बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा और भारत-विरोधी भावना
बांग्लादेश में 2024 के छात्र विद्रोह के प्रमुख नेता और भारत-विरोधी कट्टरपंथी विचारधारा वाले शरीफ उस्मान हादी की सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। 12 दिसंबर को ढाका में उन पर गोली चलाई गई थी। मौत की खबर फैलते ही ढाका सहित कई शहरों में उग्र प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़ हुई। प्रदर्शनकारियों ने हत्या का आरोप शेख हसीना समर्थकों और भारत पर लगाया, क्योंकि हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं और आरोप है कि हत्यारे भारत भाग गए। अखबारों के दफ्तरों पर हमले हुए, भारत-विरोधी नारे लगे। अंतरिम सरकार ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया और जांच का वादा किया, लेकिन हिंसा से चुनावी माहौल प्रभावित हुआ। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का बयान इस घटना से सीधे जुड़ा नहीं मिला, लेकिन यह बांग्लादेश में फैली भारत-विरोधी धारणा को दर्शाता है।
बांग्लादेश में हालिया घटनाएं फिर से राजनीतिक उथल-पुथल का शिकार बनी हुई हैं। 18 दिसंबर 2025 को सिंगापुर में एक अस्पताल में शरीफ उस्मान हादी (जिन्हें उस्मान हादी या उस्मान ओस्मान हादी के नाम से भी जाना जाता है) की मौत हो गई। वे 32 वर्षीय युवा नेता थे, जो 2024 के छात्र आंदोलन (जुलाई विद्रोह) के प्रमुख चेहरों में से एक थे। इस आंदोलन ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की 15 साल लंबी सरकार को गिरा दिया था। हादी की मौत के बाद ढाका सहित कई शहरों में व्यापक हिंसा भड़क उठी, जिसमें आगजनी, तोड़फोड़ और भारत-विरोधी नारे लगाए गए।
उस्मान हादी कौन थे? पृष्ठभूमि: हादी का जन्म 1993 या 1994 में झालोकाठी जिले के नलचिटी गांव में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। वे राजनीति विज्ञान के छात्र रहे और ढाका यूनिवर्सिटी से जुड़े थे।राजनीतिक उदय: 2024 के कोटा विरोधी छात्र आंदोलन में वे प्रमुख भूमिका में उभरे। वे इंकलाब मंच (Inqilab Mancha) के संस्थापक और प्रवक्ता थे, जो एक कट्टरपंथी और भारत-विरोधी विचारधारा वाला युवा संगठन माना जाता है।भारत-विरोधी स्टैंड: हादी भारत की बांग्लादेशी मामलों में कथित दखलंदाजी के मुखर आलोचक थे। वे शेख हसीना को भारत-समर्थित मानते थे और "ग्रेटर बांग्लादेश" जैसे विवादित नक्शे साझा करने के लिए चर्चा में रहे, जिसमें भारत के पूर्वोत्तर राज्य शामिल दिखाए गए थे।चुनावी महत्वाकांक्षा: फरवरी 2026 के आम चुनाव में ढाका-8 सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में प्रचार कर रहे थे।
हत्या की घटना और मौत हमला: 12 दिसंबर 2025 को ढाका में मस्जिद से निकलते समय या चुनाव प्रचार के दौरान मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने हादी पर गोली चलाई। सिर में कई गोलियां लगीं, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।इलाज और मौत: पहले ढाका में इलाज हुआ, फिर सिंगापुर ले जाया गया। 18 दिसंबर को सिंगापुर जनरल अस्पताल में उनकी मौत हो गई।आरोप: प्रदर्शनकारी और इंकलाब मंच ने हत्या का आरोप शेख हसीना की अवामी लीग और भारत पर लगाया। दावा किया गया कि मुख्य आरोपी फैसल करीम मसूद भारत भाग गया। हालांकि, बांग्लादेश पुलिस ने कहा कि भारत भागने का कोई पुख्ता सबूत नहीं है। जांच जारी है, कई गिरफ्तारियां हुईं।
मौत के बाद हिंसा और भारत-विरोधी प्रदर्शन हिंसा की घटनाएं: मौत की खबर फैलते ही ढाका, चटगांव, राजशाही आदि शहरों में उग्र प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रमुख अखबारों प्रोथोम आलो और डेली स्टार के दफ्तरों में आगजनी और तोड़फोड़ (इन्हें भारत-समर्थक और हसीना-समर्थक माना गया)।शेख मुजीबुर रहमान के घर और अवामी लीग कार्यालयों पर हमले।एक हिंदू युवक की लिंचिंग और शव को पेड़ से लटकाकर जलाने की घटना।भारत-विरोधी नारे: प्रदर्शनकारियों ने भारत को हसीना को शरण देने और हत्यारों को पनाह देने का आरोप लगाया। नारे लगे जैसे "भारत जो हसीना बचाता है, उसे तोड़ो" और हसीना की प्रत्यर्पण की मांग।सरकारी प्रतिक्रिया: अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने हादी की मौत को "राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति" बताया और एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया। हिंसा की निंदा की और चुनाव बाधित करने की साजिश बताया।
शेख हसीना का कनेक्शन और भारत की भूमिका शेख हसीना अगस्त 2024 से भारत में शरण लिए हुए हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कई बार उनकी प्रत्यर्पण की मांग की है, लेकिन भारत ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया।प्रदर्शनकारी मानते हैं कि हादी की हत्या हसीना और अवामी लीग समर्थकों की साजिश है, और भारत इसमें शामिल है क्योंकि हसीना भारत में हैं।इससे भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ा है। भारतीय दूतावासों के बाहर प्रदर्शन हुए।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का बयान उपयोगकर्ता द्वारा उल्लिखित बयान कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का है, जिसमें उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में लोगों को लग रहा है कि उस्मान हादी की हत्या शेख हसीना के लिए भारत ने कराई है। अल्वी ने भारत की विदेश नीति की आलोचना की और हसीना को शरण देने को नाकामी बताया, जिससे दुनिया में भारत की बदनामी हो रही है। हालांकि, उपलब्ध स्रोतों में इस बयान की सीधी पुष्टि नहीं मिली, लेकिन यह बांग्लादेश में फैली भारत-विरोधी धारणा को प्रतिबिंबित करता प्रतीत होता है।