बाड़मेर में लाखों की पाइपलाइन बनी ‘कागजों में’, गांव वालों को आज तक नहीं मिला पानी; ग्रामीणों ने खोला बड़ा राज

बाड़मेर जिले की ग्राम पंचायत बाड़मेर गादान में ग्रामीणों ने सार्वजनिक पेयजल पाइपलाइन में वर्षों से पानी सप्लाई शुरू नहीं होने का आरोप लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है।

May 16, 2026 - 16:06
May 16, 2026 - 16:20
बाड़मेर में लाखों की पाइपलाइन बनी ‘कागजों में’, गांव वालों को आज तक नहीं मिला पानी; ग्रामीणों ने खोला बड़ा राज

राजस्थान के बाड़मेर जिले की ग्राम पंचायत बाड़मेर गादान से पेयजल व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभागों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सामूहिक शिकायत दर्ज करवाई है। ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई सार्वजनिक पेयजल पाइपलाइन आज तक शुरू नहीं हुई, जिसके कारण गांव के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं।

सरकारी रिकॉर्ड में पूरा, जमीन पर अधूरा

ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार वर्ष 2022-23 में “शिव मंदिर से होते हुए इज्जतनियों की ढाणी सार्वजनिक टांका पांचाराम के घर पास तक पाइपलाइन कार्य” स्वीकृत किया गया था। यह कार्य XV Finance योजना के तहत करीब 19 लाख 75 हजार रुपये की लागत से मंजूर हुआ था।

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में इस योजना पर लगभग 8 लाख 14 हजार रुपये खर्च होना दर्ज है। इतना ही नहीं, मटेरियल बिल, वाउचर नंबर और भुगतान से जुड़े दस्तावेज भी रिकॉर्ड में उपलब्ध बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद आज तक पाइपलाइन में नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हुई।

पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर ग्रामीण

क्षेत्र में लंबे समय से गंभीर पेयजल संकट बना हुआ है। गांव और आसपास की ढाणियों में रहने वाले लोगों को पीने के पानी के लिए निजी टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। इससे ग्रामीणों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश परिवार मजदूरी और सीमित आय पर निर्भर हैं। ऐसे में हर महीने पानी के टैंकरों पर हजारों रुपये खर्च करना उनके लिए बड़ी परेशानी बन गया है। वहीं पशुपालकों को भी अपने पशुओं के लिए पानी जुटाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकारी पोर्टल पर कार्य पूर्ण दिखाया गया है, लेकिन हकीकत में लोगों को एक बूंद पानी तक नसीब नहीं हुई। इससे गांव में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पाइपलाइन चालू कर दी जाती तो आज उन्हें पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता।

निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि:

पाइपलाइन में तुरंत नियमित जलापूर्ति शुरू की जाए

योजना की तकनीकी और वित्तीय जांच करवाई जाए

जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो

क्षेत्र में स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए

आंदोलन और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे जनसुनवाई, आरटीआई और न्यायालय का सहारा लेने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए लगातार संघर्ष नहीं करना चाहते और प्रशासन को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और ग्रामीणों को राहत कब तक मिल पाती है।

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