“UPSC से सीखिए…”: NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट की NTA को फटकार, कहा- जवाबदेही तय किए बिना नहीं रुकेंगी ऐसी घटनाएं
सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG पेपर लीक मामले में NTA को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाएं नहीं रुकेंगी।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि जब तक जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि UPSC देश में इससे भी बड़े स्तर पर परीक्षाएं आयोजित करता है, लेकिन वहां कभी पेपर लीक जैसी स्थिति सामने नहीं आई। NTA को UPSC से सीखने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री खुद कर रहे मॉनिटरिंग
सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद NEET पेपर लीक मामले की जांच और सुधार प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं ताकि भविष्य में कोई चूक न हो।
उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर है और 21 जून को होने वाले री-एग्जाम के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। पूरे सिस्टम की हाई-लेवल मॉनिटरिंग की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल – सुधार के बाद भी पेपर लीक क्यों?
सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने 2024 के NEET पेपर लीक मामले के बाद गठित हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी के प्रमुख और पूर्व इसरो चीफ डॉ. के. राधाकृष्णन से पूछा कि जब इतनी सिफारिशें लागू की गई थीं, तो फिर इस बार पेपर लीक जैसी घटना कैसे हो गई?
इस पर राधाकृष्णन ने बताया कि समिति की अधिकांश सिफारिशों को लागू किया जा चुका है। NEET-PG 2025 सफलतापूर्वक आयोजित हुआ था और इस बार सामने आई कमजोरियों को भी जल्द दूर कर लिया जाएगा।
हालांकि कोर्ट इससे संतुष्ट नजर नहीं आया। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि केवल सिफारिशें बना देना काफी नहीं है, बल्कि मजबूत संस्थागत व्यवस्था बनाना जरूरी है।
“NTA अभी मजबूत संस्था की तरह काम नहीं कर रही”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NTA फिलहाल स्थायी और मजबूत संस्था की तरह काम नहीं कर रही है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि IITs, बड़ी यूनिवर्सिटीज और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लेकर फुल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके।
कोर्ट ने यह भी कहा कि छात्रों की मेहनत और भावनाओं को देखते हुए उन्हें ऐसे मानसिक ट्रॉमा से बचाना बेहद जरूरी है।
कोर्ट रूम में क्या-क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान कई अहम सवाल-जवाब हुए—
- जस्टिस नरसिम्हा ने पूछा कि हाई-पावर्ड कमेटी होने के बावजूद पेपर लीक कैसे हुआ?
- राधाकृष्णन ने कहा कि 35 लॉन्ग टर्म और 60 शॉर्ट टर्म सुझाव दिए गए थे, जिनमें अधिकांश लागू हो चुके हैं।
- कोर्ट ने पूछा कि अगर तैयारी पूरी थी, तो फिर NEET-UG में गड़बड़ी क्यों हुई?
- राधाकृष्णन ने माना कि पेपर से छेड़छाड़ सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई।
- कोर्ट ने कहा कि असली जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाएं नहीं रुकेंगी।
- सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि 21 जून के री-एग्जाम के लिए नया सिक्योरिटी मैकेनिज्म तैयार किया गया है।
3 मई को हुई थी परीक्षा, 12 मई को रद्द
देशभर में 3 मई को NEET-UG परीक्षा आयोजित हुई थी। इसमें करीब 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। परीक्षा देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर कराई गई थी।
7 मई को पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद मामला तेजी से बढ़ा। इसके बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को री-एग्जाम कराने का फैसला लिया गया।
इस मामले की जांच फिलहाल CBI कर रही है।
अब तक 13 आरोपी गिरफ्तार
CBI जांच में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें महाराष्ट्र और राजस्थान से जुड़े शिक्षक, कोचिंग संचालक, दलाल और मेडिकल स्टूडेंट शामिल हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने परीक्षा से पहले पेपर और प्रश्नों के उत्तर उम्मीदवारों तक पहुंचाने के लिए बड़ा नेटवर्क तैयार किया था। कई आरोपियों पर लाखों रुपए लेकर पेपर उपलब्ध कराने के आरोप हैं।
मेडिकल छात्रों के भविष्य पर बड़ा असर
NEET भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है। इसके जरिए देशभर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, BAMS, BHMS और नर्सिंग कोर्सेज में एडमिशन मिलता है।
देश में लगभग 1 लाख MBBS और 27 हजार से ज्यादा BDS सीटों पर दाखिला इसी परीक्षा के जरिए होता है। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को मानसिक तनाव में डाल दिया है।
छात्रों के लिए कोर्ट का बड़ा संदेश
सुप्रीम Court ने साफ कहा कि युवाओं की मेहनत और सपनों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि NEET पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों को अंदर तक झकझोर देती हैं और व्यवस्था पर भरोसा कमजोर करती हैं।
अब सभी की नजर 21 जून को होने वाले री-एग्जाम और सरकार द्वारा किए जा रहे सुरक्षा इंतजामों पर टिकी हुई है।