भरतपुर के कसौदा गांव में घटिया सड़क निर्माण: हाथों से उखड़ रही डामर की परत, ग्रामीणों को मिली धमकी
राजस्थान के भरतपुर जिले के कसौदा गांव से सह गांव तक बनी 3 किलोमीटर सड़क महज दो दिन में हाथों से उखड़ने लगी। पैदल चलते समय डामर की परत निकल रही है और गिट्टी बाहर आ रही है। शिकायत करने पर ठेकेदार ने ग्रामीणों को धमकाया। पीडब्ल्यूडी अधिकारी अनजान बने हुए हैं, जबकि कलेक्टर ने जांच का आश्वासन दिया है।
राजस्थान के भरतपुर जिले में सड़क निर्माण की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जिले के कसौदा गांव से सह गांव तक बनाई जा रही 3 किलोमीटर लंबी सड़क महज दो दिन बाद ही हाथों से उखड़ने लगी। पैदल चलते समय डामर की परत आसानी से निकल रही है, और कई जगहों पर केवल गिट्टी डालकर काम को अधूरा छोड़ दिया गया है। इस मामले ने न केवल निर्माण कार्य की खराब गुणवत्ता को उजागर किया है, बल्कि ठेकेदारों द्वारा ग्रामीणों को धमकाने का भी आरोप लगा है।
घटना का विवरण यह मामला कसौदा गांव का है, जहां कसौदा से सह गांव तक की सड़क का निर्माण कार्य चल रहा था। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क का करीब 1 किलोमीटर हिस्सा पूरा हो चुका था, जबकि बाकी 2 किलोमीटर पर काम जारी था। मात्र दो दिन पहले डाली गई डामर की परत इतनी घटिया थी कि पैदल चलने पर वह उखड़कर बाहर आने लगी। कसौदा गांव के निवासी सौरभ ने बताया कि गुरुवार सुबह गांव के अन्य लोगों के साथ वे सुबह की सैर (वॉक) पर निकले थे। सड़क पर चलते समय उनके पैरों से डामर रगड़कर उखड़ने लगा। उत्सुकतावश उन्होंने सड़क किनारे के हिस्से को हाथ से खींचा तो पूरा हिस्सा आसानी से निकल आया। पैरों को सड़क पर रगड़ने पर अंदर बिछाई गई गिट्टी बाहर निकलने लगी। कई जगहों पर ठेकेदार ने केवल पेचवर्क (मरम्मत) करके काम छोड़ दिया था, और सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बने हुए थे। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की निम्न गुणवत्ता और अनियमितताओं का स्पष्ट प्रमाण है। ऐसे निर्माण से न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है, बल्कि ग्रामीणों को आवागमन में भी खतरा पैदा हो रहा है।
ग्रामीणों को धमकी का आरोप जब ग्रामीणों ने इस घटिया कार्य की शिकायत ठेकेदार के आदमियों से की, तो जवाब में उन्हें धमकाया गया। गांव वालों ने बताया कि गुरुवार सुबह शिकायत करने पहुंचे तो ठेकेदार के साथियों ने कहा, "ज्यादा नेतागिरी करने की जरूरत नहीं है।" धमकी इतनी गंभीर थी कि ग्रामीण डरकर अपने घरों को लौट गए। कुछ ग्रामीणों को फोन पर भी बुलाया गया और धमकियां दी गईं। इस घटना से ग्रामीणों में आक्रोश है। वे कहते हैं कि ठेकेदार और संबंधित विभाग की मिलीभगत से ऐसे घटिया काम हो रहे हैं, और शिकायत करने पर आवाज दबाने की कोशिश की जाती है।
विभागीय अधिकारियों का रवैया इस पूरे मामले में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। जूनियर इंजीनियर (जेईएन) ने तो यहां तक कह दिया कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी ही नहीं है। विभागीय उदासीनता ने ग्रामीणों के गुस्से को और बढ़ा दिया है। हालांकि, जिला कलेक्टर ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि संबंधित विभाग से जवाब मांगा जाएगा। लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई की खबर नहीं है।
व्यापक समस्या का संकेत यह घटना राजस्थान ही नहीं, पूरे देश में सड़क निर्माण में हो रही अनियमितताओं को दर्शाती है। अक्सर ठेकेदार कम गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल करते हैं, तापमान और मानकों का पालन नहीं करते, जिससे सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना या अन्य योजनाओं के तहत बनाई जाने वाली सड़कें भी ऐसी समस्याओं का शिकार होती रही हैं। ग्रामीणों की मांग है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई की जाए और सड़क का निर्माण दोबारा गुणवत्ता के साथ किया जाए। वीडियो में सड़क के उखड़ते हिस्सों को दिखाया गया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।