"यूरोपीय बाजार से पाकिस्तान की विदाई? भारत-EU डील बनते ही पड़ोसी मुल्क में मचा हड़कंप, कंगाली की ओर बढ़ेगा एक्सपोर्ट"
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' (FTA) ने पाकिस्तान के आर्थिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। पाकिस्तानी नेताओं और नीति निर्माताओं ने चेतावनी दी है कि यदि यह समझौता सिरे चढ़ता है, तो पाकिस्तान का यूरोपीय बाजारों में मिलने वाला 'जीरो-टैरिफ हनीमून' हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। अब तक पाकिस्तान को GSP+ स्टेटस के तहत यूरोप में टैक्स-फ्री एक्सपोर्ट का जो एकतरफा फायदा मिल रहा था, भारत के मैदान में उतरते ही वह पूरी तरह धराशायी हो सकता है।
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 27 जनवरी 2026 को हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने दक्षिण एशिया की आर्थिक हलचल को बढ़ा दिया है। जहां भारत इसे अपनी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी जीत मान रहा है, वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान में इसे लेकर गहरी चिंता है। पाकिस्तान के विशेषज्ञों और पूर्व मंत्रियों का मानना है कि इस एक समझौते से पाकिस्तान की कपड़ा इंडस्ट्री और करीब 1 करोड़ नौकरियों पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
पाकिस्तान के लिए 'हनीमून पीरियड' खत्म
पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री गोहर एजाज ने सोशल मीडिया पर चेतावनी देते हुए कहा कि
EU के साथ पाकिस्तान का 'जीरो-टैरिफ हनीमून' खत्म हो गया है और करीब एक करोड़ नौकरियां खतरे में हैं। सरकार उद्योगों को सस्ती बिजली, कम टैक्स और आसान कर्ज दे, ताकि वे दूसरे देशों की इंडस्ट्री से मुकाबला कर सकें।
क्यों डरा हुआ है पाकिस्तान?
पाकिस्तान की चिंता के मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:
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GSP प्लस का लाभ खत्म होना: 2014 से पाकिस्तान को EU की 'GSP प्लस' योजना के तहत लगभग 66% उत्पादों (मुख्यतः कपड़ा) पर शून्य शुल्क (Zero Duty) की सुविधा मिल रही थी। भारत को इन्हीं सामानों पर 9% से 12% तक टैक्स देना पड़ता था। अब भारत-EU FTA के बाद भारत को भी वही 'शून्य शुल्क' सुविधा मिल जाएगी, जिससे पाकिस्तान की बढ़त खत्म हो जाएगी।
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दिसंबर 2027 की समयसीमा: पाकिस्तान की वर्तमान GSP प्लस सुविधा दिसंबर 2027 में समाप्त होने वाली है। यदि इसे आगे नहीं बढ़ाया गया या शर्तों को कड़ा किया गया, तो पाकिस्तान यूरोपीय बाजार से पूरी तरह बाहर हो सकता है।
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भारत की प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति: भारतीय कपड़ा उद्योग पाकिस्तान की तुलना में अधिक आधुनिक और 'वर्टिकली इंटीग्रेटेड' है। ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (APTMA) के प्रमुख कामरान अरशद का मानना है कि टैरिफ समान होते ही खरीदार भारत की ओर रुख करेंगे क्योंकि वहां सप्लाई चेन अधिक मजबूत है।
'मदर ऑफ ऑल डील्स' के मुख्य बिंदु
भारत और EU के बीच हुई इस डील को दुनिया की सबसे बड़ी व्यापारिक संधियों में से एक माना जा रहा है:
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विशाल बाजार: यह समझौता दुनिया की 25% जीडीपी और करीब 2 अरब लोगों के साझा बाजार को जोड़ता है।
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भारतीय लाभ: भारत के 95% श्रम-प्रधान उत्पाद (कपड़े, जूते, कृषि उत्पाद) अब यूरोप में बिना टैक्स के बिकेंगे।
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यूरोपीय लाभ: भारत में आने वाली यूरोपीय लग्जरी कारें (BMW, Mercedes) और वाइन/स्पिरिट्स पर टैरिफ 110-150% से घटकर महज 10-30% रह जाएगा।
यूरोपीय मार्केट में पाकिस्तान की बढ़त खत्म होने का खतरा
पाकिस्तान इस डील से परेशान इसलिए है क्योंकि लंबे समय से उसे यूरोपीय मार्केट में भारत पर बढ़त हासिल थी। इसकी वजह EU की GSP प्लस योजना थी। इस योजना के तहत पाकिस्तान को अपने करीब 66% उत्पादों को बिना टैक्स के यूरोप भेजने की सुविधा मिली हुई थी।
इसमें कपड़ा और रेडीमेड कपड़े जैसे सामान शामिल थे। वहीं भारत को ऐसे ही सामान पर 9 से 12% तक टैक्स देना पड़ता था। इसके बावजूद पाकिस्तान का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 6.2 अरब डॉलर रहा, जबकि भारत का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 5.6 अरब डॉलर का था।
अब भारत और EU के बीच हुआ यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, जिसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है, भारत को यूरोप में बिना टैक्स के बड़ा बाजार देता है। इससे पाकिस्तान की वह बढ़त लगभग खत्म हो जाती है।
इसके साथ ही पाकिस्तान की GSP प्लस सुविधा, जो उसे 2014 में मिली थी, दिसंबर 2027 में खत्म होने वाली है। अगर इसे आगे नहीं बढ़ाया गया, तो पाकिस्तान को यूरोप में मिलने वाली यह खास व्यापार सुविधा पूरी तरह खत्म हो सकती है।
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