1971 के युद्ध में वो रात जब जोंगा जीपें “टैंक” बन गईं: बाड़मेर के ठाकुर बलवंत सिंह की अनसुनी वीरगाथा

1971 के भारत-पाक युद्ध में बाड़मेर के ठाकुर बलवंत सिंह ने जयपुर राजघराने के लेफ्टिनेंट कर्नल भवानी सिंह के साथ मिलकर अनोखी रणनीति अपनाई। जोंगा जीपों के साइलेंसर खोलकर टैंक जैसी आवाज पैदा की और पाकिस्तानी सेना को भगाकर छाछरो पर तिरंगा फहराया। 13 दिसंबर 2025 को बाड़मेर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उनकी प्रतिमा का अनावरण करेंगे।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
December 11, 2025 • 11:48 AM  395
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राजस्थान
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1971 के युद्ध में वो रात जब जोंगा जीपें “टैंक” बन गईं: बाड़मेर के ठाकुर बलवंत सिंह की अनसुनी वीरगाथा
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11 Dec 2025
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1971 के युद्ध में वो रात जब जोंगा जीपें “टैंक” बन गईं: बाड़मेर के ठाकुर बलवंत सिंह की अनसुनी वीरगाथा

13 दिसंबर 2025 को राजस्थान के बाड़मेर शहर में एक शानदार समारोह होने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी की मौजूदगी में ठाकुर बलवंत सिंह बाखासर की पूर्णकाय प्रतिमा का अनावरण होगा। ये वो शख्स थे जिन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पाकिस्तानी फौज को थरथराने पर मजबूर कर दिया था।

वो रात जब रेगिस्तान में फौज भटक गई थी युद्ध के दिनों की बात है। लेफ्टिनेंट कर्नल भवानी सिंह (जयपुर राजघराने के तत्कालीन मुखिया और बाद में ब्रिगेडियर बने) अपनी यूनिट्स के साथ लोंगेवाला-रामगढ़ सेक्टर में आगे बढ़ रहे थे। अचानक रेतीले टीलों (धोरों) में पूरी बटालियन भटक गई। अंधेरी रात, कोई पक्की सड़क नहीं, कोई GPS नहीं – बस रेगिस्तान की अनंतता।ऐसे में लेफ्टिनेंट कर्नल भवानी सिंह कुछ सैनिकों को लेकर सीधे बाड़मेर जिले के बाखासर गांव पहुंचे। वहां ठाकुर बलवंत सिंह का डेरा था। घर के बाहर चार शानदार स्टर्लिंग नस्ल के घोड़े बंधे थे। भवानी सिंह अंदर गए और बिना किसी औपचारिकता के सीधे कहा – “हमें रास्ता भटक गए हैं, आपकी मदद चाहिए।”ठाकुर बलवंत सिंह ने एक ही जवाब दिया –“हुकुम करो साहब, मेरा सिर भी हाजिर है।”

इलाके का एक-एक टिब्बा जानता था बलवंत सिंह को बलवंत सिंह का बचपन पाकिस्तान के सिंध प्रांत के अमरकोट क्षेत्र में रिश्तेदारों के यहां बीता था। विभाजन से पहले वे अक्सर वहां आते-जाते थे। कच्छ का रण हो या थार का रेगिस्तान, सीमा के दोनों तरफ के रास्ते, पानी के कुंड, टिब्बों की स्थिति – सब उनकी हथेली पर थे।यही वजह थी कि युद्ध शुरू होने से कई महीने पहले ही लेफ्टिनेंट कर्नल भवानी सिंह उनसे मिले थे और पूरा रोडमैप तैयार किया था।

6 दिसंबर 1971, शाम  6-7 बजे – छाछरो की ओर कूच 11 इन्फैंट्री डिवीजन। 330, 85 और 31 इन्फैंट्री ब्रिगेड। 17 ग्रेनेडियर्स। 10 पैरा (स्पेशल फोर्सेस) कमांडो। इन सबके साथ ठाकुर बलवंत सिंह खुद चल रहे थे।छाछरो (पाकिस्तान में चाचरो) पर कब्जा करना रणनीतिक रूप से बेहद अहम था। वहां पहुंचते ही भारतीय फौज का सामना पाकिस्तानी टैंक रेजिमेंट से हुआ। अंधेरे में टैंक दिख नहीं रहे थे, सिर्फ उनकी गड़गड़ाहट सुनाई दे रही थी।

ऑपरेशन “जोंगा टैंक” – एक अनोखी तरकीब लेफ्टिनेंट कर्नल भवानी सिंह ने बलवंत सिंह को एक पूरी बटालियन और 4 जोंगा जीपें सौंप दीं।बलवंत सिंह और भवानी सिंह ने मिलकर एक गजब का दिमाग लगाया –चारों जोंगा जीपों के साइलेंसर खोल दिए गए।जैसे ही ये जीपें धोरों पर तेज रफ्तार से दौड़ीं, उनकी आवाज बिल्कुल टैंक की गड़गड़ाहट जैसी हो गई। दूर से पाकिस्तानी सैनिकों को लगा कि भारतीय टैंक रेजिमेंट आ पहुंची है। घबरा कर वे इधर-उधर भागने लगे।इसी अफरा-तफरी में भारतीय सैनिकों ने धावा बोल दिया। पाकिस्तानी फौज उलटे पांव भागी और छाछरो पर तिरंगा लहरा गया।

युद्ध के बाद सम्मान 10 पैरा कमांडो रेजिमेंट ने खास तौर पर ठाकुर बलवंत सिंह की सूझबूझ और बहादुरी की तारीफ की।उन पर चल रहे कई आपराधिक मुकदमे (मर्डर, किडनैपिंग आदि) वापस ले लिए गए।देशभर में कहीं भी हथियार रखने के दो स्पेशल लाइसेंस जारी किए गए।

आज भी गूंजती है वो गड़गड़ाहट 1991 में ठाकुर बलवंत सिंह का निधन हो गया, लेकिन उनकी कहानी आज भी बाड़मेर-जैसलमेर के रेगिस्तानी गांवों में जीवित है। उनके पोते रतन सिंह बताते हैं, “दादा जी कहते थे – देश के लिए जान देना कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन देश के लिए सही वक्त पर सही दिमाग लगाना बड़ी बात है।”13 दिसंबर को जब बाड़मेर में उनकी प्रतिमा का अनावरण होगा, तो शायद दूर रेगिस्तान में कहीं चार जोंगा जीपों की गड़गड़ाहट फिर से गूंजेगी – वो गड़गड़ाहट जो कभी पाकिस्तानी टैंकों से भी भारी साबित हुई थी।

 

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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