20 दिन बाद दर्ज हुई एफआईआर, कंपाउंडर पर लापरवाही के गंभीर आरोप
जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के करीब 20 दिन बाद पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए इंजेक्शन लगाने वाले कंपाउंडर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एसआईटी जांच में उपचार के दौरान लापरवाही के संकेत मिलने के बाद बोरानाडा थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
जोधपुर:- शहर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। घटना के लगभग 20 दिन बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इंजेक्शन लगाने वाले कंपाउंडर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस को प्राथमिक रूप से चिकित्सकीय लापरवाही के संकेत मिले हैं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें उपचार के लिए ले जाया गया था। इसी दौरान कंपाउंडर देवी सिंह द्वारा उन्हें इंजेक्शन लगाया गया। परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि इंजेक्शन लगने के कुछ समय बाद ही साध्वी की हालत अचानक गंभीर हो गई। उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद परिवार और अनुयायियों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। मामले ने स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा भी बटोरी थी।
20 दिन बाद क्यों दर्ज हुई एफआईआर
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मौत के कारणों को स्पष्ट करने के लिए मेडिकल रिपोर्ट, बयान और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही थी। जांच टीम (एसआईटी) ने जब पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की तो इंजेक्शन लगाने की प्रक्रिया और उपचार में संभावित लापरवाही के संकेत मिले। इन्हीं तथ्यों के आधार पर बोरानाडा थाने में कंपाउंडर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
जांच में क्या सामने आया
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि:
इंजेक्शन लगाने से पहले आवश्यक चिकित्सकीय सावधानियां नहीं बरती गईं।
इलाज की प्रक्रिया निर्धारित मेडिकल नियमों के अनुसार नहीं होने की आशंका है।
इंजेक्शन देने के बाद मरीज की स्थिति बिगड़ने पर तत्काल उचित मेडिकल प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष मेडिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा।
पुलिस का क्या कहना है
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है और सभी संबंधित लोगों के बयान लिए जा रहे हैं। मेडिकल विशेषज्ञों की राय भी ली जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौत सीधे तौर पर लापरवाही का परिणाम थी या नहीं।
परिजनों और समर्थकों की मांग
साध्वी प्रेम बाईसा के अनुयायियों और परिजनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सही उपचार मिलता तो शायद जान बचाई जा सकती थी।
आगे क्या होगा
अब पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय करेगी। यदि लापरवाही साबित होती है तो आरोपी के खिलाफ कड़ी धाराओं में कार्रवाई संभव है।