खाटू मेले में भीड़ का ऐसा मैनेजमेंट कि DGP ने फिर चुना… SP और SHO को दूसरी बार डिस्क

सीकर एसपी प्रवीण नायक और खाटूश्यामजी SHO पवन कुमार चौबे को बेहतरीन क्राउड मैनेजमेंट के लिए दूसरी बार डीजीपी डिस्क के लिए चुना गया है।

May 30, 2026 - 13:18
खाटू मेले में भीड़ का ऐसा मैनेजमेंट कि DGP ने फिर चुना… SP और SHO को दूसरी बार डिस्क

सीकर जिले में खाटूश्यामजी धार्मिक मेले के दौरान भीड़ नियंत्रण को लेकर इस बार पुलिस व्यवस्था ने एक नया उदाहरण पेश किया। इसी प्रदर्शन के आधार पर सीकर के पुलिस अधीक्षक (SP) प्रवीण नायक और खाटूश्यामजी SHO पवन कुमार चौबे को दूसरी बार डीजीपी डिस्क के लिए चयनित किया गया है।

राजस्थान पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा की ओर से जारी की गई सूची में दोनों अधिकारियों के नाम शामिल हैं। यह सम्मान उन्हें खाटूश्यामजी मेले के दौरान किए गए प्रभावी और नवाचारपूर्ण क्राउड मैनेजमेंट के लिए दिया जा रहा है।

फाल्गुनी मेले में लागू हुआ स्मार्ट सिस्टम

इस बार फाल्गुनी मेले के दौरान पुलिस ने पारंपरिक व्यवस्था से हटकर कई नए प्रयोग किए। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:

  • कलर-कोडेड पार्किंग सिस्टम
  • QR कोड आधारित एंट्री और पार्किंग व्यवस्था
  • रियल टाइम भीड़ निगरानी
  • अलग-अलग जोन में भीड़ विभाजन

इन नवाचारों के कारण लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद व्यवस्था नियंत्रण में रही और किसी बड़ी अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी।

भीड़ के हिसाब से तुरंत एक्शन प्लान

एसपी प्रवीण नायक और SHO पवन कुमार चौबे ने भीड़ बढ़ने की स्थिति में तत्काल एक्शन प्लान तैयार कर उसे मौके पर लागू किया। इसके तहत:

  • भीड़ के दबाव वाले क्षेत्रों में रूट डायवर्जन
  • अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती
  • प्रवेश और निकास मार्गों का सुचारु संचालन
  • मोबाइल टीमों की सक्रिय निगरानी

इन सभी उपायों से भीड़ का दबाव नियंत्रित रहा और श्रद्धालुओं को सुगम अनुभव मिला।

मासिक मेलों में भी दिखा असर

केवल फाल्गुनी मेले ही नहीं, बल्कि खाटूश्यामजी में होने वाले मासिक मेलों के दौरान भी भीड़ प्रबंधन की चुनौती रहती है। इस दौरान भी पुलिस टीम ने स्थिति के अनुसार तुरंत रणनीति बदलकर व्यवस्था को संभाला।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, भीड़ नियंत्रण में इस तरह की तत्परता और तकनीक का इस्तेमाल पहले कम देखने को मिलता था।

दूसरी बार मिला बड़ा सम्मान

बेहतर प्रदर्शन के चलते दोनों अधिकारियों को पहले भी डीजीपी डिस्क मिल चुकी है, और अब दूसरी बार इस सम्मान के लिए चयनित किया गया है। यह दर्शाता है कि उनके नेतृत्व में खाटूश्यामजी जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थल पर पुलिसिंग का मॉडल प्रभावी साबित हुआ है।

क्या बन रहा है नया मॉडल?

खाटूश्यामजी मेले की यह व्यवस्था अब राजस्थान में धार्मिक आयोजनों के लिए एक संभावित मॉडल के रूप में देखी जा रही है, जहां तकनीक और मैनेजमेंट को मिलाकर भीड़ नियंत्रण किया जा सकता है।

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