मानसून 10 दिन लेट: श्रीलंका के पास तूफानी हवाओं में फंसा, जून-जुलाई में भी पड़ेगी भीषण गर्मी; 10% कम बारिश का अनुमान

देश में मानसून की एंट्री इस बार देरी से होगी। IMD के मुताबिक मानसून केरल तट पर 5 दिन से अटका हुआ है और अगले 2-3 दिन तक आगे बढ़ने के आसार नहीं हैं।

May 29, 2026 - 14:11
मानसून 10 दिन लेट: श्रीलंका के पास तूफानी हवाओं में फंसा, जून-जुलाई में भी पड़ेगी भीषण गर्मी; 10% कम बारिश का अनुमान

देशभर में भीषण गर्मी के बीच मानसून को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया है कि इस बार मानसून की एंट्री तय समय से देरी से होगी। मानसून पिछले 5 दिनों से केरल तट के पास ही रुका हुआ है और अगले 2-3 दिनों तक इसके आगे बढ़ने की संभावना कम है।

आमतौर पर मानसून 1 जून तक केरल पहुंच जाता है। इससे पहले मौसम विभाग ने 26 मई तक मानसून आने का अनुमान जताया था, लेकिन अब इसमें करीब 10 दिन की देरी मानी जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक श्रीलंका के ऊपर बने कम दबाव और तूफानी हवाओं के कारण मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है।

जून-जुलाई में भीषण गर्मी और हीटवेव का खतरा

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि मानसून की देरी के साथ इस बार जून और जुलाई में भी कई राज्यों में हीटवेव का असर बना रह सकता है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में सामान्य से ज्यादा तापमान रिकॉर्ड होने की संभावना है।

IMD के अनुसार इन राज्यों में तापमान सामान्य से करीब 3 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रह सकता है। आमतौर पर जून-जुलाई में जहां तापमान 30 से 35 डिग्री रहता है, वहीं इस बार कई इलाकों में पारा 38 डिग्री तक पहुंच सकता है।

इस साल 10% कम बारिश का अनुमान

मौसम विभाग ने देश में इस साल औसतन 78 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान जताया है, जो सामान्य से करीब 10% कम है। इससे पहले अप्रैल में 80 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान लगाया गया था।

IMD के आंकड़ों के मुताबिक 1971 से 2020 के बीच देश में औसत बारिश 87 सेंटीमीटर रही है। ऐसे में इस साल सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई जा रही है।

इन राज्यों में कम बारिश का खतरा

मौसम विभाग ने जून महीने में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई है। वहीं राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार सबसे ज्यादा चिंता मानसून के “कोर जोन” को लेकर है। यह वह इलाका है जहां खेती मुख्य रूप से मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है।

खेती और आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

कमजोर मानसून का सीधा असर खेती और खाद्य उत्पादन पर पड़ेगा। देश की करीब 64% आबादी कृषि पर निर्भर है और केवल 55% खेती योग्य जमीन ही सिंचाई से जुड़ी है। ऐसे में बारिश कम होने पर खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

बारिश कम होने से दाल, सब्जियां और अन्य खाद्य पदार्थ महंगे हो सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में आय घटने से बाजार की मांग भी कमजोर पड़ सकती है। ट्रैक्टर, बाइक और अन्य ग्रामीण बाजार से जुड़े सेक्टरों पर भी असर देखने को मिल सकता है।

इसके अलावा डैम और जलाशयों में पानी का स्तर कम रहने से आगे चलकर पेयजल संकट भी गहरा सकता है। ज्यादा गर्मी के कारण बिजली की खपत बढ़ेगी, जिससे पावर सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है।

अल-नीनो बना मानसून की कमजोरी की वजह

मौसम विभाग ने मानसून की कमजोरी के पीछे अल-नीनो प्रभाव को बड़ी वजह बताया है। अल-नीनो के दौरान समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है, जिससे हवाओं का पैटर्न बदल जाता है और बारिश का चक्र प्रभावित होता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक अल-नीनो एक्टिव होने पर प्रशांत महासागर से आने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इससे भारत में बारिश कम होती है और कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।

पिछले साल जल्दी पहुंचा था मानसून

पिछले साल मानसून तय समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। सामान्य तौर पर मानसून जून के मध्य तक महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक पहुंचता है और जुलाई के पहले सप्ताह तक पूरे देश में फैल जाता है।

हालांकि इस बार मौसम की स्थिति अलग बनी हुई है और मानसून की धीमी चाल ने किसानों से लेकर आम लोगों तक की चिंता बढ़ा दी है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground राजस्थान और देश-दुनिया की ताज़ा, सटीक और भरोसेमंद खबरें सरल और प्रभावी अंदाज़ में प्रस्तुत करना, ताकि हर पाठक तक सही जानकारी समय पर पहुँच सके।