RLP कार्यकर्ताओं को जमानत देना पड़ा भारी? आधी रात तहसीलदार का तबादला, कुचामन की राजनीति में मचा बवाल
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के विरोध प्रदर्शन मामले में RLP कार्यकर्ताओं को जमानत देने वाले कुचामन सिटी के तहसीलदार कैलाश ईनाणियां का आधी रात तबादला कर दिया गया।
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर प्रशासनिक तबादले को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के कुचामन दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के बाद अब उसका असर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कुचामन सिटी के तहसीलदार कैलाश ईनाणियां का अचानक आधी रात को तबादला किए जाने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है।
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात करीब एक बजे प्रशासनिक आदेश जारी कर तहसीलदार कैलाश ईनाणियां को डीडवाना-कुचामन जिले से हटाकर बांसवाड़ा जिले के गांगड़ तलाई में पदस्थापित कर दिया। आदेश जारी होने के तुरंत बाद जिला कलेक्टर अवधेश मीना ने उन्हें कार्यमुक्त कर नए पद पर जॉइन करने के निर्देश भी जारी कर दिए।
जमानत आदेश के बाद बढ़ी चर्चाएं
तहसीलदार के तबादले को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। दरअसल, हाल ही में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के कुचामन दौरे के दौरान राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए काले झंडे दिखाए थे।
पुलिस ने इस मामले में कई RLP कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। बाद में उनकी जमानत याचिका तहसीलदार कैलाश ईनाणियां की अदालत में पेश हुई, जहां उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत जमानत मंजूर कर दी थी।
इसी के बाद उनके तबादले को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। विपक्षी खेमे और स्थानीय राजनीतिक विश्लेषक इस तबादले को एक "पनिश्ड पोस्टिंग" के तौर पर देख रहे हैं, हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इसे नियमित स्थानांतरण बताया जा रहा है।
कुचामन में बढ़ा सियासी तापमान
इस घटनाक्रम के बीच कुचामन क्षेत्र में राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। शुक्रवार देर रात पुलिस ने RLP के प्रमुख नेता रामनिवास पोषक सहित कुछ अन्य कार्यकर्ताओं को एक अलग मामले में दोबारा गिरफ्तार कर लिया।
कार्यकर्ताओं की रिहाई के बाद हुई इस पुनः गिरफ्तारी से RLP समर्थकों और कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है। पार्टी कार्यकर्ता इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि गिरफ्तारी अलग मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।
RLP कार्यकर्ताओं में आक्रोश
रामनिवास पोषक की गिरफ्तारी और तहसीलदार के तबादले के बाद RLP कार्यकर्ताओं ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि विरोध की आवाज दबाने के लिए प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई का सहारा लिया जा रहा है।
वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि इसमें प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक दबाव के आरोप आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।