धरने के बीच रविंद्र सिंह भाटी की बिगड़ी तबीयत, फिर अचानक क्यों बोले “सड़कें जाम करना हमें भी आता है, हिम्मत है तो जेल भेज दो”?

बाड़मेर के गिरल गांव में जारी धरने के दौरान भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी की तबीयत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने मौके पर पहुंचकर इलाज किया, लेकिन इलाज के बाद भी भाटी धरना स्थल पर डटे रहे।

May 13, 2026 - 15:40
May 13, 2026 - 15:42
धरने के बीच रविंद्र सिंह भाटी की बिगड़ी तबीयत, फिर अचानक क्यों बोले “सड़कें जाम करना हमें भी आता है, हिम्मत है तो जेल भेज दो”?

बाड़मेर जिले के शिव क्षेत्र के गिरल गांव में चल रहे आंदोलन के बीच बुधवार सुबह उस समय हलचल मच गई, जब धरना स्थल पर मौजूद विधायक रविंद्र सिंह भाटी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। भीषण गर्मी और लगातार चल रही हीटवेव के बीच पिछले कई दिनों से धरना स्थल पर डटे विधायक को चक्कर और कमजोरी की शिकायत हुई, जिसके बाद तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) से डॉक्टरों की टीम को बुलाया गया।

सुबह करीब 8:30 बजे डॉक्टरों ने मौके पर पहुंचकर उनका प्राथमिक उपचार किया और ड्रिप चढ़ाई। इलाज के बाद उनकी तबीयत में सुधार बताया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने धरना स्थल छोड़ने से इनकार कर दिया और आंदोलनकारियों के बीच ही डटे रहे।

आठ दिनों से धरना स्थल पर मौजूद हैं भाटी

शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी पिछले आठ दिनों से गिरल गांव में ग्रामीणों और श्रमिकों के साथ धरना स्थल पर लगातार मौजूद हैं। प्रदर्शनकारी खुले आसमान के नीचे रहकर आंदोलन कर रहे हैं और विधायक भी उन्हीं के साथ जमीन पर रात गुजार रहे हैं। यह आंदोलन राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) के खिलाफ ग्रामीणों और श्रमिकों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा है।

“यह सिर्फ नौकरी नहीं, सम्मान की लड़ाई”

धरना स्थल पर विधायक भाटी ने कहा कि यह आंदोलन केवल मजदूरों की नौकरी का मुद्दा नहीं है, बल्कि क्षेत्र के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि जब तक ग्रामीणों और श्रमिकों की मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

“12 घंटे काम, वेतन सिर्फ 8 घंटे का”

भाटी ने आरोप लगाया कि श्रमिकों से 12-12 घंटे तक काम लिया जा रहा है, लेकिन भुगतान केवल 8 घंटे का किया जाता है। उन्होंने इसे श्रमिकों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि स्थानीय युवाओं और मजदूरों के हक के लिए यह संघर्ष जरूरी है।

“सड़क जाम करना हमें भी आता है”

धरने के दौरान भाटी के बयान भी काफी चर्चा में रहे। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। उन्होंने कहा, “सड़कें जाम करना हमें भी आता है। अभी मैं अकेला बैठा हूं, अगर लोगों को बुला लिया तो हालात संभालना मुश्किल हो जाएगा।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे जेल से डरने वाले नहीं हैं और पहले भी जेल जा चुके हैं।

एक महीने से जारी है आंदोलन

गिरल गांव में ग्रामीण करीब एक महीने से आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में 100 से अधिक ड्राइवरों की पुनर्बहाली, श्रमिकों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी, स्थानीय युवाओं को रोजगार और नियमानुसार सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि RSMML अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच वार्ता भी हुई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका है।

भीषण गर्मी में भी जुट रहे लोग

तेज गर्मी और हीटवेव के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण और समर्थक धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।

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