शिक्षा मंत्री के बयान के बाद भी नहीं बदली RTE प्रवेश व्यवस्था!
राजस्थान में आरटीई प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षा मंत्री द्वारा जिले स्तर पर प्रवेश की बात कहे जाने के बावजूद शिक्षा विभाग ने वार्ड आधारित प्राथमिकता व्यवस्था जारी रखी है, जिससे निजी स्कूल संचालकों में नाराजगी है। वहीं इस बार आरटीई के तहत नर्सरी से पहली कक्षा तक चार कक्षाओं में प्रवेश दिया जाएगा और आवेदन 20 फरवरी से शुरू होंगे।
राजस्थान में राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत प्रवेश प्रक्रिया को लेकर नया विवाद सामने आया है। शिक्षा मंत्री के सार्वजनिक बयान और प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों में अंतर होने से निजी विद्यालय संचालकों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है। इस मुद्दे पर निजी स्कूल संचालक संघ ने नाराजगी जताते हुए सरकार से स्पष्ट नीति लागू करने की मांग की है।
मंत्री के बयान और आदेशों में दिखा फर्क
जोधपुर में जनवरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा था कि आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में वार्ड आधारित बाध्यता समाप्त कर पूरे जिले को आधार बनाया जाएगा, जिससे अभिभावकों को स्कूल चुनने के अधिक विकल्प मिल सकें।
हालांकि सत्र 2026-27 के लिए प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी प्रवेश कार्यक्रम में पहले की तरह वार्ड-वाइज प्राथमिकता व्यवस्था को ही जारी रखा गया है। यानी पहले संबंधित वार्ड के बच्चों को प्राथमिकता मिलेगी और उसके बाद अन्य क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अवसर दिया जाएगा।
निजी स्कूल संचालकों की नाराजगी
निजी स्कूल संचालक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वार्ड आधारित व्यवस्था के कारण कई अभिभावकों को अपनी पसंद के विद्यालय में प्रवेश नहीं मिल पाता। उनका आरोप है कि मंत्री स्तर पर किए गए बदलावों की घोषणा लागू नहीं होने से भ्रम और असंतोष बढ़ा है।
संघ ने सरकार से प्रवेश प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और स्पष्ट बनाने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि घोषित सुधार लागू नहीं हुए तो आगे आंदोलन किया जाएगा।
सुविधा शुल्क को लेकर भी विवाद
स्कूल संचालकों ने यह भी कहा कि पहले पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों से सुविधा शुल्क नहीं लेने की बात कही गई थी, लेकिन विभागीय आदेशों में शुल्क व्यवस्था जारी रहने की बात सामने आई। विभाग के अनुसार सुविधा शुल्क सीधे अभिभावकों से नहीं लिया जाएगा, बल्कि स्कूल स्तर पर प्रति विद्यार्थी राशि जमा की जाएगी।
अब चार कक्षाओं में मिलेगा आरटीई के तहत प्रवेश
इस बार आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए प्री-प्राइमरी से लेकर पहली कक्षा तक कुल चार स्तरों पर प्रवेश की व्यवस्था की गई है। पहले केवल नर्सरी या पहली कक्षा में ही आवेदन संभव था, लेकिन अब दायरा बढ़ा दिया गया है।
आरटीई के तहत शामिल कक्षाएं:
नर्सरी (3–4 वर्ष आयु)
एलकेजी (4–5 वर्ष)
यूकेजी (5–6 वर्ष)
पहली कक्षा (6–7 वर्ष)
आवेदन प्रक्रिया 20 फरवरी से शुरू होगी और 6 मार्च को लॉटरी के माध्यम से चयन किया जाएगा।
सीट निर्धारण का नया फार्मूला
प्राइवेट स्कूलों में पिछले तीन वर्षों के प्रवेश आंकड़ों के आधार पर औसत सीट संख्या तय की जाएगी। उसी का 25 प्रतिशत हिस्सा आरटीई के तहत निशुल्क प्रवेश के लिए आरक्षित रहेगा।
यदि किसी कक्षा में पहले से प्रमोट होकर विद्यार्थी आ जाते हैं, तो शेष बची सीटों पर ही नए छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। इससे खाली सीटों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
खाली सीटें भरने से बढ़ेंगे अवसर
पहले कई बार नर्सरी में दाखिला लेने के बाद छात्र बीच में स्कूल छोड़ देते थे, जिससे ऊपरी कक्षाओं में सीटें खाली रह जाती थीं और उनका उपयोग नहीं हो पाता था। नई व्यवस्था के तहत अब इन खाली सीटों पर भी आरटीई से प्रवेश संभव होगा, जिससे अधिक बच्चों को मुफ्त शिक्षा का लाभ मिलने की संभावना है।
सरकार का पक्ष
शिक्षा मंत्री का कहना है कि उनके बयान का अर्थ पूरी तरह जिला आधारित प्रवेश लागू करना नहीं था, बल्कि व्यवस्था को अधिक लचीला बनाने पर चर्चा की गई थी। विभागीय नियमों के अनुसार फिलहाल वार्ड प्राथमिकता व्यवस्था जारी रहेगी।
कुल मिलाकर क्या है स्थिति
आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में कक्षाओं का दायरा बढ़ाने और सीट उपयोग सुधारने जैसे बदलाव किए गए हैं, लेकिन वार्ड आधारित प्राथमिकता को लेकर स्पष्टता नहीं होने से विवाद खड़ा हो गया है। अब अभिभावकों और निजी स्कूल संचालकों की नजर इस बात पर है कि सरकार आगे क्या अंतिम निर्णय लेती है और क्या घोषित सुधार वास्तव में लागू किए जाते हैं।