प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में भारत-अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता: टैरिफ में भारी कटौती से राजस्थान की अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत-अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता हुआ, जिसमें अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया। इससे राजस्थान की ज्वेलरी, हैंडीक्राफ्ट, गारमेंट और स्टोन इंडस्ट्री को बड़ा फायदा होगा, निर्यात में तेज वृद्धि और रोजगार सृजन की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुए टेलीफोनिक वार्ता के बाद भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते की घोषणा हुई है। यह समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही व्यापारिक तनाव को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है, जिसमें पहले 25% का रेसिप्रोकल टैरिफ और अतिरिक्त 25% का दंडात्मक टैरिफ (रूसी तेल खरीद के कारण) शामिल था। इस कटौती से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी और वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि "मेड इन इंडिया" उत्पाद अब अमेरिका में मात्र 18% टैरिफ पर उपलब्ध होंगे। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह समझौता दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्रों के बीच सहयोग को मजबूत करेगा, जिससे लोगों के लिए अपार अवसर खुलेंगे।
समझौते की मुख्य बातें
टैरिफ में कटौती: अमेरिका ने भारतीय सामानों पर कुल टैरिफ को 50% से घटाकर 18% किया है। यह कटौती तुरंत प्रभावी मानी जा रही है, हालांकि कुछ विवरण अभी अंतिम रूप से तैयार किए जा रहे हैं।
भारत की प्रतिबद्धताएं: भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को शून्य करने की दिशा में कदम उठाने का वादा किया है। साथ ही, भारत रूसी तेल की खरीद को धीरे-धीरे समाप्त करेगा और अमेरिका (तथा संभावित रूप से वेनेजुएला) से तेल, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि उत्पाद आदि की खरीद बढ़ाएगा। ट्रंप ने दावा किया है कि भारत अमेरिकी उत्पादों की खरीद 500 अरब डॉलर से अधिक करेगा।
संरक्षित क्षेत्र: भारत ने अपनी संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है, जैसा कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में स्पष्ट किया।
राजस्थान के लिए विशेष महत्व
यह समझौता राजस्थान जैसे निर्यात-उन्मुख राज्य के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित होगा। राज्य की अर्थव्यवस्था ज्वेलरी, हैंडीक्राफ्ट, गारमेंट्स, स्टोन (मार्बल, ग्रेनाइट आदि) और टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर काफी हद तक निर्भर है। इन क्षेत्रों से अमेरिका को होने वाला निर्यात पिछले कुछ महीनों में 50% टैरिफ के कारण लगभग ठप हो गया था। अब 18% टैरिफ के साथ ये उद्योग वैश्विक बाजार में फिर से मजबूती से लौट सकेंगे।
ज्वेलरी और जेम्स: जयपुर और आसपास के क्षेत्रों के ज्वेलरी निर्यातक अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे।हैंडीक्राफ्ट और टेक्सटाइल: पारंपरिक हस्तशिल्प और गारमेंट्स सेक्टर में रोजगार बढ़ेगा और निर्यात में उछाल आएगा।स्टोन इंडस्ट्री: राजस्थान की मार्बल और ग्रेनाइट इंडस्ट्री को अमेरिकी निर्माण क्षेत्र में नई मांग मिलेगी।उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि इस समझौते से राजस्थान के निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि होगी, जो राज्य की जीडीपी और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
यह समझौता न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में चीन के विकल्प के रूप में मजबूत बनाता है। दोनों नेताओं के प्रयासों से भारत-अमेरिका संबंधों में नई ऊर्जा आई है, जो भविष्य में और मजबूत सहयोग की नींव रखेगी।