बाड़मेर में पानी के लिए 2 किलोमीटर दूर से सिर पर मटके ढोने को मजबूर महिलाएं और मासूम बच्चे
राजस्थान के बाड़मेर जिले में भीषण जल संकट ने लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। गांवों में महिलाएं और छोटे बच्चे रोजाना 2 किलोमीटर दूर जाकर सिर पर मटके रख पानी लाने को मजबूर हैं।
राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर में पानी की किल्लत लगातार गंभीर होती जा रही है। भीषण गर्मी और सूखे हालात के बीच गांवों में रहने वाले लोगों की जिंदगी पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष में बदल चुकी है। हालात ऐसे हैं कि महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर हैं।जिले के कई ग्रामीण इलाकों में पेयजल सप्लाई ठप होने से लोग बेहद परेशान हैं। गांवों में नल सूखे पड़े हैं और पानी की टंकियां खाली हैं। ऐसे में परिवारों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूर-दराज के जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
2 किलोमीटर दूर से लाना पड़ रहा पानी
स्थानीय लोगों के अनुसार गांव की महिलाओं और बच्चों को रोज सुबह और शाम करीब 2 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। तपती धूप में सिर पर मटके और हाथों में बाल्टियां लेकर पानी लाना उनकी मजबूरी बन गया है। कई परिवारों का कहना है कि पानी भरने में ही दिन का बड़ा हिस्सा निकल जाता है। इससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। कई बच्चे स्कूल जाने के बजाय घर के लिए पानी जुटाने में लगे रहते हैं।
भीषण गर्मी ने बढ़ाई मुश्किल
बाड़मेर में इन दिनों तापमान लगातार 45 डिग्री के आसपास पहुंच रहा है। ऐसे में पानी की कमी लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ हैंडपंप और कुएं भी जवाब देने लगे हैं। कुछ जगहों पर टैंकरों से पानी सप्लाई किया जा रहा है, लेकिन वह जरूरत के मुकाबले बेहद कम है। लोगों का आरोप है कि कई दिनों तक टैंकर नहीं पहुंचते, जिससे हालात और खराब हो जाते हैं।
महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर
जल संकट का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर दिखाई दे रहा है। सुबह से लेकर देर शाम तक उन्हें पानी की व्यवस्था में जुटना पड़ता है। कई महिलाओं ने बताया कि सिर पर भारी मटके उठाकर लंबी दूरी तय करने से स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार एक परिवार को दिनभर के लिए पर्याप्त पानी भी नहीं मिल पाता। ऐसे में पीने, खाना बनाने और पशुओं के लिए पानी जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है।
प्रशासन से समाधान की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग की है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में नियमित पेयजल सप्लाई, नई पाइपलाइन और अतिरिक्त टैंकरों की व्यवस्था की जाए ताकि गर्मी के मौसम में राहत मिल सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल गर्मियों में यही स्थिति बनती है, लेकिन अब तक कोई स्थायी योजना जमीन पर नजर नहीं आ रही।
जल संरक्षण पर भी जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि बाड़मेर जैसे रेगिस्तानी क्षेत्रों में जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते मजबूत योजनाएं लागू नहीं की गईं तो आने वाले वर्षों में जल संकट और गंभीर हो सकता है।