जोधपुर में चक्का जाम का दावा फेल, सड़कों पर दौड़ती रहीं निजी बसें
जोधपुर में ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बस ऑनर एसोसिएशन की चक्का जाम हड़ताल बेअसर रही। निजी बसें शहर में सामान्य रूप से चलती रहीं और यात्रियों को कोई खास परेशानी नहीं हुई। केवल एसोसिएशन से जुड़े कुछ बस मालिकों ने ही बसें बंद रखीं। हड़ताल RTO की अवैध बसों पर कार्रवाई के विरोध में की गई थी।
जोधपुर में ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बस ऑनर एसोसिएशन की ओर से घोषित चक्का जाम हड़ताल मंगलवार को पूरी तरह बेअसर साबित हुई। एसोसिएशन ने पहले दावा किया था कि हड़ताल के दौरान शहर के किसी भी रूट पर निजी बसें संचालित नहीं होंगी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आई।
सुबह से ही शहर के प्रमुख चौराहों और बस स्टैंड पर निजी बसें सामान्य दिनों की तरह दौड़ती दिखीं। बसें यात्रियों को चढ़ाती-उतारती रहीं, वहीं कुछ बसें माल ढुलाई करती भी नजर आईं। अलग-अलग गली-मोहल्लों से भी सवारियां बिठाकर बसें अपने गंतव्य की ओर रवाना होती रहीं।
सिर्फ निजी बसें ही नहीं, बल्कि सिटी बस, टैक्सी और अन्य छोटे-बड़े रूट की बस सेवाएं भी नियमित रूप से संचालित होती रहीं। केवल एसोसिएशन से जुड़े कुछ बस मालिकों ने अपनी बसें बंद रखीं।
आम जनजीवन पर नहीं पड़ा असर
हड़ताल के ऐलान के बावजूद शहर में यातायात व्यवस्था सामान्य बनी रही। यात्रियों को किसी तरह की खास परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। स्कूल, दफ्तर और बाजार जाने वाले लोग रोजमर्रा की तरह अपने गंतव्य तक पहुंचे।
RTO कार्रवाई के विरोध में था प्रदर्शन
दरअसल, यह हड़ताल आरटीओ विभाग द्वारा अवैध रूप से संचालित बसों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के विरोध में बुलाई गई थी। विभाग की ओर से नियम विरुद्ध चल रही बसों पर सख्ती बरती जा रही है। कई बार इन बसों की वजह से सड़क दुर्घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
बस संचालकों का कहना है कि कार्रवाई से उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है, जबकि प्रशासन का तर्क है कि यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
कुल मिलाकर, जोधपुर में घोषित चक्का जाम हड़ताल का असर नगण्य रहा और शहर की परिवहन व्यवस्था सामान्य रूप से चलती रही।