चांदी की कीमत ने रचा इतिहास: पहली बार ₹2 लाख प्रति किलो के पार

17 दिसंबर 2025 को चांदी ने इतिहास रचते हुए पहली बार ₹2 लाख प्रति किलो के पार पहुंच गई। IBJA के अनुसार कीमत ₹8,775 बढ़कर ₹2,00,750 पर बंद हुई। इस साल चांदी ₹1,14,733 महंगी हो चुकी है और सिर्फ 9 महीनों में ₹1 लाख से दोगुनी हुई। तेजी के मुख्य कारण इंडस्ट्रियल डिमांड (सोलर, EV, इलेक्ट्रॉनिक्स), ट्रंप टैरिफ का असर, स्टॉकिंग और ETF निवेश हैं। सोना भी ₹1,32,713 प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा।

Dec 17, 2025 - 13:31
चांदी की कीमत ने रचा इतिहास: पहली बार ₹2 लाख प्रति किलो के पार

17 दिसंबर 2025 को भारतीय सर्राफा बाजार में चांदी ने नया कीर्तिमान स्थापित किया। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी की कीमत ₹8,775 की भारी उछाल के साथ ₹2,00,750 पर पहुंच गई, जो इससे पहले ₹1,91,975 थी। यह पहली बार है जब चांदी ₹2 लाख प्रति किलो के पार निकली है। कुछ स्रोतों के अनुसार, आज की कीमत ₹2,08,000 तक भी दर्ज की गई। इस साल चांदी की कीमत में ₹1,14,733 की बढ़ोतरी हो चुकी है, जो निवेशकों के लिए जबरदस्त रिटर्न का संकेत है।

सिर्फ 9 महीनों में ₹1 लाख से ₹2 लाख तक का सफर इस साल 18 मार्च 2025 को चांदी पहली बार ₹1 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंची थी। इसके बाद मात्र 9 महीनों में यह दोगुनी होकर ₹2 लाख के पार चली गई। तुलनात्मक रूप से, चांदी को ₹50,000 से ₹1 लाख तक पहुंचने में पूरे 14 साल लगे थे। यह तेजी 2025 में चांदी की बुल रन को दर्शाती है, जहां सालाना आधार पर कीमतें लगभग 130% तक बढ़ चुकी हैं।31 दिसंबर 2024 को चांदी की कीमत ₹86,017 प्रति किलो थी, जो अब ₹2,00,750 से ऊपर है। इसी अवधि में सोने की कीमत भी ₹56,551 बढ़ी है – 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹76,162 था, जो अब ₹1,32,713 पर पहुंच गया। आज सोने में ₹936 की बढ़त दर्ज की गई, जबकि 15 दिसंबर को यह ₹1,33,442 के ऑल टाइम हाई पर था।

चांदी की तेजी के प्रमुख कारण 2025 में चांदी की कीमतों में आई इस अभूतपूर्व उछाल के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं:औद्योगिक मांग में भारी बढ़ोतरी: चांदी अब सिर्फ ज्वेलरी तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), बैटरी, मेडिकल उपकरण, मोबाइल, कंप्यूटर और LED लाइट्स में आवश्यक कच्चा माल बन गई है। ग्रीन एनर्जी और AI डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग ने चांदी की इंडस्ट्रियल खपत को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। ट्रंप की टैरिफ नीतियों का असर: अमेरिकी कंपनियां संभावित टैरिफ बढ़ोतरी के डर से चांदी का बड़ा स्टॉक जमा कर रही हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन में कमी आई है। इससे प्रोडक्शन रुकने की आशंका के चलते मैन्युफैक्चरर्स पहले से ही खरीदारी कर रहे हैं, जो आने वाले महीनों में भी तेजी बनाए रख सकता है। निवेशकों की बढ़ती रुचि: सिल्वर ETF और फिजिकल निवेश में उछाल आया है। सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशक चांदी की ओर मुड़ रहे हैं। सप्लाई की कमी: माइनिंग प्रोडक्शन सीमित है, जबकि डिमांड रिकॉर्ड स्तर पर है। वैश्विक स्तर पर सिल्वर डेफिसिट बना हुआ है।

भारत में चांदी की खपत और आयात भारत दुनिया का सबसे बड़ा चांदी खरीदार देश है। 2024 में भारत ने करीब 7,700 टन चांदी की खपत की, जिसमें से केवल 10-20% घरेलू उत्पादन से आई। बाकी 80% आयात पर निर्भर है। मुख्य उपयोग ज्वेलरी के अलावा इंडस्ट्रियल सेक्टर में होता है।असली चांदी की पहचान कैसे करें?कीमतें ऊंची होने के कारण नकली चांदी का खतरा बढ़ जाता है। इन सरल टेस्ट से असली चांदी की जांच करें:मैग्नेट टेस्ट: असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती। आइस टेस्ट: चांदी पर बर्फ रखें – असली चांदी पर यह तेजी से पिघलेगी क्योंकि यह अच्छी थर्मल कंडक्टर है। स्मेल टेस्ट: असली चांदी में कोई गंध नहीं होती; नकली में कॉपर जैसी महक आ सकती है। क्लॉथ टेस्ट: सफेद कपड़े से रगड़ें – अगर काला निशान पड़े तो असली है (ऑक्सीडेशन के कारण)। 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.