बाड़मेर में कलेक्ट्रेट गेट पर चढ़े प्रदर्शनकारी: 'खेजड़ी बचाओ' आंदोलन के समर्थन में उबले युवा, मांगें न मानीं तो जिला स्तर पर धरना देने की चेतावनी
बीकानेर में चल रहे 'खेजड़ी बचाओ' आंदोलन का असर बाड़मेर तक पहुंच गया। गुरुवार को विश्नोई समाज और छत्तीस कौम के युवाओं ने कलेक्ट्रेट पर रैली निकाली, गेट पर चढ़कर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। मांग है - इसी सत्र में खेजड़ी संरक्षण कानून बने, कटाई पर 1 लाख रुपये जुर्माना लगे। यदि बीकानेर महापड़ाव में शाम 4 बजे तक लिखित सहमति नहीं बनी तो बाड़मेर में जिला स्तर पर धरना शुरू होगा। प्रदर्शनकारियों ने खेजड़ी कटाई से मौसम बदलाव और पर्यावरणीय संकट की चिंता जताई।
बीकानेर में चल रहे 'खेजड़ी बचाओ' आंदोलन का असर अब राजस्थान के अन्य जिलों में भी दिखाई देने लगा है। गुरुवार को बाड़मेर जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थानीय लोगों, खासकर विश्नोई समाज और छत्तीस कौम के युवाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर चढ़कर जमकर नारेबाजी की और खेजड़ी वृक्षों की सुरक्षा की मांग को लेकर आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन की शुरुआत और घटनाक्रम
खेजड़ी बचाओ आंदोलन के समर्थन में विश्नोई समाज सहित विभिन्न समुदायों के युवाओं ने रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचे। पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर कलेक्ट्रेट का गेट बंद कर दिया, जिसके बाद कुछ युवा गेट पर चढ़ गए और 'खेजड़ी बचाओ, राजस्थान बचाओ' जैसे नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कलेक्टर को बाहर बुलाने पर अड़े रहे और सीधे बातचीत की मांग की।
कुछ देर बाद पुलिस प्रशासन की समझाइश के बाद गेट खोला गया। युवा कलेक्ट्रेट के अंदर पहुंचे, जहां अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) राजेंद्र सिंह चांदावत ने उनसे वार्ता की। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें खेजड़ी संरक्षण के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की गई है।
मुख्य मांगें और बयान
पर्यावरण प्रेमी और आंदोलन से जुड़े भजनलाल विश्नोई ने कहा कि उनकी प्रमुख मांग है कि इसी विधानसभा सत्र में खेजड़ी बचाओ कानून पारित किया जाए। खेजड़ी काटने पर 1 लाख रुपये का जुर्माना और सख्त सजा का प्रावधान हो। एडीएम ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि इसे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाया जाएगा और शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।
भजनलाल विश्नोई ने आगे बताया कि बीकानेर में मंत्री के.के. विश्नोई के नेतृत्व में सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल महापड़ाव स्थल पर पहुंचा है। यदि शाम 4 बजे तक वहां लिखित सहमति या सकारात्मक निर्णय नहीं होता है, तो बाड़मेर जिला मुख्यालय और उपखंड स्तर पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।उन्होंने पर्यावरणीय प्रभाव पर चिंता जताई और कहा कि खेजड़ी की कटाई से मौसम में तेज बदलाव आ रहा है। पहले जहां सर्दी लंबे समय तक रहती थी, अब कुछ दिनों की ही सर्दी पड़ रही है। खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष होने के साथ थार मरुस्थल की जीवनरेखा है, जिसकी रक्षा आवश्यक है।
पृष्ठभूमि: बीकानेर से शुरू हुआ आंदोलन
यह आंदोलन मुख्य रूप से बीकानेर में सौर ऊर्जा प्लांटों और अन्य विकास परियोजनाओं के नाम पर खेजड़ी वृक्षों की बड़े पैमाने पर कटाई के विरोध में शुरू हुआ था। यहां आमरण अनशन, महापड़ाव और संत समाज की भागीदारी से यह जनआंदोलन का रूप ले चुका है। कई जगहों पर अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ने की खबरें आई हैं, और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे जैसे नेताओं ने भी समर्थन जताया है।