सुशीला कार्की बनीं नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री: PM मोदी की बधाई, GenZ की मांगों को मिली मंज़ूरी

नेपाल में राजनीतिक संकट के बीच पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की ने 12 सितंबर 2025 को अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और नेपाल की प्रगति के लिए भारत की प्रतिबद्धता जताई। GenZ प्रदर्शनकारियों की मांग पर सुशीला ने 6-12 महीने में चुनाव, संसद भंग, भ्रष्टाचार जांच और हिंसा की जांच जैसे कदम उठाने का वादा किया। सुशीला को भारत समर्थक माना जाता है।

Sep 13, 2025 - 11:52
Sep 13, 2025 - 12:18
सुशीला कार्की बनीं नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री: PM मोदी की बधाई, GenZ की मांगों को मिली मंज़ूरी

नेपाल में हाल ही में हुए राजनीतिक उथल-पुथल के बाद पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपा गया है। 73 वर्षीय सुशीला कार्की ने 12 सितंबर, 2025 को नेपाल के अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया दी और सुशीला कार्की को बधाई दी। यह लेख नेपाल के इस नए राजनीतिक परिदृश्य, सुशीला कार्की के नेतृत्व, और GenZ प्रदर्शनकारियों की मांगों को विस्तार से प्रस्तुत करता है।

सुशीला कार्की का शपथ ग्रहण

सुशीला कार्की, जो नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रह चुकी हैं, ने 12 सितंबर, 2025 को अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। यह निर्णय नेपाल में कई दिनों तक चली राजनीतिक अनिश्चितता के बाद लिया गया, जो पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद शुरू हुई थी। सुशीला कार्की को भारत का समर्थक माना जाता है, और उन्होंने शपथ ग्रहण से पहले पीएम नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की तारीफ की थी। उनकी नियुक्ति को नेपाल के संविधान के दायरे में एक असाधारण कदम माना जा रहा है, क्योंकि संविधान में पूर्व जजों को राजनीतिक पद संभालने की अनुमति नहीं है। फिर भी, GenZ प्रदर्शनकारियों की मांग और जनता के दबाव के कारण राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को यह निर्णय लेना पड़ा।

पीएम मोदी की प्रतिक्रिया

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुशीला कार्की के शपथ ग्रहण पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी शुभकामनाएं दीं और नेपाल के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

पीएम मोदी ने लिखा:- "नेपाल की अंतरिम सरकार की प्रधानमंत्री के रूप में पद ग्रहण करने पर माननीय सुशीला कार्की जी को हार्दिक शुभकामनाएं। नेपाल के भाई-बहनों की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए भारत पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।"

उन्होंने नेपाली भाषा में भी एक ट्वीट साझा किया, जिससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव को और बल मिला। पीएम मोदी की यह प्रतिक्रिया दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों को दर्शाती है, खासकर तब जब सुशीला कार्की को भारत का समर्थक माना जाता है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को चीन का समर्थक कहा जाता था।

GenZ प्रदर्शनकारियों की भूमिका

नेपाल में हाल के महीनों में GenZ प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक परिवर्तन की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर आंदोलन किया। केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद उत्पन्न हुए राजनीतिक शून्य को भरने के लिए प्रदर्शनकारियों ने सुशीला कार्की के नाम का प्रस्ताव सेना प्रमुख को सौंपा। प्रदर्शनकारियों का मानना था कि सुशीला कार्की की निष्पक्षता और अनुभव देश को संकट से बाहर निकाल सकता है।

राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शुरू में संवैधानिक बाधाओं का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि संविधान के दायरे में रहकर ही कोई समाधान निकाला जाना चाहिए। हालांकि, जनता और प्रदर्शनकारियों के दबाव के आगे राष्ट्रपति को झुकना पड़ा, और सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया।

सुशीला कार्की द्वारा स्वीकारी गई मांगें

सुशीला कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री बनने के बाद GenZ प्रदर्शनकारियों की कई प्रमुख मांगों को स्वीकार किया। नेपाल में 6 से 12 महीने के बीच नए चुनाव कराए जाएंगे। यह मांग देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पुनर्जनन देने के लिए महत्वपूर्ण है। नेपाल की संसद को भंग कर दिया गया है, और अब देश की कमान पूरी तरह सुशीला कार्की के हाथों में है। अंतरिम सरकार में नागरिकों और सेना दोनों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित किया गया है, ताकि सभी पक्षों का संतुलन बना रहे। पुराने राजनीतिक दलों और नेताओं की संपत्ति की जांच के लिए एक शक्तिशाली न्यायिक आयोग का गठन किया जाएगा। यह कदम भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई हिंसा की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जाएगी, ताकि प्रभावित लोगों को न्याय मिल सके।

सुशीला कार्की का भारत के प्रति रुख

सुशीला कार्की को भारत का समर्थक माना जाता है। उन्होंने पहले भी पीएम नरेंद्र मोदी की कार्यप्रणाली की तारीफ की थी और कहा था कि वह उनकी नेतृत्व शैली से प्रभावित हैं। यह रुख नेपाल और भारत के बीच संबंधों को और मजबूत कर सकता है, खासकर तब जब पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को चीन का करीबी माना जाता था। भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक और सामरिक संबंधों को देखते हुए सुशीला कार्की की नियुक्ति दोनों देशों के लिए एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

नेपाल के सामने चुनौतियां

सुशीला कार्की के सामने कई चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती है देश में स्थिरता और शांति बनाए रखना, साथ ही संवैधानिक ढांचे के भीतर नए चुनाव कराना। इसके अलावा, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और हिंसा की जांच जैसे मुद्दों पर जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना भी उनके लिए महत्वपूर्ण होगा। GenZ प्रदर्शनकारियों की मांगों को लागू करने के साथ-साथ उन्हें देश के विभिन्न राजनीतिक दलों और समूहों के बीच संतुलन बनाना होगा।