली रेफर किया गया था। वह करीब 90 प्रतिशत झुलस चुका था और पिछले 10 दिनों से आईसीयू में भर्ती था, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था।शेष 2 घायलों को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।शवों की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट कराना पड़ा, क्योंकि जले हुए शवों की स्थिति इतनी खराब थी कि सामान्य तरीके से पहचान संभव नहीं थी।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियां
भिवाड़ी पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की। अब तक तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है:फैक्ट्री संचालक हेमंत कुमार शर्मा,सुपरवाइजर/मैनेजर अभिनंदन तिवारी,मुख्य आरोपी हेमंत सचदेवा (दिल्ली के अपने घर से गिरफ्तार)। तीनों से रिमांड पर पूछताछ की गई। 25 फरवरी को उन्हें तिजारा कोर्ट में पेश किया गया, जहां से ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया। जांच में पता चला कि आरोपी लंबे समय से अवैध पटाखा निर्माण कर रहे थे और कई जगहों पर ऐसी इकाइयां चला रहे थे।
प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया है और जांच जारी है। हादसे के बाद भिवाड़ी पुलिस के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, जिसमें पुलिसकर्मियों से कथित संबंधों की जांच हो रही है।