साध्वी प्रेम बाईसा को इंजेक्शन लगाने वाले नर्सिंग ऑफिसर देवी सिंह राजपुरोहित पहली बार आए सामने: सफाई में कहा- डॉक्टर की पर्ची पर लगाए दो इंजेक्शन, मौत संभव नहीं इनसे
जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत का मामला गहरा रहा है। नर्सिंग ऑफिसर देवी सिंह राजपुरोहित ने पहली बार मीडिया से कहा कि उन्होंने डॉक्टर की पुरानी पर्ची पर दो इंजेक्शन (सांस की तकलीफ के लिए) लगाए थे, जो पहले भी दिए जा चुके थे। इंजेक्शन के 25 मिनट बाद तबीयत बिगड़ी और अस्पताल में मौत हो गई। वे सेवा भाव से आश्रम से जुड़े थे और खुद को निर्दोष बताते हैं। पुलिस SIT जांच कर रही है, FSL और विसरा रिपोर्ट का इंतजार है—मौत का असली कारण (इंजेक्शन रिएक्शन, जहर या अन्य) अभी स्पष्ट नहीं।
जोधपुर में प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा (23 वर्ष) की 28 जनवरी 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब भी रहस्यमय बना हुआ है। मौत के मुख्य कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो पाए हैं, और पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) एफएसएल तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इस बीच, जिस नर्सिंग ऑफिसर ने साध्वी को अंतिम बार इंजेक्शन लगाए थे, वे सोमवार को पहली बार मीडिया के सामने आए और अपनी सफाई दी।
मथुरादास माथुर (MDM) अस्पताल में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर देवी सिंह राजपुरोहित ने बताया कि साध्वी प्रेम बाईसा को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। आश्रम से कॉल आने पर वे वहां पहुंचे और डॉक्टर की पुरानी प्रिस्क्रिप्शन (पर्ची) के अनुसार दो इंजेक्शन लगाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये इंजेक्शन प्रेक्षा हॉस्पिटल की ढाई-तीन महीने पुरानी पर्ची पर आधारित थे, और आमतौर पर इनसे मौत होना संभव नहीं है।
घटना का क्रम क्या था?
देवी सिंह के अनुसार:घटना वाले दिन दोपहर करीब 12 बजे आश्रम से पहला कॉल आया, लेकिन वे नहीं जा पाए।शाम 5 बजे दूसरा कॉल आया, तब वे आश्रम पहुंचे।साध्वी को सांस की तकलीफ बताई गई थी, इसलिए उन्होंने डॉक्टर द्वारा लिखे दो इंजेक्शन (स्टेरॉयड जैसे डेक्सोना और दर्द निवारक जैसे डायनपार का जिक्र अन्य रिपोर्ट्स में) लगाए।इंजेक्शन लगाने के बाद साध्वी की स्थिति ठीक लग रही थी, और वे आश्रम से निकल गए।लगभग 20-25 मिनट बाद उन्हें फोन आया कि तबीयत ज्यादा बिगड़ गई है और अस्पताल ले जा रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि अस्पताल जाकर डॉक्टर को पर्ची के बारे में बताएं कि इंजेक्शन उसी के अनुसार लगाए गए थे।
सेवा भाव से जुड़े होने का दावा
देवी सिंह ने बताया कि वे नर्सिंग पेशे के कारण सेवा कार्यों से जुड़े हैं और साधु-संतों के प्रति श्रद्धा रखते हैं। पिछले एक साल से वे इस आश्रम से जुड़े हुए हैं और बीमारी या दर्द में सेवा भाव से जाते रहे हैं। उन्होंने पहले भी दो बार साध्वी प्रेम बाईसा को डॉक्टर की पर्ची के आधार पर दवाई/इंजेक्शन दिए थे, और कभी कोई समस्या नहीं हुई। इस बार भी उन्होंने अपनी मर्जी से कुछ नहीं किया, बल्कि पुरानी पर्ची पर लिखे इंजेक्शन ही लगाए, जो वे खुद लेकर गए थे।
मौत के बाद की स्थिति
साध्वी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां कुछ ही मिनटों में उनकी मौत हो गई। पिता वीरमनाथ का दावा है कि इंजेक्शन लगने के 30 सेकंड बाद ही हालत बिगड़ी, चीखने लगीं, सांस की तकलीफ हुई, कफ निकला और बेहोश होकर दम तोड़ दिया। उन्होंने इसे गलत इंजेक्शन से जोड़ा और 'मुझे न्याय दिलाना' जैसे अंतिम शब्द बताए। वहीं, देवी सिंह का कहना है कि इंजेक्शन से मौत नहीं हो सकती, और वे निर्दोष हैं। पुलिस जांच में वे पूरा सहयोग कर रहे हैं।
जांच की स्थिति
मामले में SIT गठित की गई है। FSL टीम ने आश्रम की तलाशी ली, पिता से 3 घंटे पूछताछ की गई, और नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट से मौत का असली कारण (इंजेक्शन रिएक्शन, कोई अन्य वजह या संदिग्ध तत्व) स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल, इंजेक्शन, खान-पान और अन्य परिस्थितियों पर सवाल बने हुए हैं, लेकिन देवी सिंह ने अपनी भूमिका को पूरी तरह डॉक्टर की सलाह पर आधारित बताया है।