कोटा में आवारा कुत्तों का आतंक: 4 साल की मासूम अलिजा पर झुंड ने किया हमला, चेहरा बुरी तरह जख्मी, सर्जरी के बाद डॉक्टरों की निगरानी में
राजस्थान के कोटा जिले के सांगोद इलाके में 4 जनवरी को आवारा कुत्तों के झुंड ने 4 साल की मासूम बच्ची अलिजा पर हमला कर उसके चेहरे को बुरी तरह जख्मी कर दिया। बच्ची की सर्जरी हुई और वह एमबीएस अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में है। इलाके में कुत्तों का आतंक लंबे समय से बना हुआ है, प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग उठ रही है।
राजस्थान के कोटा जिले के ग्रामीण इलाके सांगोद में 4 जनवरी 2026 को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। आवारा कुत्तों के एक झुंड ने मात्र 4 साल की मासूम बच्ची अलिजा पर अचानक हमला कर दिया। बच्ची घर के पास की दुकान से टॉफी लेकर लौट रही थी, तभी कई कुत्तों ने उसे घेर लिया और उसके चेहरे पर क्रूरता से हमला बोल दिया।हमले में अलिजा के मुंह, नाक, आंखों के नीचे और माथे पर गहरे घाव हो गए। कुत्तों ने उसके चेहरे को इतनी बुरी तरह नोचा कि गंभीर चोटें आईं। गनीमत रही कि उसकी आंखें सुरक्षित रहीं, वरना नुकसान और भी भयावह हो सकता था। आसपास मौजूद लोगों ने चीख-पुकार सुनकर दौड़कर आकर किसी तरह कुत्तों को भगाया और बच्ची को उनकी पकड़ से छुड़ाया।
बच्ची के पिता आबिद ने बताया कि घटना दोपहर के समय रामबाड़ी के सामने हुई। अलिजा को तुरंत सांगोद के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे कोटा के एमबीएस अस्पताल रेफर कर दिया। 4 जनवरी को ही बच्ची की प्लास्टिक सर्जरी की गई। फिलहाल अलिजा की हालत स्थिर है और वह 2-3 दिन डॉक्टरों की सख्त निगरानी में रहेगी।एमबीएस अस्पताल के सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. नीरज देवंदा ने बताया कि बच्ची को रैबीज के खतरे को देखते हुए इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। साथ ही एंटी-रैबीज वैक्सीन का कोर्स भी शुरू किया गया है। डॉक्टर ने कहा कि घाव गहरे हैं, इसलिए सावधानी बरती जा रही है।
इलाके में कुत्तों का लंबे समय से आतंक स्थानीय लोगों का कहना है कि सांगोद और आसपास के ग्रामीण इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या काफी बढ़ गई है और लंबे समय से उनका आतंक बना हुआ है। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन नगर पालिका या संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोग अब घर से बाहर निकलने में भी डरने लगे हैं, खासकर बच्चे और बुजर्ग।कोटा में यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले ही 27 दिसंबर को पाटन पोल इलाके में एक ऑटो ड्राइवर पर भी आवारा कुत्तों ने हमला किया था, जिसमें उसके मुंह को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा था। उसे भी एमबीएस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शहर के कई पार्कों और कॉलोनियों में मॉर्निंग वॉक करने वाले लोग अब कुत्तों के डर से बाहर निकलने से कतराते हैं।सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी आवारा कुत्तों की समस्या पर कई बार सख्त निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। राजस्थान में आवारा कुत्तों के हमलों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे लोगों में आक्रोश है।
डॉग बाइट के बाद क्या करें: डॉक्टरों की सलाह डॉ. नीरज देवंदा ने बताया कि स्ट्रीट डॉग के काटने पर सबसे पहले घाव को अच्छी तरह साफ पानी और साबुन से धोना चाहिए। इसके बाद तुरंत अस्पताल जाकर एंटी-रैबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन लगवाना अनिवार्य है। इंजेक्शन का पूरा कोर्स समय पर पूरा करें।घाव को साफ और सूखा रखें।बिना डॉक्टर की सलाह के कोई घरेलू उपाय न अपनाएं।रोज एंटीसेप्टिक से घाव साफ करें।बच्चे को कुछ दिन खेलकूद से दूर रखें।डॉक्टर की सलाह बिना कोई अन्य दवा न लें।बच्चे को दोबारा किसी जानवर के संपर्क में न आने दें।
डॉग बाइट की चार कैटेगरी डॉक्टरों के अनुसार डॉग बाइट को चार कैटेगरी में बांटा जाता है:फर्स्ट कैटेगरी: हल्की खरोच, कोई खून नहीं निकला – केवल।सेकंड कैटेगरी: सतही चोट, हल्का खून – वैक्सीनेशन जरूरी।थर्ड कैटेगरी: गहरे घाव, चमड़ी फटी – इम्युनोग्लोबुलिन + वैक्सीन।फोर्थ कैटेगरी: बहुत गंभीर, मांस नोचा गया – तुरंत इमरजेंसी ट्रीटमेंट।थर्ड और फोर्थ कैटेगरी में घाव में तुरंत टांके नहीं लगाने चाहिए, क्योंकि कुत्ते की लार में रैबीज वायरस हो सकता है। कम से कम 3 दिन बाद ही सर्जरी या टांके लगाएं।